कभी बीजेपी के तमिलनाडु में पोस्टर बॉय रहे पूर्व IPS अधिकारी के. अन्नामलाई अब बीजेपी के ही निशाने पर हैं. जब उन्होंने 25 अगस्त 2020 को बीजेपी ज्वाइन की थी, तो पार्टी को उन पर भरोसा था, लेकिन सिर्फ 5 साल में ही उनका बीजेपी से मोहभंग हो गया और उन्होंने 5 जून 2026 को पार्टी से इस्तीफा दे दिया. अब के. अन्नामलाई और बीजेपी, दोनों पक्षों में जुबानी जंग शुरू हो गई है. बीजेपी ने आरोप लगाया है कि पार्टी में रहते हुए अन्नामलाई SIR के समर्थक थे, लेकिन अब इसके खिलाफ बोल रहे हैं. साथ ही, पार्टी ने अन्नामलाई की तरफ से कॉकरोच जनता पार्टी के समर्थन पर भी सवाल उठाए हैं. वहीं, पलटवार करते हुए के. अन्नामलाई कह रहे हैं कि केंद्र सरकार से मुद्दों पर सवाल पूछने या सवाल उठाने पर आपको विदेशी एजेंट करार दिया जा सकता है.
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SIR के मुद्दे पर अन्नामलाई ने उठाए सवाल
दरअसल, SIR के खिलाफ अब तमिलनाडु से के. अन्नामलाई ने सरकार के खिलाफ बयान दिया है और CJP का समर्थन किया है. CJP नेताओं पर दिल्ली पुलिस की कार्रवाई को लेकर केंद्र सरकार पर सवाल उठाते हुए उन्होंने कहा कि कानून की प्रक्रिया पर सवाल उठाने वालों को 'विदेशी एजेंट' बताया जा रहा है. मैं CJP का समर्थन करता हूं.
अन्नामलाई ने कानून की प्रक्रिया पर उठाए सवाल
अन्नामलाई ने अपने बयान में यह भी कहा था कि आज आपको अनिश्चितकाल के लिए जेल भेजा जा सकता है, आपके जमानतदारों के बॉन्ड खारिज किए जा सकते हैं और हैरानी की बात यह है कि निवारक बॉन्ड से जुड़े मामलों से निपटने का अधिकार मिलने पर एक विशेष कार्यकारी मजिस्ट्रेट आपको अपने इशारों पर नचा सकता है.
अगर आप लोकतंत्र में कानून की उचित प्रक्रिया के उल्लंघन पर सवाल उठाते हैं, तो आपको भला-बुरा कहा जाएगा और आप पर हमलों की झड़ी लग जाएगी. इसमें आपको 'विदेशी एजेंट' करार देना भी शामिल होगा.
केंद्र सरकार से अन्नामलाई के पांच सवाल
अन्नामलाई ने केंद्र सरकार से पांच सवाल पूछे. इनमें जंतर-मंतर को प्रदर्शन स्थल के रूप में अधिसूचित सूची से हटाने, विशेष कार्यकारी मजिस्ट्रेट के रूप में काम कर रहे पुलिस अधिकारियों की शक्तियों, 13 अक्टूबर को गिरफ्तार किए गए CJP सदस्यों से जुड़े जमानत मामले, आठ जमानतदारों को खारिज करने और NEET प्रदर्शनों के दौरान पेलेट गन के कथित इस्तेमाल और मानक संचालन प्रक्रिया के उल्लंघन से जुड़े सवाल शामिल हैं.
तमिलनाडु बीजेपी ने अन्नामलाई के पुराने रुख पर उठाए सवाल
इसके पलटवार में तमिलनाडु बीजेपी के प्रवक्ता नारायणन तिरुपति का कहना है कि पार्टी छोड़ने के बाद अन्नामलाई ने SIR को लेकर अपना रवैया बदल लिया है. उन्होंने पार्टी स्तर पर SIR के काम की समीक्षा भी की थी और बार-बार कह रहे थे कि तमिलनाडु में बड़ी संख्या में फर्जी वोटर हैं. उन्होंने फर्जी वोटरों को हटाए जाने के खिलाफ बोलने के लिए डीएमके पर निशाना भी साधा था.
तिरुपति ने अन्नामलाई से सवाल पूछते हुए कहा कि उन्हें यह बताना चाहिए कि आज उनके सवालों को इतना महत्व क्यों दिया जा रहा है, जबकि पहले उनका रुख बिल्कुल अलग था.
पहले भी SIR की प्रक्रिया का बचाव कर चुके हैं अन्नामलाई
पूर्व IPS अधिकारी अन्नामलाई ने एक बार कांग्रेस के तिरुवनंतपुरम से सांसद शशि थरूर के साथ बहस में SIR की प्रक्रिया का बचाव किया था.
कभी बीजेपी के पोस्टर बॉय थे अन्नामलाई
अब समझिए कि कभी बीजेपी के पोस्टर बॉय रहे अन्नामलाई आज कैसे बीजेपी के खिलाफ और CJP के समर्थन में बयान दे रहे हैं.
अन्नामलाई जिस गर्मजोशी से IPS की नौकरी छोड़कर बीजेपी में शामिल हुए थे, उससे भी कहीं ज्यादा तेजी से उन्होंने 5 जून 2026 को बीजेपी के राष्ट्रीय अध्यक्ष नितिन नवीन को अपना पांच पन्नों का इस्तीफा सौंप दिया.
