जोधपुर: जमीन पर न बिल्डिंग, न क्लासरूम और न ही बच्चे...कागजों में चल रहे थे 50 से ज्यादा स्कूल, RTE के नाम पर करोड़ों का फर्जीवाड़ा!

आंचल गुप्ता

26 Aug 2026 (अपडेटेड: Aug 26 2026 10:09 AM)

Jodhpur RTE Scam News: जोधपुर में राइट टू एजुकेशन (RTE) योजना के तहत करोड़ों रुपये के बड़े फर्जीवाड़े का खुलासा हुआ है. जांच में 50 से ज्यादा ऐसे निजी स्कूल सामने आए हैं जो सिर्फ कागजों में चल रहे थे और उन्हें भारी भुगतान कर दिया गया. शिक्षा विभाग ने संबंधित शिक्षकों को नोटिस देकर रिकवरी प्रक्रिया शुरू की है.

जोधपुर में RTE के नाम पर करोड़ों का बड़ा खेल
जोधपुर में RTE के नाम पर करोड़ों का बड़ा खेल
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Jodhpur  Fake Private School: राजस्थान के जोधपुर जिले में शिक्षा व्यवस्था और सरकारी योजनाओं की पारदर्शिता पर बड़ा सवाल खड़ा करने वाला मामला सामने आया है. राइट टू एजुकेशन (RTE) योजना के तहत जोधपुर में एक ऐसा फर्जीवाड़ा उजागर हुआ है. मिली जानकारी के अनुसार जोधपुर जिले में 50 से ज्यादा प्राइवेट स्कूल सिर्फ कागजों और पोर्टल पर चल रहे थे. सबसे हैरानी की बात ये है कि इन स्कूलों को सरकार की तरफ से करोड़ों रुपये का भुगतान भी कर दिया गया. अब मामले के सामने आने के बाद से पूरे प्रदेश में हड़कंप मचा हुआ है.

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कागजों में पढ़ाई और करोड़ों का भुगतान

राइट टू एजुकेशन (RTE) योजना का मुख्य उद्देश्य गरीब और जरूरतमंद बच्चों को निजी स्कूलों में निशुल्क शिक्षा उपलब्ध कराना है, जिसके एवज में सरकार संबंधित स्कूलों को प्रति छात्र तय राशि का भुगतान करती है.

जोधपुर में हुई जांच में सामने आया कि कई निजी स्कूल केवल ऑनलाइन रिकॉर्ड और फाइलों में ही चल रहे थे. कागजों में ही बच्चों का एडमिशन दिखाया गया, कागजों में ही पढ़ाई हुई और उसी आधार पर करोड़ों रुपये का भुगतान भी उठा लिया गया. लेकिन जब मौके पर जांच की गई, तो धरातल पर न तो कोई स्कूल भवन मिला, न ब्लैकबोर्ड और न ही बच्चे मौजूद थे.

4 स्कूलों ने डकारे 1.06 करोड़ रुपये, आंकड़े देखकर उड़े होश

जांच में सामने आए आंकड़े इस पूरे घोटाले की गंभीरता को बयां कर रहे हैं. सिर्फ चार प्रमुख निजी स्कूलों को ही 1 करोड़ 6 लाख 32 हजार रुपये का भारी-भरकम भुगतान कर दिया गया, जबकि धरातल पर इन स्कूलों का कोई वजूद ही नहीं था.

  • ओमकार आदर्श विद्या मंदिर: ₹25,57,000 का भुगतान
  • अराव पब्लिक स्कूल: ₹18,81,000 का भुगतान
  • संस्कार यूपी स्कूल: ₹28,98,000 का भुगतान
  • रेडी स्कूल: ₹32,96,000 का भुगतान

फिजिकल वेरिफिकेशन पर उठे गंभीर सवाल

इस पूरे मामले में शिक्षा विभाग की कार्यप्रणाली और सत्यापन प्रक्रिया सबसे बड़े कटघरे में है. नियमानुसार भुगतान से पहले स्कूलों और वहां पढ़ रहे छात्रों का फिजिकल वेरिफिकेशन अनिवार्य होता है. विभाग पहले इन स्कूलों का सत्यापन होने का दावा कर चुका था.

अब सवाल यह उठ रहा है कि अगर जमीन पर स्कूल मौजूद ही नहीं थे, तो फिर सत्यापन किस आधार पर और किसने किया? मामले का पर्दाफाश होने के बाद जिम्मेदारी निचले स्तर के कर्मचारियों और जांच करने वाले शिक्षकों पर डाली जा रही है, जिससे विभाग की अंदरूनी मिलीभगत की आशंका भी गहरी हो गई है.

शिक्षकों नोटिस जारी, रिकवरी की प्रक्रिया शुरू

मामला उजागर होने के बाद शिक्षा विभाग हरकत में आ गया है. मुख्य जिला शिक्षा अधिकारी (प्रारंभिक शिक्षा) ने मामले से जुड़े संबंधित शिक्षकों को कारण बताओ नोटिस जारी किए हैं. इसके साथ ही जिन फर्जी या गैर-मौजूद स्कूलों को आरटीई का भुगतान हुआ है, उनसे सरकारी पैसा वापस वसूलने (रिकवरी) की प्रक्रिया भी शुरू कर दी गई है.

फिलहाल 50 से अधिक संदिग्ध स्कूलों की विस्तृत जांच जारी है, और यह आशंका भी जताई जा रही है कि ऐसा फर्जीवाड़ा राज्य के अन्य जिलों में भी फैला हो सकता है.

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