राजस्थान की राजधानी जयपुर के मालवीय नगर इलाके में प्रशासन का एक बहुत बड़ा एक्शन देखने को मिला है. जयपुर विकास प्राधिकरण (JDA) ने भारी पुलिस बल की मौजूदगी में सड़क चौड़ीकरण परियोजना के आड़े आ रहे अतिक्रमण को हटा दिया है. इस बड़ी कार्रवाई के तहत करीब 45 साल पुरानी पांच मंजिला नूरानी मस्जिद को मलबे के ढेर में तब्दील कर दिया गया, जिसे लेकर अब सामाजिक और राजनीतिक हलकों में बहस छिड़ गई है.
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'जल्दबाजी में हुई कार्रवाई'
यह नूरानी मस्जिद करीब 391 वर्ग गज जमीन पर साल 1981 में बनी थी, जहां पिछले 4 दशकों से अधिक समय से नमाज अदा की जा रही थी. मस्जिद कमेटी का आरोप है कि प्रशासन ने उन्हें 5 मई को नोटिस देकर 8 जून को कार्रवाई की सूचना दी, जो कि बहुत जल्दबाजी में उठाया गया कदम है. उनका दावा है कि यह जमीन एक housing society से खरीदी गई थी और इसका निर्माण वैध था. इस अचानक हुई कार्रवाई से स्थानीय नमाजी और मस्जिद से जुड़े लोग बेहद भावुक नजर आए.
'मस्जिद के साथ मंदिर और मजार भी हटाए गए'
दूसरी तरफ, जयपुर विकास प्राधिकरण (JDA) का पक्ष बिल्कुल साफ है. जेडीए अधिकारियों के मुताबिक, बढ़ते ट्रैफिक को देखते हुए सड़क को चौड़ा करना बेहद जरूरी हो गया था और यह मस्जिद इसी परियोजना के मार्ग में आ रही थी. प्रशासन ने स्पष्ट किया कि यह कार्रवाई किसी एक धार्मिक स्थल के खिलाफ नहीं थी; अभियान के तहत मार्ग में आने वाली एक मजार, दो छोटे मंदिर और एक सत्संग भवन को भी हटाया गया है.
वैकल्पिक जमीन का दिया गया था प्रस्ताव
सूत्रों से मिली जानकारी के अनुसार, जेडीए प्रशासन ने कार्रवाई से पहले मस्जिद कमेटी को पास के ही एक क्षेत्र में करीब 1100 वर्ग गज जमीन देने का वैकल्पिक प्रस्ताव भी रखा था. हालांकि, इस प्रस्ताव पर दोनों पक्षों के बीच सहमति नहीं बन पाई, जिसके बाद जेडीए ने कानून व्यवस्था बनाए रखने के लिए भारी पुलिस बल तैनात कर इस ध्वस्तीकरण की कार्रवाई को अंजाम दिया. फिलहाल इस कार्रवाई के बाद पूरे इलाके में प्रशासन पूरी तरह अलर्ट मोड पर है.
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