राजस्थान की राजधानी जयपुर से एक चौंकाने वाली और सनसनीखेज वारदात सामने आई है. कभी जिस महिला के नाम से शहर में खौफ जुड़ा था और जिसे अपराध की दुनिया में 'लेडी डॉन' के नाम से जाना जाता था, उसका अंत बेहद खौफनाक तरीके से हुआ. करीब डेढ़ साल से लापता चल रही सीमा उर्फ मिंटू चौधरी की लाश मुहाना थाना इलाके में स्थित एक कुएं से बरामद की गई है. पुलिस की तफ्तीश में जो सच सामने आया, उसने सभी को हैरान कर दिया- मिंटू चौधरी का कत्ल किसी विरोधी गैंग ने नहीं, बल्कि उसके अपने पति और बेटे ने मिलकर किया था.
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कुएं से मिली सड़ी-गली लाश, कपड़ों से हुई पहचान
घटना की शुरुआत मुहाना थाना क्षेत्र के बनखड़ी बालाजी चौराहे के पास स्थित एक पुराने कुएं से होती है. 23 सितंबर की दोपहर पुलिस को कुएं में शव होने की सूचना मिली. सिविल डिफेंस की मदद से जब शव को बाहर निकाला गया, तो वह काफी हद तक गल चुका था. आखिरकार परिजनों ने कपड़ों (शर्ट और पैजामे) की मदद से शव की पहचान सीमा उर्फ मिंटू चौधरी के रूप में की.
कत्ल, गुमराह करने की साजिश और झूठी कहानियां
पुलिस के अनुसार, 25 मई 2025 की रात मिंटू के पति लालाराम और बेटे हरिओम ने पारिवारिक कलह और अवैध संबंधों के शक के चलते घर पर ही उसका गला घोंटकर कत्ल कर दिया. इसके बाद शव को कपड़े में लपेटकर, मिंटू के ही ऑटो में लादकर करीब 4-5 किलोमीटर दूर ले जाया गया और सूखे कुएं में फेंक दिया गया.
वारदात को अंजाम देने के बाद आरोपी पिता-पुत्र खुद मुहाना थाने पहुंचे और मिंटू की गुमशुदगी (MPR) की रिपोर्ट दर्ज करा दी. रिश्तेदारों और जान-पहचान वालों के बीच यह अफवाह फैला दी गई कि मिंटू किसी मामले में दिल्ली की तिहाड़ जेल में बंद है.
ऐसे बेनकाब हुआ कातिल पति और बेटा
पुलिस की स्पेशल टीम और स्थानीय थाने (DSST) ने जब तकनीकी विश्लेषण और लोकल इनपुट के आधार पर मामले की छानबीन शुरू की, तो शक की सुई पति लालाराम पर आ टिकी. कड़ाई से पूछताछ करने पर आरोपी लालाराम और बेटे ने अपना जुर्म कबूल कर लिया. पूछताछ में बेटे ने बताया कि मिंटू बचपन से ही उसके साथ मारपीट और दुर्व्यवहार करती थी, जिसके चलते उसके मन में नफरत थी.
15 साल की उम्र से ऑटो चालन, फिर अपराध की दुनिया में कदम
मूल रूप से टोंक के मालपुरा की रहने वाली सीमा चौधरी बेहद कम उम्र में गलत संगत में पड़ गई थी. 15 साल की उम्र में उसने जयपुर में ऑटो चलाना शुरू किया. लड़कों जैसे हेयरस्टाइल और दबंग अंदाज के चलते वह जल्द ही चर्चित हो गई.
साल 2009 में उसके खिलाफ मारपीट का पहला मामला दर्ज हुआ था. इसके बाद लूट, आर्म्स एक्ट, धमकी और मारपीट जैसे करीब 11 मुकदमे उसके नाम दर्ज हुए. जयपुर कमिश्नरेट के अलग-अलग थानों में दर्ज इन मामलों के चलते लोग उसे 'लेडी डॉन' मिंटू चौधरी कहने लगे थे. हालांकि, अपराध का रास्ता छोड़ने और सुधरने के इरादे से उसने लालाराम से शादी की थी, लेकिन घरेलू कलेश और विवादों ने आखिरकार इस खौफनाक मोड़ पर उसकी जिंदगी का अंत कर दिया.
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