Kota Pregnant Women Death: राजस्थान के कोटा जिले के दो बड़े सरकारी अस्पतालों न्यू मेडिकल कॉलेज और जेके लोन अस्पताल में महज 14 दिनों (4 मई से 17 मई) के भीतर 5 गर्भवती महिलाओं की मौत हो गई. शुरुआत में मौतों का कारण हार्ट अटैक या किडनी फेल होना बताया गया, लेकिन अब इस मामले में जो खुलासा हुआ है, उसने पूरे प्रदेश को हिलाकर रख दिया है.
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दिल्ली एम्स के डॉक्टरों के दखल के बाद जब अस्पतालों में इस्तेमाल हो रही दवाओं की जांच की गई, तो सामने आया कि गर्भवती महिलाओं को मौत के मुंह में धकेलने वाला कोई और नहीं बल्कि अस्पताल में सप्लाई किया गया नकली इंजेक्शन था.
दवा का कंटेंट निकला 'जीरो'
जांच रिपोर्ट के मुताबिक, डिलीवरी के दौरान प्रसव प्रक्रिया को आसान बनाने और प्रसव के बाद होने वाले हैवी ब्लीडिंग (खून के बहाव) को नियंत्रित करने के लिए महिलाओं को 'ऑक्सीटोसिन' (टोसिन) नामक इंजेक्शन लगाया गया था.
अमृतसर की जैक्सन लैबोरेट्रीज द्वारा बनाए गए इस इंजेक्शन के सैंपल जब जांचे गए, तो रिपोर्ट में लिखा पाया गया कि इसमें 'ऑक्सीटोसिन' का एक्टिव कंटेंट बिल्कुल गायब यानी 'शून्य' था. यह इंजेक्शन गंभीर रूप से अवमानक (सब-स्टैंडर्ड) और नकली पाया गया.
लापरवाही की शिकार हुईं ये 5 माएं
1. पायल: 4 मई, दोपहर 12:58 बजे मौत
2. ज्योति: 4 मई, दोपहर 1:35 बजे मौत
3. पिंकी महावर: 7 मई, दोपहर 3:00 बजे मौत
4. प्रिया महावर: 8 मई, सुबह 8:00 बजे मौत
5. शरीन: 17 मई, दोपहर 3:00 बजे मौत
लोकल लेवल पर हुई थी इमरजेंसी खरीद, चल रहा बड़ा रैकेट?
रिपोर्ट में सामने आया है कि इस नकली ऑक्सीटोसिन इंजेक्शन की खेप को स्थानीय स्तर पर इमरजेंसी खरीद के नाम पर मंगवाया गया था. इसके तहत 10,000 इंजेक्शन जेके लोन अस्पताल और 2,479 इंजेक्शन न्यू मेडिकल कॉलेज भेजे गए थे. आशंका जताई जा रही है कि सरकारी अस्पतालों में इमरजेंसी परचेज के नाम पर घटिया और नकली दवाएं खपाने का एक बहुत बड़ा रैकेट काम कर रहा है.
जिम्मेदारी से बच रहे जिम्मेदार, मंत्री मांग रहे वक्त
इतनी बड़ी लापरवाही और 5 मौतों के बाद भी राजस्थान के स्वास्थ्य विभाग के अधिकारी और मंत्री गंभीर नजर नहीं आ रहे हैं. कोटा मेडिकल कॉलेज के प्रिंसिपल और अस्पताल अधीक्षक एक-दूसरे पर दोष मढ़ रहे हैं.
वहीं, राजस्थान के स्वास्थ्य मंत्री गजेंद्र सिंह खींवसर ने कहा है कि दवाओं के अन्य सैंपल्स की पूरी रिपोर्ट आने में 2-3 दिन का वक्त लगेगा, जिसके बाद बड़ी कार्रवाई की जाएगी.
दूसरी तरफ, इंजेक्शन बनाने वाली कंपनी के मालिक ने अपनी गलती मानने से इनकार करते हुए सारा ठीकरा अस्पताल के खराब स्टोरेज और नेग्लिजेंस (लापरवाही) पर फोड़ दिया है. सरकार ने कंपनी के खिलाफ कोर्ट में मामला दर्ज करने के आदेश दिए हैं.
केस हुआ दर्ज!
इस मामले को लेकर मेडिकल कॉलेज अस्पताल प्रबंधन ने महावीर नगर थाने में दी शिकायत दी है. जिसके बाद इंद्रप्रस्थ क्षेत्र की फर्म राजस्थान मेडिकल के खिलाफ प्रकरण दर्ज हो गया है. अब पीड़ितों के परिजन अब भी न्याय और सच के सामने आने का इंतजार कर रहे हैं.
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