Jodhpur Blue City History: जोधपुर को क्यों कहा जाता है ब्लू सिटी? घरों को नीला रंग देने के पीछे छिपी हैं ये 3 बड़ी वजहें

न्यूज तक डेस्क

• 11:17 AM • 08 Sep 2026

Jodhpur Blue City History: राजस्थान का जोधपुर शहर अपनी ऐतिहासिक धरोहर, नीली गलियों और चमकदार धूप के लिए पूरी दुनिया में प्रसिद्ध है. 1459 में राव जोधा द्वारा बसाए गए इस शहर को 'ब्लू सिटी' और 'सन सिटी' कहा जाता है. जानिए जोधपुर के नीले रंग, मेहरानगढ़ किले के इतिहास और इसके पर्यटन स्थलों से जुड़े दिलचस्प रहस्य.

जोधपुर को क्यों कहते हैं 'ब्लू सिटी'? जानिए नीले घरों के पीछे का असली राज.
जोधपुर को क्यों कहते हैं 'ब्लू सिटी'? जानिए नीले घरों के पीछे का असली राज.
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Why Jodhpur Is Called Blue City: राजस्थान का जोधपुर शहर अपनी अनूठी स्थापत्य कला, राजपूती शौर्य और समृद्ध सांस्कृतिक विरासत के लिए विश्वभर में जाना जाता है. लगभग 567 साल पुराना यह शहर दूर-दूर तक फैले नीले मकानों और साल भर चमकने वाली तेज धूप के कारण 'ब्लू सिटी' और 'सन सिटी' के नाम से लोकप्रिय है. पहाड़ियों पर खड़ा भव्य मेहरानगढ़ किला और संकरी नीली गलियां आज भी इसके गौरवशाली इतिहास की गवाही देती हैं. हर साल देश और दुनिया से लाखों पर्यटक इस शहर की खूबसूरती और मेहमाननवाजी का अनुभव करने पहुंचते हैं.

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1459 में राव जोधा ने रखी थी आधारशिला, मेहरानगढ़ किला बना पहचान.

जोधपुर शहर की स्थापना साल 1459 में राठौड़ वंश के प्रतापी शासक राव जोधा ने की थी. उन्होंने अपनी राजधानी को मंडोर से हटाकर भोर चिड़िया नामक एक सुरक्षित और ऊंची पहाड़ी पर स्थानांतरित करने का फैसला किया. इसी 400 फीट ऊंची चट्टान पर भव्य मेहरानगढ़ किले का निर्माण हुआ, जो दुनिया के सबसे मजबूत किलों में गिना जाता है. इस किले ने सदियों के इतिहास, युद्धों और कई शासकों के काल को देखा है. किले से जुड़ी एक लोककथा के अनुसार, जिस पहाड़ी पर यह बना वहां रहने वाले एक साधु को हटाए जाने पर उन्होंने इस इलाके में पानी की कमी का श्राप दिया था. हालांकि इतिहासकार इसकी पुष्टि नहीं करते, लेकिन यह लोककथा आज भी प्रचलित है

आखिर क्यों नीले रंग में रंगा है पूरा शहर? जानिए 3 मुख्य वजहें.

जोधपुर के नीले रंग के पीछे ऐतिहासिक, वैज्ञानिक और पारंपरिक मान्यताएं छिपी हैं. पहली मान्यता के अनुसार, शुरुआत में केवल ब्राह्मण समुदाय के लोग अपनी अलग पहचान के लिए अपने घरों को नीले रंग से रंगते थे, जिसे बाद में सभी समुदायों ने अपना लिया. दूसरी वजह वैज्ञानिक है; नीला रंग सूर्य की किरणों को परावर्तित करता है, जिससे 45 डिग्री से अधिक तापमान में भी मकान अंदर से ठंडे रहते हैं. तीसरी वजह यह बताई जाती है कि पुराने समय में चूने में तांबे के तत्व मिलाकर नीला रंग बनाया जाता था, जो कीड़े-मकोड़ों और दीमक से दीवारों की सुरक्षा करता था.

सन सिटी का खिताब और प्रमुख दर्शनीय स्थल.

जोधपुर में साल के अधिकांश दिनों में आसमान साफ रहता है और तेज धूप खिली रहती है, इसी कारण विदेशी पर्यटकों ने इसे 'सन सिटी' नाम दिया. यहां आने वाले पर्यटकों के लिए मेहरानगढ़ किले के अलावा उम्मेद भवन पैलेस और जसवंत थड़ा मुख्य आकर्षण हैं. उम्मेद भवन पैलेस दुनिया के सबसे बड़े निजी महलों में से एक है, जिसका निर्माण अकाल राहत कार्य के तहत लोगों को रोजगार देने के लिए कराया गया था. वहीं, सफेद संगमरमर से बना जसवंत थड़ा अपनी बेहतरीन नक्काशी के लिए जाना जाता है.

ऐतिहासिक और सांस्कृतिक महत्व के साथ-साथ आज जोधपुर राजस्थान का एक प्रमुख औद्योगिक और शैक्षणिक केंद्र बन चुका है. यहां भारतीय वायुसेना का महत्वपूर्ण एयरबेस, आईआईटी जोधपुर और कई राष्ट्रीय स्तर के संस्थान मौजूद हैं. प्रसिद्ध मिर्च बड़ा, मावा कचौरी और बंधेज की साड़ियों का स्वाद और रंग पर्यटकों को बार-बार यहां खींच लाता है. इतिहास, आधुनिकता और संस्कृति का यह अनूठा संगम जोधपुर को जीवन में कम से कम एक बार घूमने योग्य बेहद खास शहर बनाता है.

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