क्या किसी जनप्रतिनिधि या वीआईपी से टोल प्लाजा पर नियम के मुताबिक पहचान पत्र (ID Card) मांगना गुनाह है? राजस्थान के जयपुर-दौसा हाईवे पर एक ऐसा ही मामला सामने आया है, जो अब सूबे में एक नई सियासी और प्रशासनिक बहस का मुद्दा बन गया है. जमवारामगढ़ से बीजेपी विधायक महेंद्रपाल मीणा की गाड़ी से टोल कर्मचारी द्वारा पहचान पत्र मांगे जाने के बाद टोल प्लाजा पर हाई वोल्टेज ड्रामा देखने को मिला. बात इतनी बढ़ गई कि मौके पर पुलिस बुलानी पड़ी और एक टोल कर्मचारी को गिरफ्तार तक कर लिया गया.
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आईडी कार्ड मांगने पर शुरू हुआ विवाद
यह पूरा मामला जयपुर-दौसा हाईवे के नेकावाला टोल प्लाजा का है. जानकारी के मुताबिक, रोज की तरह टोल प्लाजा से गाड़ियां गुजर रही थीं, तभी वहां बीजेपी विधायक महेंद्रपाल मीणा की गाड़ी आकर रुकी. विधायक टोल शुल्क में मिलने वाली सरकारी छूट का लाभ लेकर वहां से गुजर रहे थे. इसी दौरान ड्यूटी पर मौजूद टोल कर्मचारी ने नियम के तहत पहचान सत्यापित करने के लिए विधायक से उनका आईडी कार्ड दिखाने को कह दिया.
आईडी कार्ड मांगे जाने की बात पर विधायक नाराज हो गए. देखते ही देखते दोनों पक्षों के बीच तीखी नोकझोंक शुरू हो गई और कुछ ही सेकंड में पूरा माहौल गरमा गया. टोल प्लाजा पर हंगामे जैसी स्थिति बन गई, जिसका एक सीसीटीवी फुटेज भी सामने आया है.
पुलिस की एंट्री, टोल कर्मचारी गिरफ्तार
हंगामे की सूचना मिलते ही रायसर थाना पुलिस तुरंत मौके पर पहुंची और दोनों पक्षों को शांत कराने की कोशिश की. लेकिन यह विवाद यहीं खत्म नहीं हुआ. विधायक की शिकायत के बाद पुलिस टोल मैनेजर और संबंधित कर्मचारी को थाने ले गई. पुलिस ने पूछताछ के बाद टोल मैनेजर को समझाइश देकर पाबंद किया, जबकि आईडी मांगने वाले एक टोल कर्मचारी के खिलाफ शांति भंग की धारा में कार्रवाई करते हुए उसे गिरफ्तार कर लिया.
टोल प्रबंधन का तर्क: नियमों के तहत मांगी गई आईडी
इस पूरे विवाद में अब टोल प्रबंधन का पक्ष भी सामने आया है, जो काफी दिलचस्प है. टोल प्रबंधन का कहना है कि भारतीय राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण (NHAI) के नियमों के मुताबिक, टोल छूट का लाभ लेने वाले जनप्रतिनिधियों या किसी भी अन्य पात्र व्यक्ति से जरूरत पड़ने पर पहचान पत्र मांगना पूरी तरह से वैध प्रक्रिया है.
प्रबंधन का तर्क है कि हाईवे पर कई बार फर्जी पहचान दिखाकर टोल छूट लेने की कोशिशें सामने आती रहती हैं, इसलिए आईडी का सत्यापन करना कर्मचारियों की जिम्मेदारी का हिस्सा है. कर्मचारी सिर्फ अपना कर्तव्य निभा रहा था.
उठ रहे हैं कई गंभीर सवाल
इस घटना के बाद अब सोशल मीडिया से लेकर सियासी गलियारों में कई सवाल तैर रहे हैं. सवाल यह कि क्या नियमों का पालन करवाने वाले कर्मचारी ने सिर्फ अपनी ड्यूटी की थी या फिर विधायक के साथ व्यवहार में कोई मर्यादा लांघी गई? अगर पहचान पत्र मांगना एनएचएआई के नियमों के तहत अनिवार्य है, तो इस पर इतना बड़ा विवाद क्यों खड़ा हुआ? फिलहाल पुलिस ने शांति भंग के आरोप में एक कर्मचारी को गिरफ्तार कर आगे की जांच शुरू कर दी है, वहीं सीसीटीवी फुटेज के आधार पर सच का पता लगाने की कोशिश की जा रही है.
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