नौकरी छूटी तो दीपक ने उठाया ये कदम... जयपुर में संविदा नर्सिंग कर्मचारियों को हटाने पर बवाल, जानें पूरा मामला

Jaipur SMS Hospital Nursing Staff Protest: जयपुर के एसएमएस अस्पताल से संविदा नर्सिंग कर्मचारियों को हटाने के फैसले के बाद बड़ा विवाद खड़ा हो गया है. नौकरी छूटने के सदमे में एक कर्मचारी की मौत के बाद साथी कर्मचारी सड़क पर उतर आए हैं और पूरे मामले की निष्पक्ष जांच व न्याय की मांग कर रहे हैं.

जयपुर के नर्सिंग कर्मी की मौत के बाद अस्पताल के बाहर बवाल
जयपुर के नर्सिंग कर्मी की मौत के बाद अस्पताल के बाहर बवाल

शरत कुमार

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Jaipur Nursing Staff Protest: जयपुर के सवाई मानसिंह अस्पताल के बाहर भारी हंगामा और प्रदर्शन चल रहा है.  दरअसल, कई सालों से अस्पतालों में संविदा पर काम कर रहे नर्सिंग कर्मचारियों को अचानक नौकरी से हटा दिया गया है. इस बात से दुखी होकर एक नर्सिंग कर्मी ने अपनी जीवन लीला समाप्त कर ली है. इसके बाद से ही गुस्साए कर्मचारी अस्पताल के बाहर इकट्ठा होकर नारेबाजी कर रहे हैं. प्रदर्शन कर रहे लोगों का कहना है कि अचानक एक झटके में नौकरी चले जाने से आम आदमी पूरी तरह टूट जाता है और उनके पास प्रदर्शन के अलावा कोई दूसरा रास्ता नहीं बचा है.

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गार्ड ने कहा रजिस्टर पर साइन मत करना

नौकरी जाने के सदमे में जान गंवाने वाला नर्सिंग कर्मी 30 साल का दीपक चरवाल था. दीपक दौसा का रहने वाला था और जयपुर के महिला चिकित्सालय में पिछले तीन सालों से लगातार काम कर रहा था. शुक्रवार सुबह जब वह हमेशा की तरह अस्पताल पहुंचा तो वहां तैनात गार्ड ने उसे रोक दिया. गार्ड ने दीपक से कहा कि तुम्हारी नौकरी अब खत्म हो गई है और आज से हाजिरी रजिस्टर पर साइन मत करना. यह सुनते ही दीपक पूरी तरह टूट गया. बाकी लोग अस्पताल के बाहर प्रदर्शन करने लगे और एक बच्चे के पिता दीपक ने नौकरी खत्म होने के तनाव में खुद को समाप्त कर लिया.

भ्रष्टाचार और पैसे उगाही का बड़ा आरोप

प्रदर्शन कर रहे कर्मचारियों का आरोप है कि प्लेसमेंट एजेंसी ने बड़ी संख्या में संविदा कर्मियों को नौकरी से हटा दिया है. कर्मचारियों का कहना है कि अधिकारियों और एजेंसी ने अपने फायदे के लिए एक ही ऑर्डर से सबको हटा दिया ताकि नए लोगों की दोबारा से भर्ती की जा सके. नए लोगों को भर्ती करने से उनका एक्सटॉर्शन यानी शोषण होगा और उनसे पैसे उगाहे जाएंगे. कर्मचारी पिछले तीन महीने से अपनी बात अधिकारियों तक पहुंचाने की कोशिश कर रहे थे लेकिन तीन महीने तक किसी ने उनकी एक नहीं सुनी और इसी विरोध का नतीजा आज इस खतरनाक मोड़ पर पहुंच गया है.

साथी कर्मचारियों का रो-रोकर बुरा हाल

दीपक के सुसाइड की खबर के बाद अस्पताल में साथ काम करने वाली महिमा और सुनीता जैसी हर महिला नर्सिंग कर्मी का रो-रोकर बुरा हाल है. महिला कर्मियों ने बताया कि उन्हें हटाने से पहले कोई जानकारी नहीं दी गई थी और अचानक से आदेश निकाल दिया गया कि अब आपको ड्यूटी पर नहीं आना है. नौकरी से हटाने का कोई लिखित आदेश भी नहीं था और वह आदेश भी अगले दिन आया. कर्मचारियों का कहना है कि दीपक की कमी को अब उनके जीवन में कोई भी पूरा नहीं कर सकता है.

गर्भवती पत्नी और बच्चे का कैसे होगा पालन-पोषण

जिस दीपक ने बेरोजगारी का आसमान टूटने पर अपनी जान दे दी उसके घर में अब कमाने वाला कोई नहीं बचा है. दीपक की पत्नी गर्भवती है और उनका एक छोटा सा बच्चा भी है. दीपक के ससुर ने रोते हुए बताया कि दामाद को कल ही नौकरी से हटा दिया गया था और वह इस बात से बहुत परेशान था. वह स्वभाव से बिल्कुल सही इंसान था. अब सवाल यह उठ रहा है कि उसकी बेटी इस छोटे बच्चे के साथ अपना पालन-पोषण कैसे करेगी. बुजुर्ग ससुर ने दुखी होकर कहा कि यह खबर सुनकर तो उनकी बेटी भी मर जाएगी.

गहलोत राज में हुई थी संविदा पर भर्ती

इस पूरी व्यवस्था की शुरुआत साल 2022 में गहलोत राज के दौरान हुई थी. तब सरकारी अस्पतालों में सीधे नौकरी देने के बजाय करीब एक हजार से ज्यादा नर्सिंग कर्मियों को गुजरात की एक निजी कंपनी के जरिए रखा गया था. धीरे-धीरे इन कर्मचारियों की संख्या बढ़कर करीब साढ़े छह हजार हो गई थी. शुरुआत में इन युवाओं को महज सात हजार रुपये की तनख्वाह पर काम पर रखा गया था जिसे बाद में थोड़ा बढ़ाकर नौ हजार एक सौ पचासी रुपये किया गया था.

मौजूदा सरकार का नया फैसला और मांग

अब मौजूदा सरकार ने इन सभी पुराने अनुभवी कर्मचारियों को हटाकर परीक्षा के जरिए पांच साल के संविदा पर नए सिरे से रखने का फैसला किया है. इसी बात को लेकर सभी कर्मचारी नाराज हैं और आंदोलन कर रहे हैं. प्रदर्शन कर रहे नर्सिंग कर्मियों की मांग है कि जब सरकार को आगे भी नई भर्ती ही करनी है तो फिर नौकरी से हटाने की क्या जरूरत है. क्या कई वर्षों से अस्पतालों में काम कर रहे इन्हीं अनुभवी लोगों को नौकरी पर नहीं रखा जा सकता था. इन्हें बिना वजह क्यों निकाला जा रहा है.

 

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