जयपुर: सरकारी नौकरी के लिए मां के मर्डर की अरोपी आयुषी देने लगी पुलिस को धमकी, चेहरे पर न दर्द न पछतावा

शरत कुमार

• 01:03 PM • 10 Jul 2026

जयपुर में 24 साल की लॉ छात्रा आयुषी शर्मा पर अनुकंपा की नौकरी और 10 करोड़ की संपत्ति के लिए अपने ताऊ के साथ मिलकर अपनी सगी मां की स्कॉर्पियो से कुचलवाकर हत्या करवाने का आरोप है.

पुलिस को धमका रही थी मां की कातिल आयुषी (Photo: itg)
पुलिस को धमका रही थी मां की कातिल आयुषी (Photo: itg)
Google CTA

हाल ही में राजस्थान के जयपुर की रहने वाली 24 साल की आयुषी शर्मा पर आरोप है कि उसने सरकारी नौकरी और प्रॉपर्टी के लिए अपनी ही मां की बेरहमी से स्कॉर्पियो कार से कुचलवाकर हत्या करवा दी थी. पहले तो मामला एक्सीडेंट का लगा लेकिन जब पुलिस ने तफ्तीश की तो पता चला की ये कोई एक्सीडेंट नहीं बल्कि सुनियोजित मर्डर है.

Read more!

जब पुलिस की टीम पूछताछ करने 24 साल की LLB स्टूडेंट और मृतका की बेटी आयुषी के घर पहुंची थी बराने के बजाय आयुषी ने पुलिसवालों को ही कानून की धमकियां देना शुरू कर दिया. जिसके बाद पुलिस ने समझदारी दिखाई और स्थानीय सेवर थाने की मदद से आयुषी और उसकी ताई को यह कहकर बुलाया कि बस बयान दर्ज करके छोड़ देंगे. थाने लाने के बाद ताई को वापस भेज दिया गया और आयुषी को सीधे जयपुर लाया गया.

जयपुर में जब पुलिस ने बाकी आरोपियों को आयुषी के सामने खड़ा किया तो उसका सारा घमंड टूट गया और उसने अपना गुनाह कबूल कर लिया. पुलिस अधिकारियों के मुताबिक अपनी सगी मां की जान लेने के बाद भी आयुषी के चेहरे पर पछतावे की एक लकीर तक नहीं थी. वह बेहद बेखौफ होकर पुलिस के तीखे सवालों के उल्टे-सीधे जवाब दे रही थी. 

तो क्या है ये पूरा मामला 

राजस्थान की राजधानी जयपुर के एयरपोर्ट कॉलोनी में रहने वाली एक विधवा महिला नीरज शर्मा की बेरहमी से स्कॉर्पियो कार से कुचलकर हत्या कर दी गई. इस मामले में रोंगटे खड़े कर देने वाली बात ये है कि इस खौफनाक साजिश को अंजाम देने वाला कोई और नहीं बल्कि जिस महिला की मौत हुई उनकी खुद की 24 साल की बेटी आयुषी शर्मा थी. LLB की पढ़ाई कर रही आयुषी ने अनुकंपा के आधार पर मां की सरकारी नौकरी पाने और करोड़ों की जमीन हड़पने के लिए अपने ही ताऊ और चचेरे भाई के साथ मिलकर इस पूरी वारदात को अंजाम दिया.

इस कहानी की शुरुआत करीब ढाई साल पहले हुई थी. जयपुर की कोर्ट में एलडीसी (LDC) पद पर तैनात विजय शर्मा ने एयरपोर्ट कॉलोनी में अपना घर बनाया था जहां वे अपनी पत्नी नीरज, बेटी आयुषी और एक मानसिक रूप से दिव्यांग बेटे के साथ रहते थे. करीब साल भर पहले विजय शर्मा का निधन हो गया. पिता की मौत के वक्त आयुषी 12वीं पास कर चुकी थी और वह चाहती थी कि पिता की जगह अनुकंपा नियुक्ति यानी तरस के आधार पर जो नौकरी मिलती है वो उसे मिले. शुरुआत में मां नीरज भी इसके लिए तैयार थीं लेकिन नीरज के भाई (जो खुद कोर्ट में एलडीसी हैं) ने अपनी बहन को समझाया कि आयुषी अभी कम पढ़ी-लिखी है और घर में एक दिव्यांग बेटा भी है जिसकी देखभाल करनी है. उन्होंने सलाह दी कि नीरज खुद नौकरी कर लें और आयुषी को आगे पढ़ा-लिखाकर काबिल बनाएं. भाई की बात मानकर नीरज ने नौकरी जॉइन कर ली, और यही बात आयुषी को चुभ गई. 

10 करोड़ की जमीन, नौकरी और दो मकानों का सौदा

मां के नौकरी करने के फैसले से आगबबूला होकर आयुषी घर छोड़कर पिता के पुराने मकान (कल्याण कॉलोनी) में रहने चली गई. वहां उसने अपने ताऊ मोहन शर्मा के बेटे बलराम के साथ एलएलबी में एडमिशन ले लिया. दोनों साथ रहने लगे और यहीं पर आयुषी के दिमाग में मां को रास्ते से हटाने का गंदा खेल शुरू हुआ. आयुषी ने अपने चचेरे भाई बलराम को एक बड़ा लालच दिया.

