राजस्थान का 'कोचिंग हब' सीकर एक बार फिर पेपर लीक के कलंक से दहल उठा है. NEET (UG) 2026 परीक्षा में हुई धांधली की तफ्तीश जैसे-जैसे आगे बढ़ रही है, चौंकाने वाले खुलासे हो रहे हैं. Rajasthan Tak की ग्राउंड रिपोर्ट में सामने आया है कि सीकर स्थित 'आर के कंसलटेंसी' (RK Consultancy) का दफ्तर इस पूरे काले कारोबार का एक बड़ा केंद्र था, जहां से करीब 700 छात्रों को नीट का पेपर भेजने का सनसनीखेज दावा किया गया है.
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मांगीलाल और दिनेश बिंवाल: पर्दे के पीछे के खिलाड़ी
इस पेपर लीक कांड में मांगीलाल और दिनेश बिंवाल का नाम प्रमुखता से उभर कर आया है. तफ्तीश के दौरान पता चला कि इन आरोपियों के तार सीकर की मशहूर सीएलसी (CLC) कोचिंग से भी जुड़े थे. रिकॉर्ड खंगालने पर पता चला कि इनके बच्चे वहां पढ़ रहे थे, लेकिन कोचिंग प्रबंधन का कहना है कि उनके पास इनके पास होने या एमबीबीएस करने का कोई रिकॉर्ड उपलब्ध नहीं है. एसओजी (SOG) की पूछताछ में आरोपियों ने कबूल किया है कि वे इस सिस्टम का हिस्सा बनकर लंबे समय से सेंधमारी की कोशिश कर रहे थे.
महीने में सिर्फ दो बार खुलता था 'लीक का अड्डा'
सीकर में जिस कंसलटेंसी ऑफिस से यह खेल चल रहा था, वह स्थानीय लोगों के लिए भी एक रहस्य बना हुआ था. आस-पास के दुकानदारों और हॉस्टल संचालकों का कहना है कि राकेश कुमार मंडवारिया का यह दफ्तर महीने में सिर्फ दो या तीन बार ही खुलता था. लोगों को लगता था कि यहां से बच्चों को विदेश में एमबीबीएस कराने के लिए भेजा जाता है, लेकिन हकीकत में यहाँ पेपर लीक की साजिश रची जा रही थी.
सीकर की छवि पर वार या हकीकत?
एक ओर जहां छात्र इस धांधली से बेहद दुखी हैं और अपनी साल भर की मेहनत बर्बाद होने की बात कह रहे हैं, वहीं कुछ स्थानीय लोगों का मानना है कि सीकर की छवि को जानबूझकर खराब करने की कोशिश की जा रही है. उनका तर्क है कि यहां आज भी ग्रामीण इलाकों के बच्चे अपनी मेहनत से सफलता पाते हैं, लेकिन चंद लोगों की करतूतों ने पूरे शिक्षा नगरी पर सवालिया निशान खड़े कर दिए हैं.
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