दिल्ली के कड़कड़डूमा कोर्ट के जज अमन कुमार शर्मा की मौत ने न्यायिक और प्रशासनिक गलियारों में हलचल मचा दी है. जो जज दूसरों के लिए इंसाफ की कलम चलाता था, उसने खुद अपनी जिंदगी को विराम दे दिया. शनिवार दोपहर करीब 1:45 बजे जब पुलिस को इस घटना की सूचना मिली, तब से यह मामला एक हाई-प्रोफाइल मिस्ट्री बन चुका है. परिजनों ने इस मामले में गंभीर आरोप लगाए हैं, जिसके बाद पुलिस ने एफआईआर दर्ज कर ली है. इस केस में सबसे ज्यादा चर्चा आईएएस अधिकारी निधि मलिक की हो रही है, जिनका नाम मुख्य आरोपियों की सूची में शामिल है.
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कौन हैं आईएएस निधि मलिक और क्या है उनकी भूमिका?
जज अमन कुमार शर्मा की मौत के मामले में उनकी साली, आईएएस निधि मलिक का नाम बार-बार सामने आ रहा है. निधि मलिक 2013 बैच की AGMUT कैडर की सीनियर आईएएस अधिकारी हैं. मूल रूप से 31 मार्च 1990 को जन्मी निधि ने बीए और एलएलबी की पढ़ाई की है. वर्तमान में, फरवरी 2026 से वह जम्मू-कश्मीर में इंस्पेक्टर जनरल ऑफ रजिस्ट्रेशन के पद पर तैनात हैं. प्रशासनिक स्तर पर उनकी प्रोफाइल बेहद मजबूत है क्योंकि वो अपने करियर में डिप्टी कमिश्नर, एडिशनल कमिश्नर, कलेक्टर और ओएसडी जैसे कई महत्वपूर्ण पदों पर काम कर चुकी हैं.
निधि मलिक को उनकी शैक्षणिक और प्रशासनिक योग्यता के लिए कई सम्मान भी मिल चुके हैं. उन्हें 2023 में बेस्ट इन प्रोजेक्ट अप्रेजल का अवार्ड मिला था और पढ़ाई के दौरान वह कई बार गोल्ड मेडल से भी सम्मानित हो चुकी हैं. व्यक्तिगत जीवन की बात करें तो वह दिल्ली पुलिस के डीसीपी देवेश कुमार मेहला की पत्नी हैं, हालांकि बताया जा रहा है कि फिलहाल दोनों अलग-अलग रह रहे हैं.
पत्नी और ससुराल पक्ष पर प्रताड़ना का आरोप
इस पूरे मामले में जज अमन शर्मा के परिजनों ने उनकी पत्नी स्वाति मलिक और साली निधि मलिक सहित ससुराल पक्ष पर मानसिक प्रताड़ना के आरोप लगाए हैं. स्वाति मलिक खुद दिल्ली के तीस हजारी कोर्ट में जज के पद पर तैनात हैं. परिजनों का कहना है कि घर के छोटे-बड़े फैसलों और झगड़ों में निधि मलिक का दखल लगातार बढ़ रहा था. आरोप है कि निधि मलिक के रसूख और प्रशासनिक पद के दबाव का इस्तेमाल पारिवारिक विवादों में किया गया, जिससे अमन शर्मा गहरे तनाव में चले गए थे.
पुलिस जांच और रसूख का दबाव
पुलिस ने इस मामले में स्वाति मलिक, निधि मलिक, स्वाति के माता-पिता और एक अन्य व्यक्ति के खिलाफ एफआईआर दर्ज की है. अब सबसे बड़ा सवाल यही बना हुआ है कि क्या वाकई एक आईएएस अधिकारी के प्रभाव का उपयोग पारिवारिक दबाव बनाने के लिए किया गया? पुलिस फिलहाल कॉल डिटेल्स, डिजिटल सबूत और रिश्तों के हर पहलू को खंगाल रही है ताकि यह साफ हो सके कि आखिर किस दबाव ने एक जज को आत्मघाती कदम उठाने पर मजबूर किया. यह केस अब केवल एक सुसाइड का मामला नहीं, बल्कि सिस्टम, रिश्तों और ताकत के टकराव की एक पेचीदा कहानी बन गया है.
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