NEET पेपर लीक केस में कई बड़े खुलासे! 30 लाख में खरीदा गया था पेपर, 29 अप्रैल को पहुंचा सीकर! 

NEET 2026 पेपर लीक मामले में बड़ा खुलासा हुआ है. गुरुग्राम के एक डॉक्टर से 30 लाख रुपये में पेपर खरीदा गया और सीकर समेत कई राज्यों में छात्रों तक पहुंचाया गया. जांच में 700 छात्रों तक पेपर पहुंचाने और व्हाट्सएप-टेलीग्राम नेटवर्क का खुलासा हुआ है.

NEET 2026
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शरत कुमार

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NEET Paper Leak 2026: NEET 2026 पेपर लीक मामले में जांच एजेंसियों को बड़ी जानकारी मिली है. जांच में सामने आया है कि गुरुग्राम के एक डॉक्टर से कथित तौर पर 30 लाख रुपये में पेपर खरीदा गया था, जिसके बाद इसे राजस्थान के सीकर समेत कई राज्यों में छात्रों तक पहुंचाया गया.

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सूत्रों के मुताबिक, जमवारामगढ़ निवासी दो भाई मांगीलाल बिवाल और दिनेश बिवाल ने 26 और 27 अप्रैल को यह पेपर खरीदा था. आरोप है कि दोनों ने गुरुग्राम के एक डॉक्टर से संपर्क कर पेपर हासिल किया. इसके बाद दिनेश बिवाल ने यह पेपर अपने बेटे को दिया, जो सीकर में रहकर मेडिकल प्रवेश परीक्षा की तैयारी कर रहा था.

29 अप्रैल को पहुंचा पेपर!

जांच एजेंसियों का दावा है 29 अप्रैल को यही पेपर कई अन्य छात्रों और अभिभावकों तक पहुंचा दिया गया. बताया जा रहा है कि इस पूरे नेटवर्क की तैयारी पहले से की गई थी और आरोपियों को करीब एक महीने पहले ही संकेत मिल गया था कि परीक्षा का पेपर लीक होकर उपलब्ध कराया जाएगा.

पिछले साल दिनेश बिवाल के परिवार के चार बच्चों का NEET में चयन हुआ था. पूछताछ में यह भी सामने आया है कि इसी भरोसे पर पहले से पूरी योजना बनाई गई थी.

देहरादून से गिरफ्तार आरोपी को लेकर खुलासा!

देहरादून से गिरफ्तार आरोपी राकेश कुमार मंडवारिया को लेकर भी बड़ा खुलासा हुआ है. जांच एजेंसियों के अनुसार, उसने करीब 700 छात्रों तक पेपर पहुंचाने का काम किया. पेपर पहले डिजिटल माध्यम से भेजा गया, फिर उसका प्रिंट निकालकर भी बेचा गया.

सीकर मेडिकल और इंजीनियरिंग कोचिंग का बड़ा केंद्र माना जाता है, अब ये शहर जांच एजेंसियों के रडार पर है. जांच में सामने आया है कि कुछ छात्रों और कोचिंग संचालकों ने व्हाट्सएप और टेलीग्राम ग्रुप बना रखे थे, जिनके जरिए प्रश्नपत्र और उत्तर साझा किए गए.

हरियाणा से यश नाम का आरोपी गिरफ्तार!

हरियाणा से यश यादव नाम के आरोपी को भी गिरफ्तार किया गया है. आरोप है कि उसने भी छात्रों को पेपर बेचने का काम किया. अब पुलिस यह पता लगाने में जुटी है कि पेपर आखिर मूल स्रोत से कैसे बाहर आया और इसमें किन-किन लोगों की भूमिका रही.

मामले के सामने आने के बाद छात्रों और अभिभावकों में भारी नाराजगी है. कई छात्र संगठनों ने परीक्षा प्रक्रिया की पारदर्शिता पर सवाल उठाए हैं और दोषियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की मांग की है. जांच एजेंसियों का कहना है कि पूरे नेटवर्क का पर्दाफाश करने के लिए लगातार छापेमारी और पूछताछ जारी है.

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