Jaipur: 1 दिन में 6 स्वैप किडनी ट्रांसप्लांट कर डॉक्टरों ने रचा इतिहास, रोगियों को दी नई जिन्दगी

Jaipur: जयपुर के महात्मा गांधी अस्पताल ने देश के चिकित्सा इतिहास में एक नया कीर्तिमान रचा गया है. जहां किडनी प्रत्यारोपण विशेषज्ञों ने हाल ही में एक दिन में 6 रोगियों में स्वैप किडनी प्रत्यारोपण कर इतिहास रच दिया. खास बात यह है कि इन सभी रोगियों को उसी ब्लड ग्रुप का मैचिंग डोनर नहीं […]

Rajasthan: 1 दिन में 6 स्वैप किडनी ट्रांसप्लांट कर जयपुर के डॉक्टरों ने रचा इतिहास, रोगियों को दी नई
Rajasthan: 1 दिन में 6 स्वैप किडनी ट्रांसप्लांट कर जयपुर के डॉक्टरों ने रचा इतिहास, रोगियों को दी नई

विशाल शर्मा

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Jaipur: जयपुर के महात्मा गांधी अस्पताल ने देश के चिकित्सा इतिहास में एक नया कीर्तिमान रचा गया है. जहां किडनी प्रत्यारोपण विशेषज्ञों ने हाल ही में एक दिन में 6 रोगियों में स्वैप किडनी प्रत्यारोपण कर इतिहास रच दिया. खास बात यह है कि इन सभी रोगियों को उसी ब्लड ग्रुप का मैचिंग डोनर नहीं मिल पा रहा था. ऐसे में किडनी प्रत्यारोपण नहीं हो पा रहा था लेकिन फिर भी एक अस्पताल में एक दिन में एक साथ छह स्वैप किडनी प्रत्यारोपण करने का बहुत ही कम उल्लेख मिला है.

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राजस्थान के जाने-माने गुर्दा रोग विशेषज्ञ व महात्मा गांधी अस्पताल में नेफ्रेलोजी हैड प्रो. डॉ. सूरज गोदारा ने बताया कि हाल ही में किए गए सभी ऑपरेशन विगत 8 मई 2023 को हुए. इसमें 4 सर्जन ने 4 ऑपरेशन थियेटर्स में, सुबह 8 बजे ऑपरेशन शुरू किये थे जो करीब 12 घण्टे चले व रात 8 बजे तक पूरे हो सके थे. गहन चिकित्सा इकाई में उन्हें संक्रमणमुक्त वातावरण में रखा गया और 10 दिन की रिकवरी के बाद छुट्टी दे दी गई. अभी किये गये फॉलो-अप में सभी रोगी जिनमें किडनी प्रत्यारोपित की गई और सभी डोनर्स पूरी तरह ठीक हैं. वहीं शीघ्र ही वे सामान्य दिनचर्या में लौट आये हैं.

स्वैप तकनीक से किडनी ट्रांसप्लांट

डॉ. सूरज गोदारा ने बताया कि यहां कैडेवर, लिविंग डोनर, एबीओ इंकॉम्पिटिबल और स्वैप तकनीक से किडनी ट्रांसप्लांट किए जा रहे हैं. जिसके तहत पहले मामले में बहरोड निवासी निशांत का ब्लड ग्रुप बी-पॉजीटिव था जबकि उसकी डोनर माता ललता देवी का ब्लड ग्रुप ओ-पॉजिटिव था. एंटीबॉडीज के कारण ट्रांसप्लांट में समस्या आ रही थी ऐसे में उन्हें स्वैप डोनर सरिता यादव की किडनी लगाई गई.

दूसरा केस

दूसरे मामले में श्रीगंगानगर निवासी किडनी रोगी रजनी शर्मा का ब्लड ग्रुप एबी-पॉजीटिव था जबकि उनके पति गौरी शंकर का ब्लड ग्रुप बी पॉजिटिव था. ऐसे में एंटीबॉडीज के कारण उनका किडनी ट्रांसप्लांट नहीं हो पा रहा था. स्वैप ट्रांसप्लांट के जरिये उन्हें मैचिंग स्वैप डोनर मुन्नी देवी की किडनी लगाई गई.

तीसरा केस

तीसरे मामले में रोगी उषा शाक्य जयपुर की रहने वाली थी उनका ब्लड ग्रुप बी पॉजिटिव था जबकि उनके डोनर रमेश चंद का ब्लड ग्रुप ए-पॉजिटिव था. ऐसे में अलग ब्लड ग्रुप के कारण उनका भी किडनी ट्रांसप्लांट नहीं हो पा रहा था. फिर उन्हें स्वैप डोनर ललता देवी मीना की किडनी लगाई गई.

चौथा केस

चौथे मामले में झुंझुनू निवासी प्रीति सोनी का ब्लड ग्रुप ए-पॉजिटिव था जबकि उनके डोनर उनकी माता मुन्नी देवी का ब्लड ग्रुप बी-पॉजिटिव था, उन्हें स्वैप डोनर रमेश चंद की किडनी प्रत्यारोपित की गई.

पांचवां केस

पांचवा केस भी कुछ ऐसा ही था जिसमें नागौर के डीडवाना निवासी महिपालसिंह का ब्लड ग्रुप बी पॉजिटिव था जबकि उनकी डोनर माता स्वरूप कंवर का ब्लड ग्रुप ए पॉजिटिव था. ऐसे में उन्हें स्वैप डोनर गौरीशंकर शर्मा की किडनी लगाई गई.

छठा केस

छठे मामले में मैनपुरी, यूपी के रहने वाले दिनेश यादव का ब्लड ग्रुप ए पॉजिटिव था जबकि उनकी डोनर पत्नी सरिता का ब्लड ग्रुप बी पॉजिटिव था और मैचिंग ब्लड ग्रुप नहीं होने की वजह से वे बहुत दिनों से मैचिंग डोनर का इंतजार कर रहे थे. ऐसे में स्वैप डोनेर स्वरूप कंवर की किडनी लगाई.

इस तरह किया जाता है उपचार

किडनी ट्रांसप्लांट यूनिट के निदेशक व विख्यात यूरोलोजिस्ट प्रो. डॉ. टी सी सदासुखी ने बताया कि डोनर किडनी देने को तैयार हो और ब्लड ग्रुप मैच नहीं हो तो यह बड़ी निराशाजनक स्थिति होती है. स्वैप किडनी डोनेशन के जरिये रोगियों को उपचारित किया जा रहा है. स्वैप किडनी ट्रांसप्लांट उसी स्थिति में हो सकता है जबकि कई रोगी और डोनर्स वेटिंग में हों. महात्मा गांधी अस्पताल में राज्य के सर्वाधिक किडनी प्रत्यारोपण किये गये है. अब यह संख्या 1600 से अधिक हो गई है.

इन बातों का रखें ख्याल

किडनी की बीमारी से बचने के लिए कुछ बातों पर जरूर ध्यान देना चाहिए जैसे स्वस्थ जीवनशैली को अपनाएं, नियमित रूप से व्यायाम करें, ब्लड शुगर और ब्लड प्रेशर को कंट्रोल में रखें, जंक फूड और ऑइली फूड से दूरी बनाएं, मोटापा कम करें और शराब व तंबाकू के सेवन से बचें. किडनी के गंभीर रोगियों के लिए किडनी प्रत्यारोपण अंतिम उपचार होता है.किडनी की बीमारियों के प्रति जन-जागरूकता बहुत जरूरी है.

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