राजस्थान में बजरी माफिया और वर्दी का गठजोड़ बेनकाब? वायरल कॉल रिकॉर्डिंग के बाद 5 पुलिसकर्मी सस्पेंड

राजस्थान के टोंक जिले में बजरी माफिया और पुलिस की सांठगांठ एक बार फिर उजागर हुई है. सोशल मीडिया पर वायरल कॉल रिकॉर्डिंग और थाने के सामने से गुजरती बजरी ट्रॉलियों के वीडियो के बाद एसपी ने बड़ी कार्रवाई करते हुए सब इंस्पेक्टर समेत पांच पुलिसकर्मियों को निलंबित कर दिया है.

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मनोज तिवारी

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राजस्थान में बजरी माफिया और पुलिस के बीच का सांठगांठ एक बार फिर चर्चा में है. दरअसल, टोंक जिले में पुलिस ने अपने ही स्टाफ के कुछ लागों पर कार्रवाई की है. इन पर आरोप है ये कि कानून की रक्षा करने के बजाय माफिया के मददगार बने हुए थे. अब इस मामले में पुलिस अधीक्षक राजेश कुमार मीणा ने बड़ी कार्रवाई करते हुए एक सब इंस्पेक्टर, एक हेड कांस्टेबल और तीन कांस्टेबलों को तत्काल प्रभाव से निलंबित कर दिया है. इन सभी पर अवैध बजरी परिवहन में माफिया का साथ देने और अनुशासनहीनता के गंभीर आरोप हैं.

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इस पूरे मामले में सबसे बड़ा मोड़ तब आया जब सोशल मीडिया पर कुछ कॉल रिकॉर्डिंग वायरल हो गई. आरोप है कि अलीगढ़ थाने के हेड कांस्टेबल सत्य प्रकाश का एक कथित ऑडियो सामने आया था. दावा है कि इसमें वो बजरी माफिया से अवैध ट्रॉलियों की एंट्री और रुपयों के लेनदेन को लेकर खुलेआम सौदेबाजी कर रहे हैं. यह ऑडियो नवंबर 2025 का बताया जा रहा है, जिसमें माफिया और पुलिस के बीच के फिक्स रेट की बात उजागर हुई है. इस सबूत के सामने आने के बाद विभाग के पास कार्रवाई के अलावा कोई रास्ता नहीं बचा था.

थाने के सामने से गुजरीं बजरी की ट्रॉलियां

कार्रवाई की एक और वजह 10 जनवरी की सुबह का एक वीडियो बना. सोप पुलिस थाने के बिल्कुल सामने से बजरी से भरी ट्रॉलियां बेखौफ होकर गुजरती दिखाई दीं. हैरानी की बात यह है कि उस समय थाने पर पुलिसकर्मी तैनात थे, लेकिन किसी ने भी इन ट्रॉलियों को रोकने की जहमत नहीं उठाई. इस लापरवाही को गंभीरता से लेते हुए एसपी ने वहां तैनात एएसआई प्रहलाद नारायण और कांस्टेबल साबूलाल को सस्पेंड कर दिया. यह वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल होने के बाद पुलिस की काफी किरकिरी हुई थी.

तीसरी बार सस्पेंड हुआ चालक कांस्टेबल

इस पूरे घटनाक्रम में एक चौंकाने वाला नाम चालक कांस्टेबल ओम प्रकाश यादव का है. बताया जा रहा है कि ओम प्रकाश पहले भी दो बार बजरी माफिया से मिलीभगत के मामले में निलंबित हो चुके हैं. यह तीसरी बार है जब उन्हें इसी तरह के आरोपों में फिर से सस्पेंड किया गया है. एक ही कर्मचारी का बार-बार एक ही अपराध में शामिल होना यह दर्शाता है कि माफिया की जड़ें कितनी गहरी हैं और महज निलंबन जैसी सजा का उन पर कोई खास असर नहीं हो रहा है.

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सख्त जांच और भविष्य के सवाल

फिलहाल इन सभी पुलिसकर्मियों को लाइन हाजिर कर दिया गया है और उनके खिलाफ विभागीय जांच शुरू कर दी गई है. एडीजीपी के निर्देश पर पूरे राज्य में चलाए जा रहे डिकोय ऑपरेशन के बाद टोंक पुलिस का यह एक्शन अब तक की सबसे बड़ी कार्रवाई मानी जा रही है. हालांकि, जनता के बीच अब भी यह सवाल बरकरार है कि क्या यह कार्रवाई सिर्फ कुछ पुलिसकर्मियों के निलंबन तक सीमित रहेगी या फिर माफिया और खाकी के इस पूरे नेटवर्क को जड़ से खत्म किया जाएगा.

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