एक बल्ब, एक छत और 3 करोड़ का जहर... 12 लाख कर्ज चुकाने के लिए गणपतराम ने घर को ही बना डाला 'ड्रग्स लैब'

जोधपुर में एजीटीएफ ने एक घर की छत पर चल रही एमडी ड्रग्स फैक्ट्री पकड़ी है, जहां 12 लाख का कर्ज चुकाने के लिए 3 करोड़ की ड्रग्स तैयार की जा रही थी. पुलिस ने आरोपी मकान मालिक को गिरफ्तार कर लिया है और मुख्य तस्करों की तलाश जारी है.

राजस्थान
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अशोक शर्मा

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राजस्थान के जोधपुर से एक चौंकाने वाला मामला सामने आया है, जहां एक शख्स ने अपने 12 लाख रुपये के कर्ज को चुकाने के लिए अपने ही घर को ड्रग्स की फैक्ट्री में तब्दील कर दिया. राजस्थान एंटी गैंगस्टर टास्क फोर्स (AGTF) ने जोधपुर के बनाड़ थाना इलाके में छापेमारी कर एक घर की छत पर चल रही अवैध एमडी (MD) ड्रग्स फैक्ट्री का भंडाफोड़ किया है. मौके से करीब 3 करोड़ रुपये की अंतरराष्ट्रीय कीमत वाली ड्रग्स और भारी मात्रा में केमिकल बरामद किया गया है.

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एक बल्ब की रोशनी और करोड़ों का खेल

गुरुवार, 2 अप्रैल 2026 की रात एजीटीएफ की टीम ने गुप्त सूचना के आधार पर बनाड़ इलाके के 'बेनीवाल सदन' नामक मकान की घेराबंदी की. जब टीम छत पर पहुंची, तो वहां का नजारा हैरान करने वाला था. महज एक बल्ब की मध्यम रोशनी में गद्दों पर सफेद पाउडर (एमडी ड्रग्स) सुखाया जा रहा था. छत पर चारों तरफ केमिकल के ड्रम, बाल्टियां, इलेक्ट्रॉनिक चूल्हे और नशीले पदार्थ बनाने का सामान बिखरा पड़ा था.

12 लाख का कर्ज और मास्टरमाइंड गणपत राम

इस पूरे काले कारोबार का मास्टरमाइंड घर का मालिक गणपत राम बेनीवाल निकला, जो मूल रूप से बालोतरा जिले के मंडली का निवासी है. पूछताछ में सामने आया कि गणपत राम पर सांचौर निवासी आसुराम उर्फ लक्की और भानु का 12 लाख रुपये का कर्ज था. इस कर्ज को चुकाने के लिए उसने तस्करों के साथ मिलकर अपने घर की छत पर ही जहर पकाना शुरू कर दिया. वह पिछले काफी समय से पश्चिमी राजस्थान में इस ड्रग्स की सप्लाई कर रहा था.

बरामदगी और अंतरराष्ट्रीय कीमत

पुलिस ने मौके से निम्नलिखित सामान बरामद किया है:

  • 3 किलो तैयार एमडी ड्रग्स: जिसकी अंतरराष्ट्रीय बाजार में कीमत करीब 3 करोड़ रुपये आंकी गई है.
  • 55 से 60 किलो कच्चा रसायन: जिससे भारी मात्रा में और ड्रग्स तैयार की जानी थी.
  • उपकरण: गैस चूल्हे, ड्रम और ड्रग्स बनाने में इस्तेमाल होने वाले अन्य संसाधन.

पुलिस की बड़ी कामयाबी और इंटेलिजेंस पर सवाल

एडीजी दिनेश एमएन के नेतृत्व में एजीटीएफ, एटीएस और स्थानीय पुलिस ने मिलकर इस बड़े नेटवर्क को ध्वस्त किया है. हालांकि, जोधपुर पुलिस कमिश्नरेट के नाक के नीचे इतनी बड़ी फैक्ट्री चलना इंटेलिजेंस फेलियर पर भी सवाल खड़े करता है. फिलहाल आरोपी गणपत राम पुलिस की गिरफ्त में है, जबकि सांचौर निवासी मुख्य सरगना आसुराम और भानु अब भी फरार हैं. मामले की जांच एडिशनल एसपी अमृतलाल जिनगर को सौंपी गई है.

 

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