जिस स्कूल को लेकर CJP के जाने पर हुआ था बवाल, अब रामपुरा कंवरपुरा के बच्चों को मिली सुरक्षित छत

विशाल शर्मा

• 12:26 PM • 22 Aug 2026

जयपुर के रामपुरा कंवरपुरा गांव में भैंसों के बाड़े में चल रहा सरकारी स्कूल अब अस्थायी तौर पर एक मकान में शिफ्ट हो गया है. शिक्षा विभाग की सहमति के बाद शनिवार से 18 बच्चों की पढ़ाई नई जगह शुरू हुई.

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जयपुर के रामपुरा कंवरपुरा गांव के सरकारी स्कूल में पढ़ने वाले 18 बच्चों के लिए राहत की खबर है. कल तक जहां बच्चे भैंसों के बाड़े में पढ़ने को मजबूर थे, अब उनकी कक्षा एक मकान में लग रही है. ग्रामीणों की पहल और शिक्षा विभाग की सहमति के बाद शनिवार से स्कूल को अस्थायी तौर पर नई जगह शिफ्ट कर दिया गया.

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पहले तबेले में लगती थी कक्षा

रामपुरा कंवरपुरा का प्राथमिक स्कूल लंबे समय से बदहाल स्थिति में चल रहा था. बच्चों के लिए पढ़ाई का सुरक्षित माहौल नहीं था. स्कूल की स्थिति सामने आने के बाद ग्रामीणों ने बच्चों को दूसरी जगह पढ़ाने की मांग उठाई थी. ग्रामीणों की मांग पर शिक्षा विभाग ने सहमति दी है. इसके बाद फिलहाल एक मकान में स्कूल चलाने का फैसला लिया गया.

शनिवार से नई जगह शुरू हुई पढ़ाई

स्कूल शिफ्ट होने के बाद शनिवार सुबह 18 बच्चे नई जगह पहुंचे. यहां उनकी नियमित पढ़ाई शुरू हुई. बच्चों और शिक्षकों ने भी राहत महसूस की.

जिस ग्रामीण ने अपना मकान स्कूल के लिए उपलब्ध कराया है, उसने आगे भी सहयोग करने की बात कही. ग्रामीणों का कहना है कि स्कूल गांव का है और बच्चे भी गांव के हैं, इसलिए उनके लिए हर संभव मदद की जाएगी.

स्थायी भवन बनाने में भी सहयोग का भरोसा

ग्रामीणों ने कहा कि मौजूदा व्यवस्था सिर्फ अस्थायी है. उनकी कोशिश है कि जल्द स्कूल का स्थायी भवन बने. इसके निर्माण में भी गांव के लोग सहयोग करेंगे.

एक ग्रामीण ने कहा, "स्कूल हमारा है और बच्चे भी हमारे हैं. बच्चों के लिए हम हर वक्त तैयार हैं. भविष्य में स्कूल भवन के निर्माण में भी पूरा सहयोग करेंगे.

शुक्रवार को CJP की टीम पहुंची थी

स्कूल की खस्ताहाल स्थिति को लेकर शुक्रवार को CJP के नेता गांव पहुंचे थे, जहां काफी बवाल देखने को मिला था. गांव वालों ने उस समय उनका विरोध कर उन्हें वापस भेज दिया था. इसके बाद ग्रामीणों ने खुद आगे बढ़कर शिक्षा विभाग से स्कूल को सुरक्षित जगह पर चलाने की गुहार लगाई थी.

असामाजिक तत्वों पर जताई नाराजगी

गांव वालों ने स्कूल के नाम पर माहौल खराब करने वाले असामाजिक तत्वों की हरकतों पर नाराजगी व्यक्त की है. उनका कहना है कि बच्चों की शिक्षा जैसे संवेदनशील मुद्दे पर राजनीति या विवाद खड़ा करना बिल्कुल गलत है. फिलहाल 18 बच्चों को पढ़ाई के लिए सुरक्षित छत मिल चुकी है और पूरे गांव को अब स्थायी स्कूल भवन बनने का इंतजार है.