BMW-Fortuner नहीं 21 ट्रैक्टरों पर निकली दूल्हे की बारात, झुंझुनूं में दिखा किसान का असली 'देसी ठाठ'

Rajasthan News: राजस्थान के झुंझुनूं जिले के ढाणिया भोडढकी गांव के किसान पुत्र जितेंद्र महल्ला ने दिखावे को छोड़कर अनोखे अंदाज में शादी की. वे महंगे वाहनों के बजाय खुद ट्रैक्टर चलाकर 21 ट्रैक्टरों के काफिले के साथ बारात लेकर भड़ौंदा गांव पहुंचे. इस सादगी भरे फैसले से परिवार ने ₹1 लाख की बचत की और समाज को फिजूलखर्ची रोकने का संदेश दिया.

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मोहित गुर्जर

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Rajasthan Viral Wedding: राजस्थान में आपने अब तक कई शाही और आलीशान शादियां देखी होंगी, जहां करोड़ों की लग्जरी गाड़ियां, आलीशान गाड़ियां या फिर हेलीकॉप्टर से दूल्हे की एंट्री होती है. लेकिन राजस्थान के झुंझुनूं जिले से एक ऐसी बारात निकली है जिसने बिना किसी दिखावे और फिजूलखर्ची के पूरे इलाके का दिल जीत लिया. यहां दूल्हा किसी महंगी कार में बैठने के बजाय खुद ट्रैक्टर की स्टीयरिंग थामकर अपनी बारात लेकर निकल पड़ा.

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खुद दूल्हे ने संभाला ट्रैक्टर की स्टीयरिंग

यह अनोखा नजारा झुंझुनूं जिले के गुढ़ा गोड़जी इलाके के ढाणिया भोडढकी गांव में देखने को मिला. यहां के रहने वाले एक किसान परिवार के बेटे जितेंद्र महल्ला की शादी भड़ौंदा गांव में तय हुई थी. जितेंद्र ने अपनी शादी को यादगार और लीक से हटकर बनाने के लिए लग्जरी कारों को पूरी तरह छोड़ दिया. दूल्हा जितेंद्र सिर पर साफा बांधे खुद ट्रैक्टर चलाते हुए सबसे आगे चल रहा था और उसके पीछे एक-दो नहीं, बल्कि पूरे 21 सजे-धजे ट्रैक्टरों का काफिला चल रहा था. इस अनोखी बारात को देखने के लिए लोग सड़कों के किनारे रुक गए और मोबाइल से वीडियो बनाने लगे.

ग्रामीण संस्कृति और देसी खानपान रहा आकर्षण का केंद्र

इस बारात में राजस्थान की पारंपरिक संस्कृति को दर्शाते हुए सजे-धजे ऊंट और घोड़ियां भी शामिल थीं. करीब 30 से 32 किलोमीटर का सफर तय कर जब यह बारात दुल्हन के घर पहुंची, तो वहां का माहौल भी पूरी तरह देसी अंदाज में रंगा नजर आया. बारात में आए मेहमानों के लिए ग्रामीण शैली में भोजन और शुद्ध देसी खानपान की व्यवस्था की गई थी. दूल्हे जितेंद्र ने गर्व से कहा, "मेरी बारात भड़ौंदा जा रही है, मैं बिल्कुल देसी हूं, ट्रैक्टर और देसी खाना ही हमारी पहचान है".

ट्रैक्टर बारात से हुई ₹1 लाख की बचत

दूल्हे के पिता भारमल मोहल्ला ने बताया कि उनका पूरा परिवार खेती-किसानी से जुड़ा हुआ है. उनके परिवार और रिश्तेदारों के पास पहले से ट्रैक्टर मौजूद थे, इसलिए उन्होंने लग्जरी गाड़ियां किराए पर लेने के बजाय ट्रैक्टरों को ही बारात की शान बनाने का फैसला किया. उन्होंने बताया कि इस फैसले से उनके करीब ₹1 लाख की बचत हुई है. आज के दौर में जब लोग शादियों में दिखावे के नाम पर पानी की तरह पैसा बहाते हैं, ऐसे में इस किसान परिवार ने समाज को सादगी और अपनी मिट्टी से जुड़े रहने का एक बेहतरीन संदेश दिया है.

 

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