Rajasthan Local Body Election BJP Incharge Harish Dwivedi: राजस्थान में स्थानीय निकाय चुनाव (नगर निगम, नगर परिषद और नगरपालिका) का काउंटडाउन शुरू हो चुका है. राज्य में चुनावी कार्यक्रम के औपचारिक ऐलान से ठीक पहले भारतीय जनता पार्टी (बीजेपी) ने अपनी चुनावी टीम मैदान में उतार दी है. पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष की मंजूरी के बाद बीजेपी ने पूर्व सांसद हरीश द्विवेदी को राजस्थान निकाय चुनाव का प्रदेश प्रभारी नियुक्त किया है. इसके साथ ही कई वरिष्ठ नेताओं को सह-प्रभारी की अहम जिम्मेदारी सौंपी गई है.
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दिग्गजों से सजी बीजेपी की सह-प्रभारी टीम
बीजेपी ने निकाय चुनाव के लिए सिर्फ एक नेता के भरोसे रहने के बजाय अलग-अलग राज्यों और संगठनात्मक अनुभव वाले नेताओं की एक पूरी फौज तैनात की है. हरीश द्विवेदी के साथ महाराष्ट्र सरकार के मंत्री चंद्रशेखर बावनकुले को सह-प्रभारी बनाया गया है. इनके अलावा सांसद गजेंद्र सिंह पटेल, सांसद संगीता यादव, रोहन गुप्ता और दिल्ली सरकार के मंत्री रविंद्र इंद्राज सिंह को भी सह-प्रभारी की जिम्मेदारी दी गई है. यह टीम वार्ड स्तर पर चुनावी रणनीति, उम्मीदवार चयन और बूथ प्रबंधन का काम देखेगी.
कौन हैं हरीश द्विवेदी?
हरीश द्विवेदी का जन्म यूपी के बस्ती में हुआ. उनके पिता साधुशरण दुबे शिक्षक रहे हैं. हरीश द्विवेदी ने 1991 में अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद (ABVP) से अपने राजनीतिक सफर की शुरुआत की और संगठन में जिला प्रमुख से लेकर विभागीय संगठन मंत्री तक कई जिम्मेदारियां संभालीं. 2004 में वह बीजेपी से जुड़े और 2005 से 2007 तक तत्कालीन प्रदेश अध्यक्ष केशरीनाथ त्रिपाठी के राजनीतिक सलाहकार रहे. इसके बाद उन्होंने भाजयुमो में प्रदेश महामंत्री, प्रदेश उपाध्यक्ष और 2010 से 2013 तक प्रदेश अध्यक्ष की जिम्मेदारी संभाली. 2012 में बस्ती सदर विधानसभा सीट से चुनाव लड़ा, लेकिन हार गए. इसके बाद 2014 में बीजेपी ने उन्हें बस्ती लोकसभा सीट से मैदान में उतारा, जहां उन्होंने जीत दर्ज की और 2019 में भी अपनी सीट बरकरार रखी.
जानें निकाय और पंचायत चुनाव की संभावित टाइमलाइन
राजस्थान में निकाय चुनाव को लेकर तैयार की गई प्रस्तावित टाइमलाइन के मुताबिक:
17 अगस्त: निकाय चुनाव का विस्तृत विस्तृत कार्यक्रम/अधिसूचना जारी होने की संभावना.
22 अगस्त: नामांकन दाखिल करने की प्रक्रिया शुरू होगी.
20 सितंबर: नगर निकाय चुनाव की पूरी प्रक्रिया संपन्न करने का लक्ष्य.
23 सितंबर से 15 नवंबर: निकाय चुनाव समाप्त होने के तुरंत बाद 23 सितंबर से पंचायत चुनाव की प्रक्रिया शुरू होगी, जिसे 15 नवंबर तक पूरा करने का लक्ष्य रखा गया है.
बीजेपी को क्यों पड़ी इतनी बड़ी टीम की जरूरत?
स्थानीय निकाय चुनाव का समीकरण लोकसभा और विधानसभा चुनाव से बिल्कुल अलग होता है. यहां बड़े राष्ट्रीय मुद्दों के बजाय स्थानीय समस्याएं जैसे सड़क, सीवर, सफाई, पानी और वार्ड स्तर पर उम्मीदवार की व्यक्तिगत पकड़ सबसे ज्यादा मायने रखती है. इसके साथ ही निकाय चुनावों में टिकट न मिलने पर असंतोष और बगावत का खतरा सबसे अधिक होता है. बीजेपी की यह भारी-भरकम टीम असंतोष को थामने, मजबूत चेहरों को साधने और वार्ड स्तर पर पार्टी के कैडर को एकजुट रखने के लिए काम करेगी.
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