राजस्थान की सियासत में इन दिनों सरकारी स्कूलों की शिक्षा व्यवस्था और शिक्षकों को लेकर बयानबाजी बेहद गर्म है. इस बार चर्चा के केंद्र में कोई और नहीं, बल्कि सूबे के शिक्षा मंत्री मदन दिलावर खुद हैं. कुछ दिनों पहले टोंक में एक कार्यक्रम के दौरान शिक्षा मंत्री ने सरकारी शिक्षकों को लेकर एक बेहद सख्त और विवादित बयान दिया था, जो अब उनके लिए ही गले की हड्डी बन गया है.
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मंत्री ने शिक्षकों को कहा था 'निकम्मा'
टोंक के कार्यक्रम में मदन दिलावर ने सरकारी शिक्षकों पर बरसते हुए कहा था कि जो शिक्षक सरकारी स्कूलों में पढ़ाते हैं, लेकिन अपने बच्चों को वहां न भेजकर प्राइवेट स्कूलों में पढ़ाते हैं, वे अपने ही सिस्टम पर भरोसा नहीं करते. मंत्री ने ऐसे शिक्षकों को 'निकम्मा' तक कह दिया था और आरोप लगाया था कि कुछ लोग सिर्फ फ्री की तनख्वाह उठा रहे हैं. उन्होंने खराब रिजल्ट वाले स्कूलों के टीचर्स पर कड़ी कार्रवाई की चेतावनी भी दी थी.
अब खुद के परिवार पर उठे सवाल
मंत्री जी का यह बयान अब उन्हीं के खिलाफ एक बड़ा हथियार बन गया है. शिक्षा विभाग के आधिकारिक रिकॉर्ड से सामने आई जानकारी के मुताबिक, मदन दिलावर के अपने परिवार के तीनों पोते किसी सरकारी स्कूल में नहीं बल्कि कोटा के नामचीन प्राइवेट स्कूलों में पढ़ रहे हैं.
रिकॉर्ड के अनुसार, मंत्री के बेटे दीपक दिलावर का बेटा वेदांत दिलावर कोटा के 'दिशा डेल्फी पब्लिक स्कूल' में 12वीं कक्षा का छात्र है. उनके दूसरे बेटे पवन दिलावर के दोनों बेटे (जयवर्धन दिलावर और सार्थक दिलावर) भी कोटा के निजी स्कूलों में ही शिक्षा ले रहे हैं.
जनता और विपक्ष ने पूछा- क्या नियम सबके लिए एक नहीं?
इस खुलासे के बाद विपक्ष और आम जनता शिक्षा मंत्री को सोशल मीडिया से लेकर हर तरफ घेर रही है. सवाल उठाया जा रहा है कि यदि सरकारी स्कूलों की शिक्षा इतनी ही अच्छी है और मंत्री को अपने विभाग पर पूरा भरोसा है, तो उनके खुद के बच्चे प्राइवेट स्कूलों में क्यों पढ़ रहे हैं? हालांकि, किसी भी परिवार को अपने बच्चे के लिए स्कूल चुनने का अधिकार है, लेकिन विवाद इस बात पर है कि जिम्मेदार पद पर बैठा व्यक्ति जब दूसरों को कटघरे में खड़ा करता है, तो क्या वह कसौटी उस पर खुद लागू नहीं होती?
इस पूरे मामले पर जब मदन दिलावर का पक्ष जानने के लिए उनसे संपर्क करने की कोशिश की गई, तो उनके निजी सहायक ने मंत्री के कार्यक्रमों में व्यस्त होने की बात कहकर बातचीत टाल दी. यह पहला मौका नहीं है जब मदन दिलावर अपने बयानों से विवादों में रहे हैं, इससे पहले भी वे शिक्षकों के पहनावे और आचरण को लेकर दिए बयानों से सुर्खियां बटोर चुके हैं.
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