नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी ने बुधवार को कोचिंग सिटी कोटा के दशहरा मैदान में देश भर से आए छात्रों से सीधा संवाद किया. 'छात्रों की गूंज' नामक इस विशेष कार्यक्रम में राहुल गांधी ने कहा कि यह कोई राजनीतिक मंच नहीं है, बल्कि देश के युवाओं और छात्रों की आवाज को बुलंद करने का माध्यम है. इस दौरान उन्होंने देश के वर्तमान एजुकेशन सिस्टम पर तीखा हमला बोला और इसे छात्रों को अवसाद (डिप्रेशन) की ओर धकेलने वाला बताया.
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5 परीक्षाओं के नाम पर 5 लाख करोड़ की लूट
राहुल गांधी ने आंकड़ों का हवाला देते हुए कहा कि देश का एजुकेशन सिस्टम अब सिर्फ पैसे वसूलने का जरिया बन चुका है. नीट (NEET), जेईई (JEE), एसएससी (SSC), आरआरबी (RRB) और यूपीएससी (UPSC) जैसी महज पांच प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी के नाम पर छात्रों के परिवारों की जेब से हर साल 5 लाख करोड़ रुपये छीन लिए जाते हैं. यह रकम भारत सरकार के पांच मंत्रालयों के कुल बजट के बराबर है.
उन्होंने बताया कि अकेले 22 लाख नीट अभ्यर्थी तैयारी पर 1.32 लाख करोड़ रुपये खर्च करते हैं, जो देश के कुल शिक्षा बजट के बराबर है. वहीं, 15 लाख जेईई अभ्यर्थी 1.3 लाख करोड़ रुपये खर्च कर देते हैं. भारी-भरकम खर्च के बाद भी अंत में छात्रों से कह दिया जाता है कि उनका नंबर नहीं आएगा.
'रिजेक्शन सिस्टम' बन चुकी है हमारी शिक्षा व्यवस्था
कांग्रेस नेता ने कहा कि हमारा एजुकेशन सिस्टम बेहद क्रूर हो चुका है. यह बच्चों को चुनने के लिए नहीं, बल्कि उन्हें बाहर (रिजेक्ट) करने के लिए बनाया गया है. कार्यक्रम में मौजूद 3000 छात्रों का उदाहरण देते हुए उन्होंने कहा कि इनमें से UPSC और IIT में महज एक-एक छात्र का सिलेक्शन होगा, जबकि नीट में केवल 180 बच्चे चुने जाएंगे. बाकी बचे बच्चों का क्या होगा? यह सिस्टम युवाओं का अपमान करता है और उन्हें आत्मघाती कदम उठाने पर मजबूर करता है. उन्होंने छात्रा आंकाक्षा का सुसाइड नोट दिखाते हुए कहा कि यह उस बच्ची की नाकामी नहीं बल्कि हमारे सिस्टम की नाकामी है.
करियर के विकल्प थोपे जा रहे हैं, 80% इंजीनियर बेरोजगार
राहुल गांधी ने छात्रों से पूछा कि वे सिर्फ डॉक्टर, इंजीनियर या अफसर ही क्यों बनना चाहते हैं? इस पर छात्रों ने जवाब दिया कि बचपन से उन पर यही दबाव डाला जाता है. इस पर राहुल गांधी ने कहा कि देश में युवाओं को अपनी पसंद की स्ट्रीम चुनने की आजादी होनी चाहिए. आज हालात यह हैं कि कॉलेजों से निकलने वाले 1000 युवाओं में से केवल 12 को रोजगार मिल पा रहा है. देश में आज 100 में से 80 इंजीनियर बेरोजगार घूम रहे हैं, जिन्हें मजबूरन कुली बनना पड़ रहा है या ओला-उबर चलानी पड़ रही है.
सिस्टम बदलने के लिए आंदोलन की जरूरत
राहुल गांधी ने देश के भविष्य को बचाने के लिए इस क्रूर व्यवस्था को बदलने का आह्वान किया. उन्होंने कहा कि असली एजुकेशन सिस्टम वह होता है, जहां हर बच्चा बड़े से बड़ा सपना देख सके और उसे बेहद कम खर्च में पूरा कर सके.
उन्होंने युवाओं से इस व्यवस्था को बदलने के लिए सुझाव मांगे और कहा कि यह एक बड़े आंदोलन की शुरुआत है, जिसमें सबको मिलकर लड़ना होगा ताकि किसी भी बच्चे को तनाव में आकर अपनी जान न गंवानी पड़े.
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