आयुषी ने बलराम से कहा कि अगर वह मां की हत्या करने में उसकी मदद कर ता है तो वो उसे आगरा रोड की 5 बीघा और भरतपुर की 4 बीघा जमीन दे देगी. जिनकी कुल कीमत करीब 10 करोड़ रुपये है. साथ ही मां की मौत के बाद जयपुर के दोनों मकान और सरकारी नौकरी भी आयुषी को मिल जाएगी. बलराम इस लालच में आ गया और उसने यह बात अपने पिता यानी आयुषी के ताऊ मोहन शर्मा को बताई. इसके बाद तीनों ने मिलकर नीरज शर्मा की हत्या को एक एक्सीडेंट का रूप देने का प्लान बनाया.

थार से नाकाम कोशिश और नींबू-मिर्च का टोटका

ताऊ मोहन शर्मा ने इस काम के लिए भरतपुर के हेमंत शर्मा नाम के एक शख्स से संपर्क किया. करीब एक महीने पहले, हेमंत ने एक 'थार' गाड़ी से नीरज शर्मा को कुचलने की कोशिश की थी, लेकिन किस्मत से वह बच गईं. इस हमले के बाद नीरज को खतरा महसूस होने लगा. उन्होंने अपने भाई को इस बारे में बताया, घर से बाहर निकलना कम कर दिया, सुरक्षा के लिए दरवाजों पर जाली लगवाई और घर के बाहर 4 सीसीटीवी कैमरे भी लगवा दिए.

जब पहली कोशिश नाकाम रही, तो शातिर आयुषी ने मां को घर से बाहर निकालने के लिए तरह-तरह के टोने-टोटकों का सहारा लिया. वह घर के आसपास नींबू, मिर्च और लाल रंग फेंकने लगी ताकि डर के मारे उसकी मां बाहर आए. इसी बीच, उसने अपने ताऊ पर दोबारा नया प्लान बनाने का दबाव डाला. इस बार हेमंत शर्मा ने पूरी साजिश के लिए 7 लाख रुपये की सुपारी ली. उसने हरियाणा नंबर की एक स्कॉर्पियो कार 35 हजार रुपये में किराये पर ली और रेकी व हमले के लिए आकाश, अरविंद, रोहित और मोहित नाम के लड़कों को काम पर लगाया.

मां की पल पल की खबर रख रही थी आयुषी

बीते 4 जुलाई को नीरज शर्मा अपने दिव्यांग बेटे को फिजियोथेरेपी दिलाने बाहर ले गई थीं. आयुषी पल-पल की खबर रख रही थी. उसने मौका देखकर अपनी मां को फोन किया और किसी जरूरी काम का बहाना बनाकर तुरंत घर बुलाया. जब नीरज लौट रही थीं तो 60 फीट रोड पर पहले से घात लगाए बैठे रोहित और मोहित ने स्कॉर्पियो में सवार आकाश को इशारा कर दिया.

आकाश ने रफ्तार बढ़ाई और पूरी ताकत से स्कॉर्पियो नीरज शर्मा के ऊपर चढ़ा दी. टक्कर इतनी जोरदार थी कि नीरज करीब 100 मीटर दूर जाकर गिरीं और मौके पर ही दम तोड़ दिया. वारदात के तुरंत बाद आयुषी ने अपने मामा को फोन कर रोने का नाटक किया और कहा कि मां का एक्सीडेंट हो गया है. ताऊ मोहन शर्मा भी तुरंत मौके पर पहुंचे और सबूत मिटाने की जल्दबाजी में शव को सीधे पैतृक गांव रूपवास ले गए. हालांकि, आयुषी के अजीब व्यवहार को देखकर मामा को शक हो गया और उन्होंने पुलिस से हादसे की गहराई से जांच करने की मांग की.

सीसीटीवी ने खोला राज

पुलिस ने जब दुर्घटना स्थल के आसपास के सीसीटीवी फुटेज खंगाले तो कहानी पूरी तरह पलट गई. फुटेज में साफ दिख रहा था कि पूरी सड़क खाली थी और नीरज बिल्कुल किनारे चल रही थीं, इसके बावजूद कार ने उन्हें जानबूझकर निशाना बनाया. सड़क पर दो संदिग्ध युवक भी दिखे जो एक्सीडेंट के बाद बिना रुके एक बाइक सवार के साथ भाग निकले.

जब पुलिस मामले की तफ्तीश करते हुए स्कॉर्पियो के मालिक तक पहुंची तो उसने हेमंत का नाम लिया. हेमंत को दबोचा गया तो उसने ताऊ मोहन शर्मा का राज उगल दिया. पुलिस जब आरोपी चचेरे भाई बलराम को पकड़ने गांव रूपवास पहुंची तो वह फरार हो चुका था.

ये भी पढ़ें: जयपुर: सरकारी नौकरी और प्रॉपर्टी के लालच में रिश्तों का कत्ल, बेटी ने 7 लाख की सुपारी देकर मां को स्कॉर्पियो से कुचलवाया