राजस्थान कांग्रेस के भीतर एक बार फिर सियासी हलचल तेज हो गई है. राहुल गांधी के पुष्कर दौरे के बाद से ही संगठन में बड़े बदलाव की सुगबुगाहट शुरू हो चुकी है. सूत्रों के मुताबिक, प्रदेश कांग्रेस कमेटी (PCC) के अध्यक्ष गोविंद सिंह डोटासरा की जगह किसी नए युवा चेहरे को कमान सौंपी जा सकती है. इस रेस में सचिन पायलट का नाम सबसे आगे चल रहा है, जिसे लेकर प्रदेश की राजनीति में एक नए भूचाल की आशंका जताई जा रही है.
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गुटबाजी और आलाकमान का नया प्लान
हाल ही में कांग्रेस नेता राहुल गांधी राजस्थान के पुष्कर पहुंचे थे, जहां उन्होंने कार्यकर्ताओं में जोश भरने की कोशिश की. लेकिन इस दौरे के बीच पार्टी की अंदरूनी गुटबाजी और खींचतान एक बार फिर सतह पर आ गई.
खबरों के अनुसार, केंद्रीय नेतृत्व अब 2028 के विधानसभा चुनावों को ध्यान में रखकर राज्य संगठन को नया रूप देने की तैयारी कर रहा है. नई ऊर्जा फूंकने के लिए प्रदेश अध्यक्ष की कुर्सी पर बदलाव करने पर गंभीरता से विचार किया जा रहा है.
पायलट के नाम पर डोटासरा का गोलमोल जवाब
जब वर्तमान पीसीसी चीफ गोविंद सिंह डोटासरा से मीडिया ने सीधा सवाल किया कि क्या राजस्थान में कांग्रेस का चेहरा या कमान सचिन पायलट के हाथों में सौंपी जानी चाहिए, तो वह इस सवाल से बचते नजर आए. उन्होंने किसी का नाम लिए बिना कहा कि देश और प्रदेश में राहुल गांधी, मल्लिकार्जुन खरगे और कांग्रेस पार्टी की विचारधारा ही हमारा मुख्य चेहरा हैं, जिनके नेतृत्व में सभी नेता एकजुट होकर 2028 में राजस्थान और 2029 में दिल्ली में सरकार बनाएंगे.
सचिन पायलट के सामने चुनौतियां और विरोधियों में खलबली
राजनीतिक गलियारों में चर्चा तेज है कि अगर आलाकमान सचिन पायलट को राजस्थान की कमान सौंपता है, तो उनके विरोधी गुटों में खलबली मच सकती है. हालांकि, पायलट के लिए यह राह आसान नहीं होगी. अगर उनके सिर पर पीसीसी चीफ का ताज सजता है, तो सभी गुटों को एक साथ लेकर चलना, अंदरूनी टांग-खिंचाई को रोकना और पूरी पार्टी को एकजुट रखना उनके लिए सबसे बड़ी परीक्षा होगी.
फिलहाल आलाकमान के अंतिम फैसले का इंतजार है कि क्या वह डोटासरा पर ही भरोसा बनाए रखेंगे या फिर राजस्थान कांग्रेस की कमान पूरी तरह से सचिन पायलट को सौंप देंगे.
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