राजस्थान की राजधानी जयपुर की सड़कों पर हाल ही में एक ऐसी घटना घटी जिसने पूरे प्रदेश को हिलाकर रख दिया था. एक गरीब लड़की, जो सड़क किनारे मोमोज बेचकर अपना गुजारा कर रही थी, पुलिस की कार्रवाई के दौरान गर्म पानी से बुरी तरह झुलस गई थी. इस हादसे का वीडियो सामने आने के बाद सरकार की कानून व्यवस्था और वीआईपी (VIP) कल्चर पर गंभीर सवाल खड़े हो गए थे. लोग पूछ रहे थे कि क्या किसी बड़े काफिले के गुजरने के लिए आम लोगों की जिंदगी को इस तरह मुश्किल में डालना सही है? इसी बड़े विवाद के बीच अब राजस्थान की सियासत और प्रशासन से जुड़ी एक बेहद अलग और नई तस्वीर सामने आई है. सोशल मीडिया पर मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा के काफिले का एक नया वीडियो तेजी से वायरल हो रहा है, जिसमें उनका काफिला आम लोगों की तरह ट्रैफिक सिग्नल पर रुकता हुआ दिखाई दे रहा है.
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क्या है मोमोज गर्ल हादसा?
इस पूरे मामले की शुरुआत 19 जून को जयपुर में हुई थी. मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा के काफिले के गुजरने से पहले पुलिस प्रशासन द्वारा हमेशा की तरह रूट क्लियरिंग यानी रास्ता खाली कराने की कार्रवाई की जा रही थी. आरोप है कि इसी दौरान फुटपाथ पर मोमोज का ठेला लगाने वाली एक युवती, जिसका नाम रेशु गुप्ता है, के साथ एक बड़ा हादसा हो गया. पुलिस की इस हड़बड़ी में ठेले पर रखा खौलता हुआ गर्म पानी युवती के ऊपर गिर गया, जिससे वह गंभीर रूप से झुलस गई. इस घटना का वीडियो जैसे ही सोशल मीडिया पर वायरल हुआ, लोगों का गुस्सा फूट पड़ा. जनता ने तीखे सवाल उठाए कि क्या वीआईपी मूवमेंट के नाम पर आम लोगों की सुरक्षा और उनकी रोजी-रोटी को पूरी तरह ताक पर रख दिया जाएगा?
सरकार की कार्रवाई और डैमेज कंट्रोल
मामला बढ़ता देख और चौतरफा घिरने के बाद राजस्थान सरकार को तुरंत बैकफुट पर आना पड़ा और कदम उठाने पड़े. आरोपों के घेरे में आए ट्रैफिक पुलिस के कॉन्स्टेबल नरेंद्र को तत्काल प्रभाव से लाइन हाजिर कर दिया गया. इसके साथ ही सरकार ने संवेदनशीलता दिखाते हुए पीड़ित घायल लड़की रेशु गुप्ता के इलाज का पूरा खर्च उठाने का भी फैसला किया, ताकि जनता के बीच फैले गुस्से को थोड़ा शांत किया जा सके.
लाल बत्ती पर रुका मुख्यमंत्री का काफिला
इस पूरे विवाद और तीखी बहस के बीच रविवार को जयपुर की सड़कों पर जो नजारा दिखा, उसने सबको हैरान कर दिया. मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा जब जोधपुर से लौटने के बाद जयपुर एयरपोर्ट से अपने सरकारी आवास की तरफ जा रहे थे, तब उनके काफिले का अंदाज बिल्कुल बदला हुआ था. लगभग 12 किलोमीटर लंबे इस रास्ते में कई ट्रैफिक सिग्नल्स आए, लेकिन इस बार पुलिस ने न तो आम जनता का ट्रैफिक रोका और न ही सड़कें खाली कराईं. मुख्यमंत्री का काफिला आम गाड़ियों की तरह लाल बत्ती होने पर सिग्नल पर रुकता हुआ नजर आया. काफिले के साथ सुरक्षा व्यवस्था जरूर मौजूद थी, लेकिन पूरा मूवमेंट बेहद सामान्य तरीके से पूरा हुआ, जिससे आम लोगों को किसी तरह की परेशानी का सामना नहीं करना पड़ा.
जनता के बीच चर्चा और उठते सवाल
मुख्यमंत्री के काफिले का यह वीडियो सामने आने के बाद सोशल मीडिया पर एक नई बहस छिड़ गई है. कुछ लोग इसे सरकार की तरफ से एक बेहद सकारात्मक और अच्छा संदेश मान रहे हैं कि इतने बड़े पद पर बैठे लोग भी ट्रैफिक नियमों का पालन कर सकते हैं. वहीं दूसरी तरफ, आम जनता का यह भी कहना है कि अगर ऐसी व्यवस्था पहले से ही लागू होती और वीआईपी मूवमेंट के दौरान आम लोगों का ध्यान रखा जाता, तो शायद मोमोज बेचने वाली रेशु गुप्ता के साथ इतना दर्दनाक हादसा कभी नहीं होता. अब देखना यह होगा कि क्या यह बदलाव महज एक बार की तस्वीर है या फिर आने वाले दिनों में राजस्थान के वीआईपी कल्चर में कोई स्थाई और बड़ा बदलाव देखने को मिलेगा.
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