राजस्थान में सरकारी कर्मचारियों के तबादलों (Transfers) पर लगी रोक हटने के बाद मनचाही पोस्टिंग पाने के लिए नेताओं के दफ्तरों के बाहर होड़ मची हुई है. ऐसे माहौल में जोधपुर शहर विधानसभा सीट से भारतीय जनता पार्टी (BJP) के विधायक अतुल भंसाली का एक अनोखा और अनूठा तरीका पूरे प्रदेश में चर्चा का विषय बन गया है. विधायक ने ट्रांसफर की सिफारिशों की भीड़ से बचने और जनता के काम प्रभावित न होने देने के लिए अपने कार्यालय में एक अनोखा इंतजाम किया है, जहां कर्मचारी नेताओं की जगह भगवान के दरबार में अपनी अर्जी लगा रहे हैं.
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कार्यालय के मंदिर में रखी गई डिजायर पेटी
आमतौर पर तबादले की लिस्ट में अपना नाम शामिल करवाने के लिए कर्मचारी नेताओं, मंत्रियों और विधायकों के घरों तथा दफ्तरों के चक्कर काटते नजर आते हैं. लेकिन जोधपुर में विधायक अतुल भंसाली के दफ्तर में नजारा बिल्कुल अलग है. विधायक कार्यालय परिसर में बने भगवान श्री राम के मंदिर में एक विशेष पेटिका रखवाई गई है, जिसे 'डिजायर पेटी' नाम दिया गया है. अब जो भी कर्मचारी या उनके परिजन तबादले की मांग को लेकर दफ्तर पहुंच रहे हैं, उन्हें अपनी एप्लीकेशन (अर्जी) सीधे इस 'डिजायर पेटी' में डालने के लिए कहा जा रहा है.
विधायक ने क्यों निकाला यह अनोखा तरीका?
बीजेपी विधायक अतुल भंसाली का कहना है कि तबादले जैसी प्रक्रियाओं में हर व्यक्ति अपनी निजी इच्छा और जरूरतें लेकर आता है, लेकिन आखिरी फैसला सरकार और व्यवस्था के नियमों के तहत ही होता है. विधायक ने तर्क दिया कि अगर वह दिनभर केवल ट्रांसफर की सिफारिशें और अर्जियां ही सुनते रहेंगे, तो आम जनता की बुनियादी समस्याओं को कब सुनेंगे और उनके विकास कार्य कैसे करेंगे.
जनता का काम प्रभावित न हो, इसी सोच के साथ उन्होंने यह व्यवस्था बनाई है. उनका मानना है कि सरकार में विधायक की अनुशंसा का अपना महत्व जरूर है, लेकिन हर काम में ईश्वर की इच्छा भी सर्वोपरि होती है. सरकार भी अपनी जांच-परख के बाद ही सही व्यक्ति के तबादले पर अंतिम निर्णय लेती है.
जनता और कर्मचारियों के बीच बनी चर्चा का विषय
विधायक अतुल भंसाली के इस अनूठे आइडिया की सोशल मीडिया से लेकर आम जनता के बीच खूब चर्चा हो रही है. कुछ लोग इसे एक बेहद पारदर्शी और शांतिपूर्ण तरीका मान रहे हैं, जिससे बिना किसी दबाव या विशेष सिफारिश के हर छोटे-बड़े कर्मचारी को अपनी बात रखने का समान मौका मिल रहा है. तबादले की ये अर्जियां भगवान श्री राम के चरणों और 'डिजायर पेटी' तक तो पहुंच रही हैं, लेकिन यह देखना दिलचस्प होगा कि ये अर्जियां कितनी जल्दी सरकारी टेबल पर अप्रूव होती हैं और कितने कर्मचारियों को अपनी मनचाही जगह पोस्टिंग मिल पाती है.
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