गणपत सिंह मांडोली हत्याकांड: 18 महीने बाद खुला मौत का खौफनाक राज, ब्लैकमेलिंग और अवैध संबंधों ने ली जान

Ganpat Singh Murder Case: जालौर के मांडोली में हुए गणपत सिंह हत्याकांड का 18 महीने बाद सनसनीखेज खुलासा हुआ है. पुलिस जांच में ब्लैकमेलिंग और अवैध संबंधों की साजिश सामने आई, जिसके चलते हत्या को अंजाम दिया गया. तीन आरोपी गिरफ्तार किए गए हैं और मामले की जांच अभी जारी है. विस्तार से जानिए इस खौफनाक मामले की पूरी कहानी.

Ganpat Singh Murder Case
Ganpat Singh Murder Case

नरेश बिश्नोई

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राजस्थान के जालौर जिले के मांडोली में 27 अगस्त 2024 की रात हुए गणपत सिंह राजपूत हत्याकांड का पुलिस ने करीब 18 महीने बाद सनसनीखेज खुलासा कर दिया है. इंसाफ के लिए 80 साल की बुजुर्ग मां और पत्नी की लंबी भूख हड़ताल और विधायक रविंद्र सिंह भाटी के कड़े अल्टीमेटम के बाद आखिरकार पुलिस ने तीन आरोपियों को गिरफ्तार कर लिया है. यह पूरी कहानी एक छिपे हुए राज, ब्लैकमेलिंग और अवैध संबंधों के इर्द-गिर्द बुनी गई थी. विस्तार से जानिए मामले की पूरी कहानी.

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एक राज और मौत का बुना गया जाल

गणपत सिंह एक साधारण दुकानदार थे, लेकिन उनके पास एक ऐसा राज था जो कुछ प्रभावशाली लोगों की दुनिया उजाड़ सकता था. जांच में सामने आया कि गणपत सिंह के पास एक महिला और एक प्रभावशाली व्यक्ति के बीच अवैध संबंधों की वीडियो क्लिप थी. इसी क्लिप के आधार पर वह उन्हें ब्लैकमेल कर रहे थे. पुलिस के अनुसार, आरोपी गजेंद्र सिंह के पिता सुरेंद्र सिंह और लच्छू देवी के बीच अवैध संबंध थे, जिसकी जानकारी गणपत सिंह को हो गई थी.

बहाने से बुलाया और उतार दिया मौत के घाट

27 अगस्त 2024 की शाम, लच्छू देवी ने गणपत सिंह को अपनी दुकान बंद करने के बाद रात 8 बजे मिलने के लिए बुलाया. गणपत सिंह बिना किसी डर के तय स्थान पर पहुंचे, लेकिन वहां उनका इंतजार सिर्फ वह महिला नहीं, बल्कि गजेंद्र सिंह और वागाराम भी कर रहे थे. जैसे ही गणपत सिंह वहां पहुंचे, बहस शुरू हुई जो जल्द ही झगड़े में तब्दील हो गई. आरोपियों ने गणपत सिंह के सिर पर ताबड़तोड़ वार किए, जिससे उनकी मौके पर ही मौत हो गई. अगले दिन उनकी लाश एक सुनसान रास्ते पर लहूलुहान हालत में मिली थी.

18 महीने का संघर्ष और रविंद्र सिंह भाटी का हस्तक्षेप

इस केस को सुलझाना पुलिस के लिए बड़ी चुनौती थी क्योंकि उस रात उस इलाके में करीब 300 लोगों की मोबाइल लोकेशन मिली थी. मृतक की 80 साल की मां और पत्नी ने इंसाफ के लिए तीन बार भूख हड़ताल की. इस बार बुजुर्ग मां पिछले 18 दिनों से भूखी बैठी थीं. शिव विधायक रविंद्र सिंह भाटी ने पीड़ित परिवार का समर्थन किया और सरकार को 7 दिन का अल्टीमेटम दिया था कि यदि खुलासा नहीं हुआ तो चक्का जाम किया जाएगा. भारी दबाव के बीच पुलिस ने गजेंद्र सिंह, वागाराम और लच्छू देवी को गिरफ्तार कर लिया.

कहानी अभी खत्म नहीं हुई है!

पुलिस ने तीनों आरोपियों को 11 दिन के रिमांड पर लिया है और उनसे सख्ती से पूछताछ की जा रही है. हालांकि तीन गिरफ्तारियां हो चुकी हैं, लेकिन पुलिस अब आरोपियों के मोबाइल डेटा और बैंक खातों की जांच कर रही है ताकि यह पता लगाया जा सके कि क्या इस साजिश में कुछ और लोग भी शामिल थे. पीड़ित परिवार के लिए 1 करोड़ रुपये की आर्थिक सहायता और बेटे को सरकारी नौकरी देने की मांग भी जनप्रतिनिधियों द्वारा की गई है.

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