द्रविड़ राजनीति में बीजेपी की आवाज बने अन्नामलाई
तार्किक और बिना लाग-लपेट अपनी बात रखने वाले के. अन्नामलाई द्रविड़ राजनीति के गढ़ में हिंदुत्व और बीजेपी की सशक्त आवाज के तौर पर उभरे. लेकिन तमिलनाडु विधानसभा चुनावों में AIADMK के दबाव में बीजेपी ने उन्हें राजनीतिक दंगल से दूर रखा. हालांकि, इससे पहले बीजेपी ने लोकसभा चुनाव में अन्नामलाई पर भरोसा करते हुए AIADMK से नाता भी तोड़ा था. लेकिन इसका फायदा बीजेपी को नहीं हुआ.
कौन हैं के. अन्नामलाई?
4 जून 1984 को तमिलनाडु के करूर जिले में जन्मे के. अन्नामलाई ने इंजीनियरिंग की पढ़ाई की और बाद में मैनेजमेंट की डिग्री ली. फिर UPSC की परीक्षा पास कर 2011 बैच के IPS अधिकारी बने. उस समय उनकी उम्र करीब 27 साल थी.
अन्नामलाई ने मुख्य रूप से कर्नाटक कैडर में सेवा दी. पुलिस अधिकारी के रूप में उनकी छवि एक सख्त, ईमानदार और जमीनी अफसर की रही. उन्होंने उडुपी और चिकमंगलूर जैसे जिलों में पुलिस अधीक्षक के तौर पर काम किया. पुलिस सेवा के दौरान ही उन्हें सार्वजनिक मंचों पर व्यापक पहचान मिलने लगी. इसके बाद उन्होंने 2019 में पुलिस सेवा से इस्तीफा दे दिया.
अन्नामलाई ने मुख्य रूप से कर्नाटक कैडर में सेवा दी. पुलिस अधिकारी के रूप में उनकी छवि एक सख्त, ईमानदार और जमीनी अफसर की रही. उन्होंने उडुपी और चिकमंगलूर जैसे जिलों में पुलिस अधीक्षक के तौर पर काम किया. पुलिस सेवा के दौरान ही उन्हें सार्वजनिक मंचों पर व्यापक पहचान मिलने लगी. इसके बाद उन्होंने 2019 में पुलिस सेवा से इस्तीफा दे दिया.
सुपर कॉप से राजनेता तक का सफर
इसके बाद सुपर कॉप से राजनेता तक का सफर शुरू हुआ. पुलिस सेवा से इस्तीफा देने के बाद अन्नामलाई ने सामाजिक सेवा और जनसेवा से जुड़े कामों में हिस्सा लिया. अगस्त 2020 में उन्होंने बीजेपी की सदस्यता ली. साल 2021 में अन्नामलाई को तमिलनाडु बीजेपी का अध्यक्ष बनाया गया.
तमिलनाडु की राजनीति में अन्नामलाई बीजेपी के सबसे मजबूत चेहरों में से एक के रूप में उभरे. राज्य में पार्टी का संगठन तो मौजूद था, लेकिन ऐसा नेता नहीं था जो पार्टी को लाइमलाइट में रख सके. अन्नामलाई ने पार्टी अध्यक्ष के तौर पर बीजेपी के लिए बखूबी काम किया.
डीएमके सरकार के मुखर विरोधी बने अन्नामलाई
अन्नामलाई की पहचान बीजेपी नेता से ज्यादा डीएमके सरकार के मुखर विरोधी के रूप में होने लगी. उन्होंने भ्रष्टाचार, प्रशासनिक फैसलों, कानून-व्यवस्था और डीएमके के सनातन विरोधी चेहरे को लेकर भी तीखे हमले किए. हालांकि, विधानसभा चुनावों में AIADMK से गठबंधन के कारण पार्टी ने उन्हें सक्रिय भूमिका में नहीं रखा और चुनाव से दूर रखा. इसके बाद से ही वे नाराज बताए जा रहे थे.
करीब 9 साल तक पुलिस सेवा में रहने के बाद 2019 में इस्तीफा देकर अन्नामलाई बीजेपी में आए. फिर करीब 5 साल तक बीजेपी में रहने के बाद नाराजगी बढ़ी तो उन्होंने इस्तीफा दे दिया. इसके बाद उन्होंने जमीनी स्तर पर बदलाव लाने के उद्देश्य से 'वी द लीडर्स' (We The Leaders) नामक एक नए राजनीतिक आंदोलन की शुरुआत की है, जिसे भविष्य में एक राजनीतिक दल के रूप में भी विस्तारित करने की योजना है.
क्या विजय थलापति की तरह अन्नामलाई को भी है उम्मीद?
शायद अन्नामलाई ने इस सोच के साथ We The Leaders संगठन की शुरुआत की हो कि जिस तरह तमिलनाडु की जनता ने अभिनेता विजय थलापति को मौका दिया और सत्ता की चाबी सौंप दी, उसी तरह आने वाले समय में उन्हें भी ऐसी उम्मीद हो सकती है.
खैर, फिलहाल बीजेपी छोड़ने, उसके खिलाफ बयान देने, SIR और 'कॉकरोच जनता पार्टी' (CJP) के प्रदर्शनकारियों पर हुई पुलिस कार्रवाई के खिलाफ केंद्र सरकार पर सवाल उठाने और उनके मुद्दों का समर्थन करने को लेकर अन्नामलाई राष्ट्रीय मीडिया की चर्चाओं में हैं.
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