राजस्थान विधानसभा चुनाव के बाद से ही कांग्रेस के भीतर चल रही सियासी हलचल थमने का नाम नहीं ले रही है. वरिष्ठ नेताओं की दिल्ली दौड़ और राज्य की राजनीति में अंदरूनी खींचतान को लेकर एक बार फिर कयासों का बाजार गर्म है. वरिष्ठ पत्रकारों और राजनीतिक गलियारों से आ रही खबरों के मुताबिक, पूर्व मुख्यमंत्री अशोक गहलोत को दिल्ली (एआईसीसी) में एक बड़ी और मजबूत संगठनात्मक जिम्मेदारी सौंपी जा सकती है.
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क्या अशोक गहलोत बनेंगे कांग्रेस के राष्ट्रीय कोषाध्यक्ष?
राजनीतिक हलकों में यह चर्चा जोरों पर है कि अजय माकन की जगह अशोक गहलोत को कांग्रेस का अगला राष्ट्रीय कोषाध्यक्ष (National Treasurer) बनाया जा सकता है. इससे पहले जब अहमद पटेल के समय और फिर राहुल गांधी के अध्यक्ष रहते हुए भी गहलोत को लेकर यह चर्चा उठी थी, तब उन्होंने दिल्ली जाने से मना कर दिया था. लेकिन वर्तमान परिस्थितियों को देखते हुए माना जा रहा है कि अशोक गहलोत इस बार केंद्र में मजबूत पद संभाल सकते हैं.
इसके अलावा, एक दूसरा फॉर्मूला यह भी चर्चा में है कि अगर अजय माकन अपने पद पर बने रहते हैं, तो ढाई घंटे तक कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे से मुलाकात करने वाले अशोक गहलोत को महाराष्ट्र का प्रभारी बनाया जा सकता है. महाराष्ट्र में राजस्थान मूल के प्रवासियों और व्यापारियों की बड़ी संख्या होने के कारण गहलोत वहां पार्टी के लिए बेहद उपयोगी साबित हो सकते हैं. हालांकि, इन सभी कयासों पर अंतिम मुहर राहुल गांधी, प्रियंका गांधी और सोनिया गांधी की विदेश यात्रा से लौटने के बाद ही लगेगी.
सचिन पायलट की भूमिका और प्रदेश अध्यक्ष का 'कांटों भरा ताज'
अगर अशोक गहलोत को केंद्र में बड़ी जिम्मेदारी मिलती है, तो संतुलन बनाने के लिए सचिन पायलट को भी राजस्थान में कोई मजबूत भूमिका देनी होगी. हालांकि, पायलट फिलहाल राजस्थान के प्रदेश अध्यक्ष (PCC Chief) का पद लेने के मूड में नहीं दिख रहे हैं. राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि पंजाब में राजा वडिंग और मध्य प्रदेश में जीतू पटवारी की स्थिति को देखते हुए पायलट जानते हैं कि प्रदेश अध्यक्ष का पद इस समय कांटों भरा ताज है. 2029 के लोकसभा और विधानसभा चुनावों में अभी लंबा वक्त है, इसलिए वह जल्दबाजी में कोई जिम्मेदारी लेकर अपनी राजनीतिक जमीन को जोखिम में नहीं डालना चाहते. वह फिलहाल राष्ट्रीय स्तर पर ही अपनी भूमिका बनाए रखेंगे और उत्तर प्रदेश के आगामी चुनावों में सक्रिय रहेंगे.
डोटासरा की कार्यकारिणी और खड़गे की 'जातिगत' नसीहत
इधर, राजस्थान कांग्रेस के वर्तमान अध्यक्ष गोविंद सिंह डोटासरा अपनी नई जिला और प्रदेश कार्यकारिणी बनाने में जुटे हुए हैं. सूत्रों के मुताबिक, जब डोटासरा अपनी प्रस्तावित कार्यकारिणी की सूची लेकर मल्लिकार्जुन खड़गे से मिलने पहुंचे, तो कांग्रेस आलाकमान ने जातिगत संतुलन को लेकर उन्हें नसीहत दे डाली. चर्चा है कि खड़गे ने सूची में एक विशेष वर्ग (जाट समुदाय) के अत्यधिक प्रतिनिधित्व पर टोकते हुए कहा कि इसमें दलितों, अन्य पिछड़ा वर्ग (OBC) और सामान्य वर्ग के लोगों को भी उचित स्थान दिया जाए. इसके बाद अब कार्यकारिणी को लेकर नए सिरे से मंथन शुरू हो गया है.
पेपर लीक पर बीजेपी और कांग्रेस में 'जातिगत' राजनीति
राजस्थान की राजनीति का सबसे बड़ा मुद्दा रहा 'पेपर लीक' अब जातिगत राजनीति के चक्रव्यूह में फंसता नजर आ रहा है. जैसलमेर में सामने आए हालिया मामले को लेकर जहां विपक्ष हमलावर है, वहीं बीजेपी के अपने ही विधायक छोटू सिंह का एक हैरान करने वाला बयान सामने आया है. विधायक छोटू सिंह ने मामले से पूरी तरह पल्ला झाड़ते हुए कहा, "मैंने कुछ नहीं सुना, कोई नकल नहीं हुई है और न ही कोई पेपर आउट हुआ है; बाकी जांच का विषय है."
राजनीतिक जानकारों का कहना है कि चाहे कांग्रेस हो या बीजेपी, जब भी पेपर लीक के आरोपियों में किसी खास वर्ग या जाति के लोग शामिल होते हैं, तो नेता अपनी राजनीतिक और जातीय मजबूरियों के कारण चुप्पी साध लेते हैं या सीधे तौर पर कुछ भी कहने से बचते हैं.
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