गहलोत के घर लगे 'चौथी बार' के नारे, PCC पहुंचते ही भड़के डोटासरा; मालवीय को सुनाई खरी-खरी

न्यूज तक डेस्क

• 02:57 PM • 31 Jul 2026

राजस्थान कांग्रेस में 309 नेताओं और कार्यकर्ताओं की जॉइनिंग के दौरान सियासी माहौल गरमा गया. महेंद्रजीत सिंह मालवीय समर्थकों के साथ पहले अशोक गहलोत से मिले, जहां गहलोत चौथी बार के नारे लगे. बाद में पीसीसी चीफ गोविंद सिंह डोटासरा ने व्यक्तिवाद और निजी ब्रांडिंग पर कड़ी नाराजगी जताई.

Govind Singh Dotasra
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राजस्थान कांग्रेस में गुरुवार को वागड़ से आए नेताओं और कार्यकर्ताओं की जॉइनिंग के दौरान सियासी माहौल गरमा गया. पूर्व मंत्री महेंद्रजीत सिंह मालवीय और दिनेश खोड़निया के नेतृत्व में 309 नेता और कार्यकर्ता बीएपी छोड़कर कांग्रेस में शामिल होने के लिए जयपुर पहुंचे. हालांकि, प्रदेश कांग्रेस कार्यालय जाने से पहले इन नेताओं और कार्यकर्ताओं का पूर्व मुख्यमंत्री अशोक गहलोत के आवास पहुंचना चर्चा का विषय बन गया.

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गहलोत से मुलाकात के दौरान समर्थकों ने 'अशोक गहलोत चौथी बार' के नारे लगाए. इसके बाद जब सभी लोग प्रदेश कांग्रेस कार्यालय पहुंचे तो पीसीसी चीफ गोविंद सिंह डोटासरा ने मंच से व्यक्तिवाद और नेताओं की निजी ब्रांडिंग को लेकर नाराजगी जाहिर की.

पहले गहलोत के घर पहुंचे मालवीय और समर्थक

महेंद्रजीत सिंह मालवीय और दिनेश खोड़निया के साथ वागड़ से आए कार्यकर्ता सुबह सबसे पहले अशोक गहलोत के आवास पहुंचे. यहां कार्यकर्ताओं ने गहलोत से मुलाकात की और उनके समर्थन में नारे लगाए.

इसके बाद सभी नेता और कार्यकर्ता कांग्रेस कार्यालय पहुंचे, जहां उनकी औपचारिक जॉइनिंग का कार्यक्रम रखा गया था. इसी कार्यक्रम में डोटासरा के तेवर सख्त नजर आए.

टासरा बोले- पार्टी बड़ी है या कोई नेता?

गोविंद सिंह डोटासरा ने मालवीय और खोड़निया की मौजूदगी में व्यक्तिगत ब्रांडिंग को लेकर सवाल उठाए. उन्होंने कहा कि पार्टी के बजाय खुद की ब्रांडिंग करने और व्यक्तिवाद की राजनीति का कांग्रेस पहले भी नुकसान उठा चुकी है.

डोटासरा ने गहलोत का नाम लिए बिना कहा कि यह सोचना चाहिए था कि कांग्रेस पार्टी बड़ी है या कोई नेता और सबसे पहले कहां जाना चाहिए था.

उन्होंने कहा कि कोई व्यक्ति अपनी ब्रांडिंग के लिए काम कर रहा है तो उसे शुभकामनाएं, लेकिन वे कांग्रेस पार्टी के लिए काम करते हैं. कांग्रेस ने व्यक्तिवाद का नुकसान झेला है और यही एक कारण है कि पार्टी एक बार सरकार में आती है और अगली बार सत्ता में वापसी नहीं कर पाती.

'मेरी अनुशंसा पर मालवीय कांग्रेस में आए'

डोटासरा ने मालवीय की कांग्रेस में वापसी को लेकर भी बड़ा बयान दिया. उन्होंने कहा कि उनकी अनुशंसा पर ही मालवीय को दोबारा कांग्रेस में शामिल किया गया. अगर वे अनुशंसा नहीं करते तो उनकी वापसी नहीं हो पाती.

उन्होंने यह भी कहा कि उन्होंने मालवीय को चुनाव में हराया था और आज वे उनके पीछे खड़े हैं, जबकि पार्टी में उनसे भी बड़े नेता मौजूद हैं.

डोटासरा ने कहा कि अगर कोई नेता भाजपा में जाने के बाद भी कांग्रेस में वापस आता है तो वे उसका स्वागत करेंगे, लेकिन संगठन और पार्टी को सबसे ऊपर रखना होगा.

मालवीय ने बताया पहले गहलोत से मिलने का कारण

महेंद्रजीत सिंह मालवीय ने गहलोत से पहले मुलाकात करने पर कहा कि वागड़ से निकलते समय ही कार्यक्रम तय हो गया था. योजना थी कि पहले पूर्व मुख्यमंत्री अशोक गहलोत से मुलाकात करेंगे और उसके बाद कांग्रेस कार्यालय जाकर जॉइनिंग करेंगे.

सवा दो घंटे में ऐसे बदला सियासी माहौल

सुबह 10:13 बजे मालवीय के नेतृत्व में 309 नेता और कार्यकर्ता अशोक गहलोत से मिले. करीब 11:40 बजे समर्थकों ने शक्ति प्रदर्शन किया और 'अशोक गहलोत चौथी बार' के नारे लगाए.

दोपहर 12:14 बजे मालवीय और उनके समर्थक प्रदेश कांग्रेस कार्यालय पहुंचे. इसके बाद माहौल में तल्खी देखने को मिली. करीब 12:36 बजे डोटासरा पहुंचे और नसीहत देने के बाद नेताओं और कार्यकर्ताओं की कांग्रेस में जॉइनिंग कराई गई.

गहलोत बोले- कार्यकर्ता वापस कांग्रेस आना चाहते थे

पूर्व मुख्यमंत्री अशोक गहलोत ने मालवीय और उनके समर्थकों की वापसी पर कहा कि मालवीय कुछ गलतफहमियों के कारण कांग्रेस छोड़कर चले गए थे. उनके वापस कांग्रेस में आने के बाद समर्थक कार्यकर्ताओं की भी पार्टी में लौटने की इच्छा थी.

वागड़ की राजनीति में शक्ति प्रदर्शन के मायने

मालवीय बड़ी संख्या में वागड़ के कार्यकर्ताओं के साथ जयपुर पहुंचे. इसे क्षेत्र में उनकी राजनीतिक ताकत दिखाने की कोशिश के तौर पर भी देखा जा रहा है. बीएपी में अंदरूनी खींचतान की चर्चा के बीच यह घटनाक्रम सामने आया है.

मालवीय जब भाजपा में शामिल हुए थे, उस दौरान वागड़ क्षेत्र के कई कार्यकर्ताओं ने कांग्रेस छोड़कर बीएपी का रुख किया था. अब कांग्रेस प्रदेश में संगठन मजबूत करने और नए सदस्यों को जोड़ने का अभियान चला रही है.

ऐसे समय में 309 नेताओं और कार्यकर्ताओं की एक साथ जॉइनिंग को वागड़ की राजनीति के लिहाज से अहम माना जा रहा है. वहीं, मालवीय के शक्ति प्रदर्शन को संगठन में अपनी भूमिका मजबूत करने और वागड़ में अपना राजनीतिक प्रभाव दिखाने की कोशिश के रूप में देखा जा रहा है. हालांकि, पद को लेकर उनकी किसी मांग की आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है