Rajasthan News:राजस्थान की राजनीति में एक बार फिर से भारी हलचल शुरू हो गई है. आगामी नगर निकाय और पंचायत चुनावों को देखते हुए कांग्रेस ने अपनी चुनावी बिसात बिछानी शुरू कर दी है. पार्टी अब उन नेताओं को वापस अपने पाले में लाने की तैयारी कर रही है, जो पिछले विधानसभा या लोकसभा चुनावों के दौरान किसी वजह से कांग्रेस छोड़कर चले गए थे या जिन्हें अनुशासनहीनता के कारण पार्टी से बाहर कर दिया गया था. इस रणनीतिक कदम से सूबे की सियासत गरमा गई है और माना जा रहा है कि इससे सत्तारूढ़ बीजेपी की चिंताएं बढ़ सकती हैं.
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वॉर रूम में घंटों मंथन
इसी सिलसिले में जयपुर स्थित प्रदेश कांग्रेस वॉर रूम में एक बेहद महत्वपूर्ण और उच्च स्तरीय बैठक हुई. इस बैठक की अध्यक्षता कांग्रेस की अनुशासन समिति के अध्यक्ष और वरिष्ठ नेता उदयलाल आंजना ने की. बैठक में समिति की सदस्य शकुंतला रावत और हाकम अली भी विशेष रूप से मौजूद रहे. लगभग एक घंटे तक चली इस बैठक में एक दर्जन से ज्यादा पुराने नेताओं की घर वापसी को लेकर गंभीर चर्चा हुई और उनके नामों पर सहमति बनने की खबर है.
सूत्रों के मुताबिक, इस लिस्ट में कुछ पूर्व विधायक, पूर्व पदाधिकारी और कुछ ऐसे नेता भी शामिल हैं जो फिलहाल बीजेपी में हैं, लेकिन अब वापस कांग्रेस का दामन थामना चाहते हैं. हालांकि, कांग्रेस ने रणनीतिक तौर पर अभी तक इन नामों की आधिकारिक घोषणा नहीं की है, लेकिन सियासी गलियारों में कई बड़े चेहरों को लेकर कयासबाजी का दौर तेज है.
स्थानीय चुनाव हैं असली वजह
राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि कांग्रेस को अच्छी तरह पता है कि स्थानीय निकाय और पंचायत चुनाव ही किसी भी दल के संगठन की असली नींव होते हैं. गांव और शहरों के इन चुनावों से ही जमीनी स्तर पर पार्टी मजबूत बनती है. यही वजह है कि पार्टी अपने पुराने और जनाधार वाले नाराज नेताओं को मनाने में कोई कसर नहीं छोड़ना चाहती. आपको बता दें कि कांग्रेस पिछले कुछ दिनों में मेवाराम जैन, आमीन खान, सुनील परिहार और वीरेंद्र बेनीवाल जैसे कद्दावर नेताओं की वापसी करा भी चुकी है.
बीजेपी का ग्राफ गिर रहा है: उदयलाल आंजना
बैठक खत्म होने के बाद मीडिया से बात करते हुए उदयलाल आंजना ने स्पष्ट किया कि कुछ महत्वपूर्ण नामों की सिफारिश तैयार कर ली गई है. इस सूची को जल्द ही प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष गोविंद सिंह डोटासरा और प्रदेश प्रभारी के पास भेजा जाएगा, जिसके बाद अंतिम निर्णय पार्टी हाईकमान लेगा. आंजना ने इस दौरान बीजेपी पर तीखा हमला बोलते हुए दावा किया कि न सिर्फ राजस्थान में बल्कि पूरे देश में बीजेपी का ग्राफ लगातार नीचे जा रहा है. यही वजह है कि दूसरी पार्टियों के नेता अब लगातार कांग्रेस के संपर्क में हैं.
चुनौती भी और मौका भी
कांग्रेस इस अभियान में विशेष रूप से उन नेताओं को प्राथमिकता दे रही है, जिनकी विचारधारा हमेशा कांग्रेस की रही है और जो पार्टी से बाहर होने के बावजूद अंदरखाने कांग्रेस के लिए ही काम कर रहे थे. हालांकि, इस 'घर वापसी' अभियान के सामने एक बड़ी चुनौती भी है. राजनीति में जब पुराने नेता लौटते हैं, तो उनके साथ पुरानी महत्वाकांक्षाएं, समीकरण और आपसी गुटबाजी भी वापस आती है.
ऐसे में यह देखना दिलचस्प होगा कि कांग्रेस का यह दांव उसे आगामी चुनावों में मजबूती देता है या फिर पार्टी के अंदर नए विवादों को जन्म देता है. फिलहाल, राजस्थान की धरती पर एक नए राजनीतिक घटनाक्रम की पटकथा लिखी जा चुकी है.
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