राजस्थान की सियासत में एक बार फिर हलचल तेज हो गई है . मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा की हालिया दिल्ली यात्रा और वहां बीजेपी के शीर्ष नेतृत्व के साथ हुई मैराथन बैठकों ने कैबिनेट विस्तार और संगठन में बदलाव के संकेतों को पुख्ता कर दिया है. सूत्रों की मानें तो बीजेपी अब 'परफॉर्म करो या साइड हो जाओ' के फॉर्मूले पर काम कर रही है, जिसका असर जल्द ही सरकार और संगठन दोनों में देखने को मिल सकता है .
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खाली सीटों पर नए चेहरों की एंट्री
वर्तमान में राजस्थान मंत्रिमंडल में 24 मंत्री हैं जबकि नियमों के अनुसार अधिकतम 30 मंत्री बनाए जा सकते हैं. इसका मतलब है कि अभी भी 6 सीटें खाली हैं. बीजेपी इन खाली सीटों के जरिए जातीय समीकरण, क्षेत्रीय संतुलन और युवाओं को साधने की रणनीति बना रही है. पार्टी का लक्ष्य 2028 के विधानसभा चुनावों से पहले एक नई और ऊर्जावान टीम तैयार करना है.
मंत्रियों का रिपोर्ट कार्ड तैयार
दिल्ली में हुई बैठकों में मंत्रियों की परफॉर्मेंस रिपोर्ट पर भी गहन मंथन हुआ है. संगठन से मिले फीडबैक के आधार पर उन मंत्रियों की पहचान की जा रही है जिनका काम जमीन पर नहीं दिख रहा है. ऐसे में कुछ मौजूदा मंत्रियों के विभागों में फेरबदल हो सकता है या फिर उनकी छुट्टी भी की जा सकती है.
राजनीतिक नियुक्तियां और राज्यसभा का गणित
कैबिनेट विस्तार के साथ-साथ लंबे समय से अटकी राजनीतिक नियुक्तियों (बोर्ड, निगम और आयोग) पर भी मुहर लगने की संभावना है. इसके अलावा, जून में खाली हो रही राज्यसभा की तीन सीटों के लिए भी रणनीति तैयार की गई है, जिसमें बीजेपी किसी महिला चेहरे को मौका देकर बड़ा राजनीतिक संदेश दे सकती है.
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