Rajasthan Women Reservation Bill 2026: राजस्थान की राजनीति में दशकों से पुरुषों का वर्चस्व रहा है, लेकिन अब सत्ता के गलियारों में एक बड़ी क्रांति की आहट सुनाई दे रही है. महिला आरक्षण कानून (33 प्रतिशत आरक्षण) के लागू होने के बाद राजस्थान विधानसभा की तस्वीर पूरी तरह बदलने वाली है. आने वाले समय में सदन में महिलाओं की आवाज पहले से कहीं ज्यादा बुलंद होगी.
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वर्तमान स्थिति क्या है
राजस्थान में वर्तमान में 200 विधानसभा सीटें हैं, जिनमें से केवल 21 महिला विधायक हैं. यह कुल संख्या का मात्र 11 प्रतिशत के करीब है. दिलचस्प बात यह है कि चुनावों में महिलाओं का वोटिंग प्रतिशत अक्सर पुरुषों के बराबर या उससे अधिक रहता है, लेकिन सदन तक पहुंचने वाली महिलाओं की संख्या हमेशा कम रही है.
2008 में दर्ज हुआ था बड़ा रिकॉर्ड
अगर इतिहास पर नजर डालें तो 1952 में हुए पहले विधानसभा चुनाव में एक भी महिला विधायक नहीं चुनी गई थी. बाद में उपचुनाव के जरिए पहली बार महिलाएं सदन में पहुंचीं. 2008 में सबसे ज्यादा 29 महिला विधायक चुनी गई थीं, जो आज तक का रिकॉर्ड है. इसके बाद भी संख्या में खास बढ़ोतरी नहीं हुई.
परिसीमन के बाद बढ़ेंगी सीटें और संख्या
अगर 33% महिला आरक्षण लागू होता है तो 200 सीटों में से लगभग 66 सीटें महिलाओं के लिए आरक्षित हो जाएंगी. यानी मौजूदा 21 से बढ़कर यह संख्या तीन गुना तक पहुंच सकती है.
आने वाले समय में परिसीमन के बाद राजस्थान विधानसभा की सीटें 200 से बढ़कर 260 से 270 तक हो सकती हैं. ऐसे में महिलाओं के लिए आरक्षित सीटें भी बढ़ जाएंगी. अगर 260 सीटें होती हैं तो करीब 86 सीटें महिलाओं को मिल सकती हैं. अगर 270 सीटें होती हैं तो यह संख्या लगभग 89 तक पहुंच सकती है. यानी भविष्य में 85 से 90 महिला विधायक सदन में पहुंच सकती हैं.
लोकसभा में भी बढ़ेगा दबदबा
यही बदलाव लोकसभा सीटों पर भी दिखेगा. ऐसे में संसद में भी राजस्थान की महिला शक्ति का प्रतिनिधित्व बढ़ना तय है. अभी राजस्थान में 25 लोकसभा सीटें हैं, अगर परिसीमन होता है तो 13 सीटें और बढ़ सकती हैं. यानी कुल 38 सीटें हो सकती हैं. इनमें महिलाएं के लिए 12 सीटें मिल सकती है.
इस आरक्षण के लागू होने से कई दिग्गजों के समीकरण बिगड़ सकते हैं. कई नेताओं के टिकट कटेंगे और सीटों के आरक्षित होने पर राजनीतिक परिवारों को अपनी रणनीति बदलनी पड़ सकती है.
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