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राजस्थान में NEET 2026 पेपर लीक मामले को लेकर सियासत तेज हो गई है. पूर्व मुख्यमंत्री अशोक गहलोत ने भारतीय जनता पार्टी पर गंभीर आरोप लगाते हुए कहा है कि इस मामले में गिरफ्तार आरोपी दिनेश बिंवाल BJP का पदाधिकारी है, क्या यही वजह है कि राज्य की भाजपा सरकार ने पूरे मामले को दबाने की कोशिश की और FIR दर्ज नहीं की?
FIR क्यों दर्ज नहीं की जा रही
गहलोत ने अपने बयान में कहा कि वह 11 मई से लगातार पूछ रहे थे कि आखिर NEET पेपर लीक मामले में FIR क्यों दर्ज नहीं की जा रही. अब जब आरोपी की राजनीतिक पहचान सामने आई है तो भाजपा सरकार की भूमिका पर सवाल और गहरे हो गए हैं. उन्होंने आरोप लगाया कि क्या सरकार युवाओं के भविष्य से खिलवाड़ करने वाले पेपर लीक माफिया को संरक्षण दे रही है?
3 जून को शिकायत के बाद केस दर्ज नहीं
उन्होंने कहा कि 3 जून को परीक्षा होने के तुरंत बाद ही छात्रों ने 3 और 4 जून को पुलिस को शिकायत दी थी लेकिन पुलिस ने कोई कार्रवाई नहीं की. बाद में छात्रों ने National Testing Agency (NTA) को जानकारी भेजी, जिसके बाद मामला आगे बढ़ा और राजस्थान पुलिस की Special Operations Group (SOG) को जांच सौंपी गई. SOG ने 20 से 30 लोगों को गिरफ्तार भी किया, लेकिन FIR दर्ज करने में देरी ने पूरे मामले को संदिग्ध बना दिया.
गहलोत ने कहा कि जब NTA बिना FIR दर्ज हुए ही परीक्षा रद्द कर सकती है तो इसका साफ मतलब है कि उसके पास मजबूत सबूत थे. ऐसे में राजस्थान सरकार और SOG के पास वे सबूत क्यों नहीं पहुंचे? उन्होंने कहा कि बदनामी के डर से सरकार ने मामले को दबाने की कोशिश की, जिससे राजस्थान और उसकी जांच एजेंसियों दोनों की छवि खराब हुई.
लगातार हो रहे पेपर लीक!
उन्होंने याद दिलाया कि 2024, 2025 और अब 2026 तीन साल लगातार पेपर लीक की घटनाएं सामने आ रही हैं. यह केवल राजस्थान नहीं बल्कि देशभर में सक्रिय एक संगठित नेटवर्क है. यूपी, बिहार, गुजरात, उत्तराखंड और अन्य राज्यों में भी ऐसे गैंग युवाओं के भविष्य से खेल रहे हैं.
गहलोत ने कहा कि उनके शासनकाल में भी पेपर लीक के मामले आए, लेकिन तुरंत FIR दर्ज होती थी, जांच होती थी और परीक्षा रद्द कर दोबारा करवाई जाती थी. उन्होंने केंद्र सरकार से मांग की कि पेपर लीक माफिया के खिलाफ राष्ट्रव्यापी स्तर पर सख्त कार्रवाई हो और इस बीमारी को हमेशा के लिए खत्म किया जाए.
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