जयपुर के किशनपोल विधानसभा क्षेत्र के वार्ड नंबर 109 में निकाय चुनाव के बाद एक ऐसा सियासी घटनाक्रम सामने आया, जिसने स्थानीय राजनीति में हलचल बढ़ा दी. निर्दलीय उम्मीदवार के तौर पर चुनाव जीतने वाले रईस खान ने 18 घंटों के भीतर अलग-अलग बात कही.
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18 घंटों में 3 अलग-अलग तस्वीरें
कहानी की शुरुआत गुरुवार रात करीब 8 बजे हुई. निर्दलीय पार्षद रईस खान की बीजेपी नेताओं के साथ मुलाकात हुई. इस दौरान बीजेपी प्रदेशाध्यक्ष मदन राठौड़ ने उन्हें पार्टी की सदस्यता दिलाई और बीजेपी का दुपट्टा पहनाया. इस मुलाकात की तस्वीरें बीजेपी नेता चंद्र मनोहर बटवाड़ा ने सोशल मीडिया पर शेयर कीं. तस्वीरों के साथ वार्ड 109 में लंबे अंतराल के बाद बीजेपी की जीत का दावा किया गया. लेकिन कुछ घंटे बाद ही इस पूरे घटनाक्रम पर सवाल खड़े हो गए.
रात 3 बजे रईस खान ने क्या कहा?
बीजेपी में शामिल होने की खबर सामने आने के बाद वार्ड में विरोध शुरू हो गया. इसके बाद देर रात करीब 3 बजे रईस खान का एक वीडियो सामने आया. इस वीडियो में उन्होंने बीजेपी में शामिल होने से इनकार कर दिया.
रईस खान ने कहा कि उनकी विचारधारा कांग्रेस से जुड़ी है. उन्होंने यह भी बताया कि बीजेपी की तरफ से उन्हें पार्टी में शामिल होने का प्रस्ताव जरूर मिला था, लेकिन उन्होंने इसे स्वीकार नहीं किया.
यानी जिस मुलाकात की तस्वीरें कुछ घंटे पहले बीजेपी में शामिल होने के तौर पर सामने आई थीं, उसी पर रईस खान ने रात में अपना अलग पक्ष रख दिया.
शुक्रवार को फिर सामने आया नया मोड़
शुक्रवार को रईस खान का एक और वीडियो सामने आया. इस बार वह बीजेपी का दुपट्टा पहने नजर आए. वीडियो में वह बीजेपी में शामिल होने की बात कहते दिखाई दिए. इसी दौरान उन्होंने धमकियां मिलने का आरोप भी लगाया.
इस तरह गुरुवार रात से शुक्रवार तक घटनाक्रम लगातार बदलता रहा. पहले बीजेपी के साथ तस्वीर सामने आई. फिर रईस खान ने बीजेपी में जाने से इनकार किया और अपनी विचारधारा कांग्रेस से जुड़ी बताई. इसके बाद दोबारा उनका बीजेपी के दुपट्टे में वीडियो सामने आ गया.
आखिर इतनी जल्दी क्यों बदला रुख?
अब वार्ड नंबर 109 की सियासत में सबसे बड़ा सवाल यही है कि रईस खान का रुख इतनी तेजी से क्यों बदला. क्या बीजेपी में शामिल होने को लेकर शुरुआत में कोई गलतफहमी थी? क्या स्थानीय राजनीतिक दबाव के बाद घटनाक्रम बदला? या फिर इसके पीछे वार्ड की सत्ता का कोई बड़ा सियासी समीकरण है?
फिलहाल इन सवालों के अलग-अलग दावे सामने आ रहे हैं. पूरे मामले की तस्वीर अभी पूरी तरह साफ नहीं है.
रईस खान ने निकाय चुनाव में निर्दलीय उम्मीदवार के तौर पर मैदान में उतरकर कांग्रेस प्रत्याशी मोहम्मद अय्यूब को हराया था. मोहम्मद अय्यूब को किशनपोल विधायक अमीन कागजी का करीबी माना जाता है.
चुनाव जीतने के बाद अब रईस खान खुद वार्ड 109 की सियासत के केंद्र में आ गए हैं. उनके रुख में तेजी से आए बदलाव ने जयपुर की स्थानीय राजनीति में नई चर्चा छेड़ दी है.
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