IRS अफसर की दहेज की भूख, 1 करोड़ नकद और लग्जरी कार के लिए पत्नी को पीटा, कोर्ट ने सासू मां पर भी कसा शिकंजा

जयपुर में एक आईआरएस अफसर पर अपनी पत्नी से 1 करोड़ रुपये और लग्जरी कार दहेज में मांगने और मारपीट का आरोप लगा है. इस मामले में कोर्ट ने पुलिस की जांच को पक्षपाती बताते हुए अफसर की मां को भी आरोपी बनाया है.

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विशाल शर्मा

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दहेज की भूख केवल मध्यमवर्गीय परिवारों तक सीमित नहीं है, बल्कि शिक्षित और ऊंचे ओहदों पर बैठे लोग भी इस कुप्रथा की गिरफ्त में हैं. जयपुर से एक ऐसा ही सनसनीखेज मामला सामने आया है, जहां अहमदाबाद में तैनात एक आईआरएस (IRS) अफसर पर अपनी पत्नी को दहेज के लिए प्रताड़ित करने और मारपीट करने का आरोप लगा है. अब इस मामले में कोर्ट ने बड़ा फैसला सुनाते हुए अफसर की मां को भी सह-आरोपी माना है.

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क्या है पूरा मामला?

अहमदाबाद में आयकर विभाग (Income Tax Department) में असिस्टेंट कमिश्नर के पद पर तैनात चिराग झिरवाल की शादी दिसंबर 2022 में जयपुर की पूर्वा बागड़ी से हुई थी. पूर्वा का आरोप है कि शादी से पहले ही दहेज की मांग शुरू हो गई थी. सगाई के लिए जयपुर के आलीशान रामबाग पैलेस होटल का दबाव बनाया गया, जिसे पूर्वा के परिवार ने सामाजिक मान-मर्यादा के चलते कर्ज लेकर पूरा किया.

1 करोड़ नकद और लग्जरी कार की मांग

पीड़िता के अनुसार, शादी के समय और विदाई के वक्त भी चिराग और उसके परिवार ने 1 करोड़ रुपये नकद, एक प्लॉट और वोल्वो (Volvo) या फॉर्च्यूनर (Fortuner) जैसी लग्जरी एसयूवी की मांग की. पूर्वा का दावा है कि जब यह मांगें पूरी नहीं हुईं, तो उसे विदा न करने की धमकी दी गई. किसी तरह हाथ-पैर जोड़कर विदाई हुई, लेकिन ससुराल पहुंचने के बाद प्रताड़ना का सिलसिला शुरू हो गया.

पद और रसूख के इस्तेमाल का आरोप

पूर्वा ने आरोप लगाया कि शादी के मात्र 8 दिन बाद ही उसे वापस मायके छोड़ दिया गया. साल 2024 में जयपुर के चित्रकूट थाने में दहेज प्रताड़ना, मारपीट और स्त्री धन के दुरुपयोग का मामला दर्ज कराया गया. पीड़िता का आरोप है कि चिराग ने अपने पद और रसूख का इस्तेमाल कर जांच को प्रभावित किया. शुरुआत में उसकी मां (पूर्वा की सास) कविता उर्फ कमला का नाम जांच से हटवा दिया गया था.

कोर्ट का कड़ा रुख, सासू मां भी फंसी

इस मामले में नया मोड़ तब आया जब कोर्ट ने पुलिस की जांच पर गंभीर सवाल उठाए. अदालत ने कहा कि ऐसा लगता है मानो जांच 'आंख मूंदकर' की गई है. कोर्ट ने पीड़िता के आरोपों और गवाहों के बयानों को गंभीरता से लेते हुए सास कविता को फिर से सह-आरोपी माना है और उन्हें 8 जुलाई 2026 को कोर्ट में पेश होने का आदेश दिया है.

सिस्टम पर सवाल

यह मामला सिर्फ एक पारिवारिक विवाद नहीं है, बल्कि यह सिस्टम पर भी सवाल खड़े करता है. क्या एक प्रभावशाली अफसर अपने पद का गलत इस्तेमाल कर कानूनी जांच को रोक सकता है? पूर्वा का परिवार अब उन पुलिस अधिकारियों के खिलाफ भी कार्रवाई की मांग कर रहा है जिन्होंने रसूख के दबाव में आकर आरोपियों के नाम जांच से हटा दिए थे.

 

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