17 क्लासरूम और 76 टीचर! जयपुर के इस मूक-बधिर स्कूल में क्या चल रहा था खेल?

न्यूज तक डेस्क

• 12:32 PM • 08 Aug 2026

जयपुर के सेठ आनंदीलाल पोदार मूक-बधिर स्कूल में जर्जर छत, गंदे शौचालय और पानी की किल्लत से परेशान दिव्यांग बच्चों ने सड़क पर उतरकर मौन प्रदर्शन किया. 17 कमरों में 76 शिक्षकों की तैनाती पर भी सवाल उठे. प्रदर्शन के बाद प्रशासन ने एक्शन लेते हुए प्रिंसिपल को हटा दिया और जांच कमेटी गठित कर दी.

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जयपुर के आनंदीलाल पोदार मूक-बधिर स्कूल की बदहाली और जर्जर स्थिति के खिलाफ जब बोल न पाने वाले दिव्यांग बच्चों ने सड़क पर उतरकर अपना विरोध जताया, तो सो रहा प्रशासन अचानक हरकत में आ गया. जर्जर छतें, गंदा पानी, बदबूदार शौचालय और केवल 17 क्लासरूम होने के बावजूद 76 अध्यापकों की तैनाती के इस खेल ने पूरी व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं. मामले के तूल पकड़ते ही शिक्षा विभाग ने तुरंत कार्रवाई करते हुए स्कूल के प्रिंसिपल को पद से हटा दिया, जबकि एक शिक्षक व चतुर्थ श्रेणी कर्मचारी को एपीओ कर दिया गया है.

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राजस्थान की राजधानी जयपुर स्थित राजकीय सेठ आनंदीलाल पोदार मूक बधिर उच्च माध्यमिक विद्यालय में करीब 592 दिव्यांग छात्र-छात्राएं पढ़ते हैं. लंबे समय से छात्र स्कूल की बुनियादी समस्याओं से जूझ रहे थे. क्लासरूम की छतें इस कदर जर्जर हैं कि पढ़ाई के दौरान प्लास्टर और मलबे के टुकड़े बच्चों के सिर पर गिरते रहते हैं. इसके अलावा स्कूल में वाटर कूलर खराब पड़े हैं, पीने का साफ पानी नहीं मिलता और शौचालयों में गंदगी व गुटखे के रैपर का ढेर लगा हुआ है.

बच्चों के मौन प्रदर्शन के बाद जागा प्रशासन

अपनी समस्याओं की सुनवाई न होने पर जब ये दिव्यांग छात्र अपनी मांगों को लेकर सड़क पर उतरे, तब जाकर अधिकारियों की नींद टूटी. शिक्षा विभाग की टीम ने मौके पर पहुंचकर स्थिति का जायजा लिया. शुरुआती जांच के बाद प्रिंसिपल भरत जोशी को हटा दिया गया और अन्य कर्मचारियों पर कार्रवाई करते हुए व्यवस्था सुधारने के लिए एक विशेष कमेटी का गठन किया गया है.

17 कमरों में 76 शिक्षकों का खेल!

जांच के दौरान एक और बड़ा खुलासा हुआ. स्कूल में कुल 17 क्लासरूम हैं लेकिन स्टाफ की संख्या 76 दर्ज है. आरोप है कि कई प्रभावशाली शिक्षक जयपुर में मनचाही पोस्टिंग के लिए यहां ट्रांसफर करवा लेते हैं लेकिन नियमित रूप से पढ़ाने नहीं आते. मीडिया द्वारा सवाल पूछे जाने पर वहां मौजूद शिक्षक कोई संतोषजनक जवाब देने के बजाय अपनी जिम्मेदारी से पल्ला झाड़ते नजर आए.