3 घंटे नहीं, सिर्फ 90 मिनट में पूरा होगा सफर! राजस्थान के इस हाईवे को मिली मंजूरी, देखें पूरा रूट प्लान

Jodhpur Nagaur Road Project: राजस्थान में सड़क विकास को लेकर बड़ी खुशखबरी सामने आई है. जोधपुर-नागौर हाईवे के 87 किलोमीटर लंबे टू-लेन हिस्से को फोरलेन बनाने के लिए 880 करोड़ रुपये के बजट को मंजूरी मिल गई है. टेंडर जारी होने के बाद अब इस रूट पर 3 घंटे का सफर महज डेढ़ घंटे में पूरा हो सकेगा.

Jodhpur Nagaur Road Update
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आंचल गुप्ता

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Jodhpur Nagaur Road Update: राजस्थान में सफर करने वाले और खासकर जोधपुर-नागौर रूट का इस्तेमाल करने वाले लोगों के लिए एक बड़ी खुशखबरी आई है. जो सड़क अब तक भारी ट्रैफिक, लंबे जाम, ओवरटेकिंग के खतरों और भीषण हादसों के लिए जानी जाती थी, अब वही सड़क रफ्तार और सुरक्षा की नई पहचान बनने जा रही है. जोधपुर-नागौर हाईवे को फोरलेन में बदलने के लिए 880 करोड़ रुपये के मेगा प्रोजेक्ट को मंजूरी दे दी गई है और इसके टेंडर भी जारी कर दिए गए हैं.

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3 घंटे का सफर अब सिर्फ डेढ़ घंटे में!

जोधपुर से नागौर की कुल दूरी लगभग 115 किलोमीटर है. इसमें से जोधपुर से नेतड़ा तक का 28 किलोमीटर का हिस्सा पहले से ही फोरलेन बना हुआ है. लेकिन नेतड़ा से नागौर तक का 87 किलोमीटर का मार्ग अभी भी टू-लेन है, जो सबसे बड़ा डेंजर ज़ोन बना हुआ था. इस मार्ग से रोजाना करीब 15,000 गाड़ियां गुजरती हैं, जिनमें भारी ट्रक, बसें और कारें शामिल हैं.

टू-लेन होने की वजह से यहां आए दिन ओवरटेकिंग के दौरान आमने-सामने की टक्कर होती थी. अब इस 87 किलोमीटर के हिस्से को फोरलेन किया जा रहा है, जिससे गाड़ियों की रफ्तार बढ़ेगी, जाम खत्म होगा और सबसे बड़ी बात—जोधपुर से नागौर का सफर 3 घंटे से घटकर महज डेढ़ घंटे का रह जाएगा.

बनेंगे दो बड़े बाईपास और एम्स पार्ट-2 की तैयारी

इस प्रोजेक्ट के तहत ट्रैफिक को सुगम बनाने के लिए दो शानदार बाईपास बनाए जाएंगे:

पहला बाईपास: बावड़ी के पास करीब 6.5 किलोमीटर लंबा होगा.
दूसरा बाईपास: नागौर के पास 16 किलोमीटर लंबा तैयार किया जाएगा.

इन बाईपास के बनने से भारी वाहन शहरों के अंदर प्रवेश नहीं करेंगे, जिससे स्थानीय लोगों को ट्रैफिक से बड़ी राहत मिलेगी. इसके अलावा, इस हाईवे की अहमियत इसलिए भी बढ़ गई है क्योंकि नेतड़ा इलाके में 'एम्स पार्ट-2' विकसित करने की तैयारी चल रही है. इसके लिए 150 बीघा जमीन चिन्हित की जा चुकी है, जहां 500 से अधिक बेड का बड़ा अस्पताल बनेगा. हाईवे शानदार होने से मरीजों को समय पर इलाज मिल सकेगा.

आर्थिक और सामरिक रूप से बदलेगी तस्वीर

यह हाईवे नागौर, खींवसर और आसपास के उद्योगों के लिए रीढ़ की हड्डी माना जाता है. यह पूरा इलाका चूना पत्थर, सीमेंट और खनिज उद्योगों के लिए मशहूर है. फोरलेन बनने से ट्रांसपोर्टेशन की लागत घटेगी और समय के साथ-साथ डीजल की भी बड़ी बचत होगी. साथ ही, सामरिक दृष्टिकोण से बीकानेर और सीमावर्ती इलाकों को जोड़ने के कारण सेना की आवाजाही और रणनीतिक मजबूती के लिहाज से भी यह मार्ग बेहद अहम है.

अधिकारियों के मुताबिक, प्रोजेक्ट के टेंडर जारी हो चुके हैं और अक्टूबर तक इस पर जमीनी काम शुरू होने की पूरी संभावना है. इस पूरे प्रोजेक्ट को 2 साल के भीतर पूरा करने का लक्ष्य रखा गया है.

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