Jaipur News: 'जहरीले' पानी से तड़प रहा जयपुर का सुशीलपुरा, हजारों लोग बीमार; प्रशासन की लापरवाही ने बिगाड़े हालात

जयपुर के सुशीलपुरा में सीवरेज और पेयजल पाइपलाइन आपस में मिलने के कारण हजारों लोग दूषित पानी पीकर बीमार हो गए हैं. प्रशासन की सुस्ती के चलते स्थानीय निवासी अब बाहर से पानी खरीदने को मजबूर हैं और इलाके में स्वास्थ्य आपातकाल जैसे हालात बन गए हैं.

जयपुर में पानी का कहर
जयपुर में पानी का कहर

देव अंकुर वधावन

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राजस्थान की राजधानी जयपुर के सुशीलपुरा इलाके में दूषित और बदबूदार पानी की आपूर्ति ने हड़कंप मचा दिया है. पिछले एक हफ्ते से इलाके के हजारों लोग उल्टी, दस्त और पेट दर्द जैसी गंभीर बीमारियों की चपेट में हैं. स्थानीय निवासियों का आरोप है कि सीवरेज और पेयजल की लाइनें आपस में मिल गई हैं, जिसके कारण नलों से 'जहर' जैसा पानी आ रहा है. हालात इतने खराब हैं कि हर घर में कम से कम 2 से 3 लोग बीमार पड़े हैं और स्थानीय डिस्पेंसरी में मरीजों की लंबी कतारें लगी हुई हैं.

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सीवरेज और पेयजल लाइन के मिलन से बढ़ा संकट

स्थानीय लोगों के अनुसार, इलाके में सड़क निर्माण के दौरान लापरवाही बरती गई. रात के समय मशीन से खुदाई करते समय सीवरेज लाइन क्षतिग्रस्त हो गई और पेयजल की पाइपलाइन में गंदा पानी मिक्स हो गया. निवासियों ने कई बार प्रशासन को इसकी शिकायत की, लेकिन समय रहते कोई कार्रवाई नहीं हुई. अब आलम यह है कि नलों से पीला और बदबूदार पानी निकल रहा है, जिसे पीकर लोग गंभीर रूप से बीमार हो रहे हैं.

हजारों की संख्या में बीमार, डिस्पेंसरी में जगह नहीं

सुशीलपुरा के रहने वाले कैलाश साहू और देवीलाल यादव ने बताया कि इलाके के करीब 80% लोग बीमार हैं. बीमारों की संख्या हजारों में पहुंच गई है. लोगों को लूज मोशन, उबकाई और कमजोरी की शिकायत है. स्थानीय डिस्पेंसरी में इतनी भीड़ है कि मरीजों का नंबर तक नहीं आ रहा है. कई लोग तो इतने कमजोर हो गए हैं कि उनमें उठने तक की शक्ति नहीं बची है.

कैंपर और बोतलबंद पानी खरीदने को मजबूर

प्रशासन की सुस्ती के कारण लोगों को अब अपनी जेब ढीली कर बाहर से पानी खरीदना पड़ रहा है. लोग बिसलेरी और कैंपर मंगाकर अपनी प्यास बुझा रहे हैं. आर्थिक रूप से कमजोर परिवारों के लिए यह दोहरी मार है. एक तरफ इलाज का खर्चा और दूसरी तरफ पीने के पानी पर होने वाला व्यय. विधायक प्रताप सिंह खाचरियावास और गोपाल शर्मा जैसे नेताओं ने इलाके का दौरा जरूर किया है, लेकिन धरातल पर अब तक कोई ठोस समाधान नहीं निकला है.

 

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