राजस्थान की राजनीति में इन दिनों पूर्व सांसद मानवेंद्र सिंह जसोल का पारिवारिक मामला एक बड़ा सियासी और सामाजिक मुद्दा बन गया है. उनकी कथित दूसरी शादी को लेकर चल रहा विवाद अब जसोल परिवार की दहलीज लांघकर राजनीतिक गलियारों तक पहुंच चुका है. इस पूरे मामले में राजस्थान के पूर्व मंत्री राजेंद्र गुढ़ा के एक बेहद तीखे और विवादित बयान ने सोशल मीडिया पर नई बहस छेड़ दी है.
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क्या है पूरा विवाद?
पिछले कुछ दिनों से सोशल मीडिया पर मानवेंद्र सिंह जसोल की दूसरी शादी और परिवार के भीतर चल रहे तनाव के वीडियो वायरल हो रहे थे. इसके बाद जसोल परिवार की ओर से बयान आया कि यह मानवेंद्र सिंह का व्यक्तिगत फैसला है और परिवार ने इस मामले में उनसे खुद को अलग कर लिया है. लेकिन विवाद तब बढ़ा जब राजेंद्र सिंह गुढ़ा ने इस पर अपनी प्रतिक्रिया दी.
राजेंद्र गुढ़ा का विवादित तर्क
राजेंद्र गुढ़ा ने सोशल मीडिया पर एक पोस्ट साझा करते हुए सवाल उठाया कि क्या सार्वजनिक जीवन में रहने वाले व्यक्ति के फैसले वास्तव में पूरी तरह व्यक्तिगत हो सकते हैं? उन्होंने एक बेहद तीखी तुलना करते हुए तर्क दिया कि यदि कोई महिला अपने शरीर को बेचने का निर्णय लेती है, तो समाज उसे 'वैश्या' क्यों कहता है? गुढ़ा का कहना है कि अगर उस महिला का फैसला उसका निजी अधिकार है, तो समाज उसे अलग नजर से क्यों देखता है? उनका मानना है कि जब आप राजनीति और सार्वजनिक जीवन में होते हैं, तो आपके फैसलों का असर समाज पर पड़ता है, इसलिए उन्हें केवल 'निजी' कहकर पल्ला नहीं झाड़ा जा सकता.
सोशल मीडिया पर छिड़ी जंग
गुढ़ा के इस बयान के बाद इंटरनेट पर दो धड़े बन गए हैं. एक तरफ वे लोग हैं जो मानते हैं कि हर व्यक्ति को अपनी जिंदगी के फैसले लेने का पूरा हक है और राजनीति को निजी जिंदगी से अलग रखना चाहिए. वहीं, दूसरी तरफ वे लोग हैं जो गुढ़ा की बात से सहमत हैं कि सार्वजनिक हस्तियों की हर गतिविधि समाज की चर्चा का विषय बनती है.
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