राजस्थान के मकराना नगर निकाय चुनाव को लेकर राजनीतिक पारा काफी चढ़ चुका है. सभापति पद के मतदान की तारीख नजदीक आने के साथ ही यह चुनाव पूरे प्रदेश में चर्चा का विषय बन गया है. मुस्लिम बाहुल्य क्षेत्र और करीब 80 हजार की आबादी वाले मकराना को पारंपरिक रूप से कांग्रेस का मजबूत गढ़ माना जाता रहा है, लेकिन हालिया चुनाव परिणाम ने राजनीतिक समीकरणों को पूरी तरह से उलझ दिया है. चुनाव के बाद जैसलमेर के होटलों में कांग्रेस पार्षदों की बाड़ेबंदी और उनके वायरल हो रहे वीडियो को लेकर सोशल मीडिया पर भी तीखी प्रतिक्रियाएं देखने को मिल रही हैं.
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कांग्रेस के गढ़ में सीटों का दिलचस्प और चिंताजनक गणित
मकराना के कुल 60 वार्डों में आए चुनाव परिणामों ने कांग्रेस पार्टी और स्थानीय विधायक जाकिर हुसैन गसावत की नींद उड़ा दी है. स्थिति यह है कि 60 सीटों में से कांग्रेस के खाते में केवल 18 पार्षद ही जीत कर आए हैं, जबकि निर्दलीय प्रत्याशियों ने इससे दोगुना यानी 36 सीटों पर कब्जा जमाया है वहीं, भारतीय जनता पार्टी (BJP) का स्थानीय स्तर पर बहुत मजबूत वजूद न होने के बावजूद 6 सीटें जीतने में कामयाब रही है. जानकारी के अनुसार, जाकिर हुसैन गसावत पूरे 60 वार्डों में कांग्रेस के सिंबल पर प्रत्याशी भी नहीं उतार पाए थे और केवल 48 सीटों पर ही उम्मीदवार खड़े किए गए थे. बीजेपी खेमे में सुमिता भीचर, उनके ससुर श्रीराम भीचर, पूर्व विधायक रूपाराम मुरावतिया और प्रकाश भाकर जैसे नेताओं के बीच गुटबाजी भी जगजाहिर रही है.
सोशल मीडिया पर बाड़ेबंदी और जनता का आक्रोश
कांग्रेस द्वारा जैसलमेर में की गई पार्षदों की बाड़ेबंदी और वहां फोक डांस व मौज-मस्ती के वीडियो वायरल होने के बाद मकराना की जनता में भारी नाराजगी है. सोशल मीडिया पर जनता की तरफ से यह कटाक्ष किया जा रहा है कि जिन पार्षदों के खिलाफ जनता ने वोट दिया था, वे अब पैसों के दम पर बाड़ेबंदी में पहुंच गए हैं. डीडवाना-कुचामन जिले के कांग्रेस जिला अध्यक्ष और मकराना विधायक जाकिर हुसैन गसावत के खिलाफ लोगों में यह आक्रोश आने वाले समय में 2028 के विधानसभा चुनावों तक असर डाल सकता है. हालांकि, विधायक समर्थकों का दावा है कि 21 तारीख को मतदान के दौरान बहुमत का आंकड़ा उनके पक्ष में रहेगा और वे 40 से अधिक पार्षदों का समर्थन हासिल कर लेंगे.
हाइब्रिड प्रत्याशी पर दांव और राजनीतिक विरासत का सवाल
विवादों के बीच कांग्रेस ने रियाज गढ़ को सभापति पद का प्रत्याशी बनाया है, जो खुद वार्ड का चुनाव हारे हुए प्रत्याशी बताए जा रहे हैं. जनता द्वारा हारे गए चेहरे को विकास की कमान सौंपने को लेकर भी जनता और सोशल मीडिया पर सवाल उठ रहे हैं. मकराना में पिछले 20 सालों से जाकिर हुसैन परिवार का दबदबा रहा है, जिसमें उनकी बेटी समरीन भाटी और रिश्तेदार भी चेयरमैन रह चुके हैं. इस बार भी जब वार्ड नंबर 42 से उनके बेटे जीशान गसावत को मैदान में उतारा गया, तो परिवारवाद को लेकर जनता में गुस्सा साफ देखा गया. हालांकि कयास लगाए जा रहे हैं कि बेटे को उपसभापति बनाया जा सकता है, लेकिन देखना यह होगा कि 21 तारीख के मतदान परिणाम किसके पक्ष में जाते हैं और क्या विधायक इस नाराजगी का डैमेज कंट्रोल कर पाते हैं या नहीं.
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