राजस्थान के जोधपुर स्थित हाईकोर्ट से जुड़ा एक बेहद चौंकाने वाला मामला सामने आया है, जिसने पूरे न्यायिक महकमे और प्रशासनिक व्यवस्था को हिलाकर रख दिया है. श्रीगंगानगर जिले के रजियासर थाने में दर्ज एनडीपीएस एक्ट (अफीम तस्करी) के एक मामले में जेल में बंद आरोपी को जेल से बाहर निकालने के लिए हाईकोर्ट की आधिकारिक वेबसाइट पर कथित तौर पर फर्जी जमानत आदेश अपलोड कर दिए गए. मामला तब खुला जब जांच के दौरान पता चला कि जिस न्यायाधीश और केस नंबर का हवाला दिया गया है, उस नाम से कोई आदेश अदालत द्वारा जारी ही नहीं किया गया था.
ADVERTISEMENT
पूरा मामला और आरोपी की पृष्ठभूमि
पुलिस और कोर्ट से मिली जानकारी के अनुसार, पंजाब के मोगा सिटी का रहने वाला कुलविंदर सिंह पनेसर नामक शख्स श्रीगंगानगर के रजियासर थाना क्षेत्र में 8 किलो 61 ग्राम अफीम के साथ पकड़ा गया था. एनडीपीएस एक्ट के तहत गिरफ्तारी के बाद वह जेल में बंद था. इसी दौरान, 26 अक्टूबर को राजस्थान हाईकोर्ट की आधिकारिक वेबसाइट पर उसकी जमानत का एक आदेश अपलोड हुआ. पहली नजर में यह दस्तावेज बिल्कुल असली लग रहा था, लेकिन जब इसकी गहराई से पड़ताल की गई तो कई गंभीर गड़बड़ियां सामने आईं:
जज का नाम और बेंच: जिस न्यायाधीश के नाम से आदेश जारी दिखाया गया, वे उस तय तारीख पर किसी अन्य खंडपीठ में सुनवाई कर रहे थे और उन्होंने ऐसा कोई आदेश नहीं दिया था.
याचिका संख्या में गड़बड़ी: आदेश में जिस याचिका संख्या (Case Number) का जिक्र किया गया था, वह हाईकोर्ट के रिकॉर्ड में उस समय जमानत याचिका के रूप में मौजूद ही नहीं थी.
एक नहीं बल्कि तीन फर्जी आदेश अपलोड होने का खुलासा
जब इस फर्जीवाड़े की सुगबुगाहट शुरू हुई, तो मामला तुरंत मुख्य न्यायाधीश के संज्ञान में लाया गया और वेबसाइट से उन कथित आदेशों को हटाने की प्रक्रिया शुरू की गई. इसके बाद हाईकोर्ट के रजिस्ट्रार (न्यायिक) की ओर से जोधपुर के कुड़ी भगतासनी थाने में औपचारिक शिकायत दर्ज कराई गई. पुलिस कमिश्नर अंशुमन भोमिया ने इस बात का खुलासा किया कि शुरुआती जांच में केवल एक नहीं, बल्कि 12, 15 और 26 अक्टूबर को अलग-अलग तारीखों पर कुल तीन फर्जी आदेश वेबसाइट पर अपलोड किए जाने की बात सामने आई है. फिलहाल इस मामले की गहन जांच विवेक विहार थाने के अधिकारी को सौंपी गई है.
वेबसाइट में सेंधमारी या तकनीकी खामी?
इस पूरे घटनाक्रम के बाद सबसे बड़ा सवाल यह उठ रहा है कि आखिर हाईकोर्ट जैसी देश की सुरक्षित न्यायिक वेबसाइट पर कोई बाहरी या भीतरी शख्स फर्जी आदेश कैसे अपलोड कर सकता है? क्या इसके पीछे किसी की लॉगिन आईडी का गलत इस्तेमाल हुआ, सर्वर में सेंध लगाई गई या फिर किसी कर्मचारी की मिलीभगत है? सूत्रों के अनुसार, इस फर्जी आदेश का इस्तेमाल करके आरोपी कुलविंदर सिंह संभवतः सूरतगढ़ जेल से रिहा होकर बाहर भी आ चुका है, और पुलिस अब इस बात की भी जांच कर रही है कि क्या वह देश छोड़कर बाहर जा चुका है. पुलिस और साइबर सेल यह पता लगाने में जुटी है कि इस गंभीर षड्यंत्र के पीछे कौन-कौन लोग शामिल हैं.
ADVERTISEMENT


