'CM से नहीं, किरोड़ी बाबा से है आस', राजस्थान में 4000 कर्मचारियों ने खोला मोर्चा, जानें क्या है मांग

शरत कुमार

• 11:26 AM • 03 Jul 2026

राजस्थान के ग्रामीण विकास और मनरेगा विभाग में करीब 4,000 संविदा कर्मचारी पिछले 18-20 सालों से पक्की नौकरी के लिए तरस रहे हैं. विधानसभा में घोषणा और डॉक्यूमेंट वेरिफिकेशन होने के बाद भी अधिकारी फाइलें अटका रहे हैं.

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'CM से नहीं, किरोड़ी बाबा से आखिरी उम्मीद', राजस्थान में 4000 ग्रामीण विकास कर्मचारियों की हुंकार

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Rajasthan: राजस्थान में मनरेगा और ग्रामीण विकास विभाग में काम करने वाले करीब 4,000 संविदा कर्मचारी पिछले 18-19 सालों से नियमित होने की आस में संघर्ष कर रहे हैं. विधानसभा में सरकार द्वारा घोषणा किए जाने के बावजूद, नौकरशाही की लेत-लतीफी से परेशान ये कर्मचारी अब ग्रामीण विकास मंत्री डॉ. किरोड़ी लाल मीणा के द्वार पहुंचे हैं. कर्मचारियों का कहना है कि उन्हें अब सूबे के मुखिया से ज्यादा 'किरोड़ी बाबा' पर भरोसा है कि वे उनका सपना पूरा करेंगे.

18-20 साल की नौकरी, पर सैलरी के नाम पर 'मजाक'

विभाग में काम कर रहे कनिष्ठ तकनीकी सहायक (JTA), लेखा सहायक, डेटा एंट्री ऑपरेटर और ग्राम रोजगार सहायक (GRS) के पदों पर बैठे कर्मचारियों की पीड़ा बेहद गहरी है. कर्मचारियों ने बताया कि 19-20 साल की सर्विस के बाद भी उन्हें महज 12,000 से 16,900 रुपये प्रति माह का अल्प मानदेय मिल रहा है. वहीं, उनके समकक्ष काम करने वाले परमानेंट एलडीसी (LDC) और अन्य कर्मचारियों को 40,000 से 45,000 रुपये तक वेतन मिल रहा है. महंगाई के इस दौर में इतनी कम सैलरी में परिवार चलाना और बच्चों का भविष्य संवारना नामुमकिन हो गया है.

नौकरशाही पर फाइलें अटकाने का आरोप

कर्मचारियों के अनुसार, मार्च में सरकार और खुद मंत्री डॉ. किरोड़ी लाल मीणा ने विधानसभा में इनके नियमितीकरण (CSR रूल्स के तहत) की घोषणा की थी. इसके बाद दस्तावेजों का सत्यापन (डीवी) भी हो चुका है और फाइलें जयपुर सचिवालय पहुंच चुकी हैं. लेकिन अधिकारी वर्ग इस फाइल को आगे बढ़ाने की बजाय टालमटोल कर रहा है. कर्मचारियों का दर्द है कि साल 2013 में भी बोनस अंक देकर भर्ती निकाली गई थी, लेकिन आखिरी वक्त पर मेरिट लिस्ट जारी करने से ठीक पहले उसे विड्रॉ (वापस) कर लिया गया था.

न सम्मान, न जॉब सिक्योरिटी

प्रदर्शन कर रहे कर्मचारियों, जिनमें बड़ी संख्या में महिलाएं भी शामिल हैं, ने कहा कि संविदा की नौकरी के कारण दफ्तरों में उनके साथ हीन भावना से व्यवहार किया जाता है. काम की जिम्मेदारी पूरी होने के बावजूद कोई जॉब सिक्योरिटी नहीं है. फील्ड में काम करते वक्त कई कर्मचारियों की हादसों में मौत हो गई, लेकिन उनके परिवारों को कोई मदद या अनुकंपा नियुक्ति नहीं मिली. कर्मचारियों ने भावुक होते हुए कहा, "हम अब बुढ़ापे की ओर बढ़ रहे हैं. सरकार 'बेटी बचाओ, बेटी पढ़ाओ' का नारा देती है, पर दो-दो दशक काम करने वाली बेटियों को आज तक हक और सम्मान नहीं मिला."

किरोड़ी बाबा के दरबार से जगी आखिरी उम्मीद

लगातार मिल रहे आश्वासनों से थक चुके इन कर्मचारियों को अब सिर्फ किरोड़ी लाल मीणा से उम्मीद है. कर्मचारियों ने खाटू श्याम जी का उदाहरण देते हुए कहा, "जैसे श्याम बाबा के दरबार से कोई खाली हाथ नहीं लौटता, वैसे ही किरोड़ी बाबा के बंगले से भी कोई निराश नहीं जाएगा. समय लग सकता है, लेकिन बाबा हमारा नियमितीकरण जरूर करवाएंगे." फिलहाल, आदेश जारी होने के इंतजार में सचिवालय और मंत्री आवास के चक्कर काट रहे ये कर्मचारी आर-पार के मूड में हैं.