Rajasthan: राजस्थान के कोटा से सनसनीखेज चंद्रेसल मठ के महंत देवानंद महाराज हत्याकांड में पुलिस को बड़ी कामयाबी मिली है. पुलिस ने इस पूरी साजिश के मास्टरमाइंड और वकील संतोष राय को उसके एक साथी के साथ गिरफ्तार कर लिया है. पुलिस पूछताछ में जो खुलासा हुआ है, वह बेहद चौंकाने वाला है. यह पूरी हत्या मठ की अकूत संपत्ति और करोड़ों रुपयों को हड़पने के लिए की गई थी.
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प्रॉपर्टी का लालच और 1 लाख की सुपारी
पुलिस जांच के मुताबिक, इस हत्याकांड के पीछे चंद्रेसल मठ की करीब 750 बीघा की कीमती जमीन और बैंक खातों में जमा 4.33 करोड़ रुपए की भारी-भरकम रकम थी. वकील संतोष राय इस पूरी संपत्ति और मठ के कामकाज पर अपना कब्जा जमाना चाहता था. इसके लिए उसने महज एक लाख रुपए में महंत की हत्या की सुपारी दे दी. इस वारदात को अंजाम देने के लिए चार अपराधियों को तैयार किया गया था.
प्लानिंग फेल हुई तो रची मर्डर की साजिश
दरअसल, संतोष राय मठ पर अपना प्रशासनिक नियंत्रण चाहता था. लेकिन महंत देवानंद महाराज ने एक नई मैनेजमेंट कमेटी (कार्यकारिणी) बना दी. महंत के इस कदम से संतोष राय की योजना फेल हो गई और वह बुरी तरह नाराज हो गया. इसके बाद उसने अपने करीबी दोस्त आदित्य वर्मा के साथ मिलकर महंत को रास्ते से हटाने का खौफनाक प्लान बनाया. खुद पर शक न हो, इसके लिए संतोष राय मर्डर से ठीक पहले जयपुर के एक अस्पताल में भर्ती हो गया, ताकि वह पुलिस को अपनी बीमारी का बहाना दिखा सके.
रेकी के बाद चाकुओं से गोदकर हत्या
पुलिस को पता चला है कि मर्डर से दो दिन पहले आरोपियों ने मठ की पूरी रेकी की थी. घटना की रात चार हमलावर दो बाइकों पर सवार होकर मठ पहुंचे. उन्होंने सबसे पहले दूसरे कमरे में सो रहे नंदनवन महाराज के कमरे का दरवाजा बाहर से बंद कर दिया. इसके बाद वे महंत देवानंद के कमरे में घुसे और उन पर चाकुओं से ताबड़तोड़ हमले शुरू कर दिए. महंत अपनी जान बचाने के लिए बाहर भागे, लेकिन हमलावरों ने उन्हें मेन गेट के पास पकड़ लिया और पीठ पर कई वार किए. ज्यादा खून बह जाने के कारण महंत ने मौके पर ही दम तोड़ दिया.
सबूत मिटाने की कोशिश और ट्रेन में गिरफ्तारी
वारदात के बाद आरोपी सीधे आदित्य के घर पहुंचे. वहां आदित्य की पत्नी जैक्शन जॉर्ज ने उनके खून से सने कपड़े वॉशिंग मशीन में धोकर सबूत मिटाने की कोशिश की. इसके बाद आरोपी जयपुर और दिल्ली होते हुए ट्रेन से गोवा भागने की फिराक में थे. हालांकि, पुलिस की 100 जवानों की टीम उनकी मोबाइल लोकेशन का लगातार पीछा कर रही थी. आखिरकार महाराष्ट्र पुलिस की मदद से पुणे पहुंचने से पहले ही उन्हें संपर्क क्रांति एक्सप्रेस ट्रेन में दबोच लिया गया.
फास्ट ट्रैक कोर्ट में चलेगा केस
कोटा की पुलिस अधीक्षक (SP) तेजस्वनी गौतम ने बताया कि इस गंभीर मामले को केस ऑफिसर स्कीम में डाला जाएगा. पुलिस की कोशिश होगी कि इसका ट्रायल फास्ट ट्रैक कोर्ट में चले ताकि अपराधियों को जल्द से जल्द कड़ी से कड़ी सजा दिलाई जा सके.
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