Rajasthan Police Harassment Case:राजस्थान के पाली जिले से एक रूह कपा देने वाली घटना सामने आई है, जहां पुलिस की कथित प्रताड़ना और झूठे मामले में फंसाने की धमकी ने एक हंसते-खेलते परिवार को तबाह कर दिया. चेन्नई में हुई एक चोरी के मामले में पूछताछ के नाम पर मानसिक रूप से प्रताड़ित किए जाने के बाद दो सगे भाइयों ने जहर खा लिया. इस दर्दनाक कांड में बड़े भाई की मौके पर ही मौत हो गई, जबकि छोटा भाई अपने भाई का आखिरी वॉइस मैसेज सुनकर सदमे में आ गया और उसने भी मौत को गले लगाने की कोशिश की. वर्तमान में वह जोधपुर के एम्स अस्पताल में वेंटिलेटर पर अपनी जिंदगी की जंग लड़ रहा है.
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चेन्नई चोरी कांड और पूछताछ का सिलसिला
इस पूरे मामले की जड़ चेन्नई में एक जैन व्यवसायी की दुकान में हुई चोरी से जुड़ी है. पुलिस को शक था कि चोरी करने वाले आरोपी पाली जिले के बगड़ी इलाके के हैं. जांच के दौरान पुलिस ने वर्धाराम उर्फ विनोद गुर्जर और उसके भाई बुद्धाराम गुर्जर के कुछ बैंक ट्रांजैक्शन देखे, जिसके आधार पर उन्हें पूछताछ के लिए बार-बार बुलाया जाने लगा. दोनों भाइयों का दावा था कि वे अपनी सोने-चांदी की दुकान चलाते हैं और उनके ट्रांजैक्शन का चोरी से कोई लेना-देना नहीं है. परिजनों का आरोप है कि चेन्नई पुलिस और स्थानीय बगड़ी थाना पुलिस ने मिलकर उन्हें इतना टॉर्चर किया कि वे मानसिक रूप से पूरी तरह टूट गए.
'1 किलो सोना' और जेल भेजने की धमकी
परिजनों और चश्मदीदों के अनुसार, वर्धाराम को लगातार धमकियां मिल रही थीं. आरोप है कि महावीर मेहता और निखिल सोनी नाम के व्यक्ति पुलिस के साथ मिलकर दबाव बना रहे थे. वर्धाराम को कथित तौर पर कहा गया कि, 'चेन्नई से जो 1 किलो सोना चोरी हुआ है, वह हमें दे दो, वरना तुम्हें जेल की सलाखों के पीछे डाल देंगे.' वर्धाराम ने समाज और परिवार की दुहाई दी, अपने बच्चों की कसम खाई कि वह निर्दोष है, लेकिन उसकी एक न सुनी गई. बुधवार की सुबह सोजत मोड़ के पास उसे फिर बुलाया गया और इसी तरह की धमकी दी गई, जिससे आहत होकर उसने जहर खा लिया.
सुसाइड से पहले वॉइस नोट और छोटे भाई का कदम
मरने से ठीक पहले वर्धाराम ने अपने छोटे भाई बुद्धाराम को एक वॉइस मैसेज भेजा. इस संदेश में उसने अपनी बेगुनाही का सबूत देते हुए बताया कि कैसे उसे बदनाम किया जा रहा है और प्रताड़ित किया जा रहा है. वॉइस नोट भेजने के कुछ ही देर बाद उसकी मृत्यु हो गई. जब छोटे भाई बुद्धाराम ने यह मैसेज सुना, तो वह भाई की मौत और पुलिस के खौफ से इतना डर गया कि उसने भी जहर पी लिया. एक भाई की लाश घर पहुंची और दूसरा अस्पताल के आईसीयू में भर्ती हो गया, जिससे पूरे इलाके में मातम पसर गया है.
न्याय की मांग और परिजनों का आक्रोश
इस घटना के बाद गुर्जर समाज और स्थानीय लोगों में गहरा गुस्सा है. समाज के नेता पारस गुर्जर के नेतृत्व में 36 कौम के लोग जोधपुर एम्स के बाहर धरने पर बैठ गए हैं. उनका कहना है कि यह आत्महत्या नहीं बल्कि मानसिक प्रताड़ना के जरिए की गई हत्या है. प्रदर्शनकारियों की मांग है कि दोषी पुलिसकर्मियों और धमकी देने वाले लोगों के खिलाफ हत्या का मुकदमा दर्ज कर उन्हें तुरंत गिरफ्तार किया जाए.परिजनों का कहना है कि जब तक न्याय नहीं मिलेगा और दोषियों पर कड़ी कार्रवाई नहीं होगी, वे पीछे नहीं हटेंगे.
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