गर्भवती महिलाओं की मौत और तबीयत बिगड़ने के मामलों पर चिकित्सा मंत्री की सफाई, कहा- 'लापरवाही नहीं, मेडिकल कारण जिम्मेदार'

राजस्थान के चिकित्सा मंत्री ने नागौर और डीडवाना में हुई प्रसूताओं की मौत के पीछे व्यवस्था की लापरवाही को नकारते हुए हार्ट अटैक और अत्यधिक उच्च रक्तचाप (220/180 BP) जैसे गंभीर मेडिकल कारणों को जिम्मेदार बताया है. इ

चिकित्सा मंत्री
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न्यूज तक डेस्क

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राजस्थान में प्रसूताओं (गर्भवती महिलाओं) की मौत और बिगड़ती तबीयत के मामलों को लेकर सियासत और चिंता दोनों गरमाई हुई हैं. इन गंभीर मामलों को लेकर प्रदेश के चिकित्सा मंत्री ने खुद सामने आकर स्थिति स्पष्ट की है. चिकित्सा मंत्री का कहना है कि इन घटनाओं के पीछे चिकित्सा व्यवस्था की कोई कोताही या डॉक्टरों की लापरवाही नहीं है, बल्कि हर मामले के पीछे अलग-अलग गंभीर मेडिकल वजहें रही हैं. चिकित्सा मंत्री ने बीकानेर, कोटा, जोधपुर और नागौर-डीडवाना से जुड़े मामलों को एक-दूसरे से अलग बताते हुए जनता से पैनिक न होने की अपील की है.

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नागौर और डीडवाना के मामलों पर दी विस्तृत जानकारी

चिकित्सा मंत्री ने नागौर और डीडवाना में हुई प्रसूताओं की मौत को लेकर पूरा ब्यौरा सामने रखा:

नागौर का मामला (रुक्मा देवी): मंत्री ने बताया कि रुक्मा देवी नाम की महिला को रात में डिलीवरी के लिए भर्ती कराया गया था. अगले दिन सुबह करीब 8:30 बजे उसकी सुरक्षित डिलीवरी हो गई. डिलीवरी के बाद वह बिल्कुल ठीक थी, उसने चाय-बिस्कुट भी खाया. लेकिन शाम को करीब 4 से 5 बजे के बीच अचानक उसके सीने में तेज दर्द (Chest Pain) शुरू हुआ. डॉक्टरों ने तुरंत जरूरी दवाइयां देकर उसे जोधपुर रेफर किया, लेकिन रास्ते में ही उसकी मौत हो गई. प्राथमिक तौर पर यह मामला हार्ट अटैक का लग रहा है और इसका डिलीवरी से सीधा संबंध नहीं था.

डीडवाना का मामला (मोनिका): इस मामले को लेकर मंत्री ने बताया कि मोनिका नाम की प्रसूता का ब्लड प्रेशर (BP) बेहद हाई रहता था. जब वह अस्पताल आई तो उसका बीपी 220/180 था, जो किसी भी इंसान के लिए जानलेवा साबित हो सकता है. डॉक्टर दवाइयां देकर उसके बीपी को स्थिर (Stabilize) करने की कोशिश कर रहे थे ताकि सुरक्षित डिलीवरी कराई जा सके, लेकिन डिलीवरी होने से पहले ही उसकी मौत हो गई.

जोधपुर में बीमार प्रसूताओं की स्थिति पर क्या बोले मंत्री?

जोधपुर के पावटा, एम्स और एमडीएम (MDM) अस्पतालों में प्रसूताओं की तबीयत बिगड़ने के मामले पर चिकित्सा मंत्री ने राहत भरी खबर दी है. उन्होंने बताया कि वह लगातार जोधपुर के मेडिकल कॉलेज प्रिंसिपल डॉ. भंवर सिंह जोधा से संपर्क में हैं.

  • सभी 6 प्रसूताएं स्थिर: पावटा अस्पताल में जिन 6 प्रसूताओं की तबीयत खराब हुई थी, वे सभी अब पूरी तरह स्टेबल (स्थिर) हैं और घबराने की कोई बात नहीं है.
  • एम्स में शिफ्ट महिला सुरक्षित: एम्स में भर्ती कराई गई प्रसूता पहले से 'हाईली डायबिटिक' (co-morbid) थी, लेकिन उसकी स्थिति भी अब नियंत्रण में है.
  • पीलिया से पीड़ित महिला की स्थिति: एमडीएम अस्पताल की एक प्रसूता को पीलिया (Jaundice) की शिकायत थी. सुरक्षा के लिहाज से उसे भी एम्स शिफ्ट किया गया था, वह भी अब पूरी तरह ठीक है.

चिकित्सा मंत्री ने साफ तौर पर कहा कि जोधपुर या प्रदेश के किसी भी अस्पताल में डॉक्टरों की तरफ से कोई लापरवाही या ढिलाई नहीं बरती गई है. सभी मरीजों का पूरा ख्याल रखा जा रहा है.

 

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