रात की आखिरी नींद! झुंझुनू में ट्रेलर ने मासूमों के शरीर को छलनी किया, हालत देख डॉक्टरों के भी उड़े होश

झुंझुनू के नंगली दीप सिंह के पास कच्चे रास्ते पर सो रहे एक परिवार को बेकाबू ट्रेलर ने रौंद दिया, जिससे 3 लोगों की मौत हो गई. गंभीर रूप से घायल बच्चों को जयपुर रेफर किया गया है और पुलिस ने आरोपी चालक को हिरासत में ले लिया है.

राजस्थान
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न्यूज तक डेस्क

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राजस्थान के झुंझुनू में शुक्रवार की सुबह एक ऐसा मंजर सामने आया जिसे देख हर किसी की रूह कांप गई. नंगली दीप सिंह के पास कच्चे रास्ते पर खुले आसमान के नीचे सो रहे एक गरीब भोपा परिवार के लिए नींद मौत बनकर आई. एक तेज रफ्तार बेकाबू ट्रेलर ने सोते हुए परिवार को बेरहमी से रौंद दिया, जिससे एक ही परिवार के तीन लोगों की जान चली गई और कई अन्य गंभीर रूप से घायल हैं.

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सुकून की नींद बनी आखिरी रात

भोपा समाज का यह परिवार दिन भर की कड़ी मेहनत के बाद थकान मिटाने के लिए सड़क किनारे कच्चे रास्ते पर डेरा डालकर सो रहा था. चश्मदीदों के मुताबिक, सुबह करीब 4:00 बजे जब सब गहरी नींद में थे, तभी एक बेकाबू ट्रेलर आया और सीधे सो रहे बच्चों और बड़ों के ऊपर चढ़ गया. ड्राइवर ने गाड़ी को आगे-पीछे कर कुचलने की कोशिश की, जिससे चीख-पुकार मच गई.

एक झटके में खत्म हुईं तीन जिंदगियां

इस दर्दनाक हादसे में 13 साल की पायल और 13 साल की प्रियंका ने मौके पर ही दम तोड़ दिया. वहीं परिवार की मुखिया, मां होटी देवी ने अस्पताल ले जाते समय रास्ते में दम तोड़ दिया. एक ही झटके में परिवार के तीन सदस्य काल के गाल में समा गए.

मासूमों की हालत नाजुक, जयपुर रेफर

हादसे में घायल हुए अन्य 4-5 बच्चों की हालत बेहद गंभीर बनी हुई है. स्थानीय अस्पताल के डॉक्टरों के मुताबिक, घायलों को प्राथमिक उपचार के बाद जयपुर रेफर किया गया है. बच्चों के पैरों और शरीर के अन्य हिस्सों पर गंभीर चोटें आई हैं. फिलहाल डॉक्टर उनकी जान बचाने की निरंतर कोशिश कर रहे हैं.

ग्रामीणों का फूटा गुस्सा, चालक की पिटाई

हादसे के बाद मौके पर मौजूद ग्रामीणों का गुस्सा सातवें आसमान पर पहुंच गया. लोगों ने भागने की कोशिश कर रहे ट्रेलर चालक को पकड़ लिया और उसकी जमकर धुनाई कर दी. बाद में सूचना मिलने पर पुलिस मौके पर पहुंची और ट्रेलर को जब्त कर चालक को हिरासत में लिया. पुलिस अब मामले की जांच कर रही है कि आखिर चालक ने कच्चे रास्ते पर गाड़ी क्यों मोड़ी और क्या वह नशे में था.

झुंझुनू का यह हादसा एक बार फिर तेज रफ्तार और लापरवाही से होने वाली मौतों पर सवाल खड़ा करता है. एक गरीब परिवार जो सिर्फ दो वक्त की रोटी और चैन की नींद की तलाश में था, उसकी दुनिया उजड़ गई.

 

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