Rajasthan Panchayat Election 2026: राजस्थान में फिर टले पंचायत और निकाय चुनाव; सितंबर तक नहीं होगी वोटिंग, जानें क्या है असली वजह

Rajasthan Panchayat Election 2026: राजस्थान में पंचायत और निकाय चुनाव एक बार फिर टल गए हैं. OBC आरक्षण और ट्रिपल टेस्ट नियम के कारण अब सितंबर 2026 तक वोटिंग संभव नहीं दिख रही. जानिए आखिर क्यों अटका चुनाव, क्या हैं डेटा की खामियां और कब हो सकते हैं चुनाव.

Rajasthan Panchayat Election 2026
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आंचल गुप्ता

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राजस्थान में पंचायती राज और शहरी निकाय चुनावों का इंतजार कर रहे लोगों के लिए एक बड़ी अपडेट सामने आई है. ताजा घटनाक्रम से यह साफ हो गया है कि प्रदेश में अब सितंबर 2026 तक चुनाव होने की संभावना लगभग खत्म हो गई है. राज्य सरकार ने ओबीसी (OBC) राजनीतिक प्रतिनिधित्व आयोग का कार्यकाल बढ़ाकर 30 सितंबर कर दिया है, जिससे अब चुनाव अक्टूबर तक टलते नजर आ रहे हैं.

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क्यों टल रहे हैं चुनाव?

चुनाव टलने की मुख्य वजह ओबीसी आरक्षण का निर्धारण है. जब तक आयोग अपनी अंतिम रिपोर्ट नहीं सौंपता, तब तक सीटों का आरक्षण तय नहीं किया जा सकता. जिलों से आए डेटा में कई गंभीर खामियां पाई गई हैं:

डेटा में गड़बड़ी: कई पंचायतों में जनसंख्या के आंकड़े अधूरे या गलत मिले हैं.

चौंकाने वाला आंकड़ा: करीब 400 गांव ऐसे मिले हैं जहां सरकारी रिकॉर्ड के अनुसार ओबीसी की आबादी 'शून्य' दिखाई गई है.

सुप्रीम कोर्ट का नियम: सुप्रीम कोर्ट के 'ट्रिपल टेस्ट' नियम के तहत ओबीसी का सही सर्वे होना अनिवार्य है. बिना सटीक डेटा के चुनाव कराने पर पूरा मामला कानूनी विवाद में फंस सकता है.

विपक्ष का हमला: 'हार का डर या बहाना?'

चुनाव टलने के फैसले पर राजस्थान की सियासत गरमा गई है. विपक्ष का सीधा आरोप है कि सरकार को चुनाव में हार का डर सता रहा है, इसलिए ओबीसी रिपोर्ट को 'ढाल' बनाकर जानबूझकर देरी की जा रही है. विपक्ष का कहना है कि सरकार लोकतंत्र की सबसे छोटी इकाई के चुनाव कराने से भाग रही है.

अब आगे क्या?

पहले यह उम्मीद जताई जा रही थी कि आयोग 31 मार्च तक अपनी रिपोर्ट सौंप देगा, लेकिन डेटा अधूरा होने के कारण सर्वे दोबारा कराना पड़ रहा है. अब सबकी नजरें 30 सितंबर पर टिकी हैं. यदि आयोग इस समय सीमा के भीतर रिपोर्ट दे देता है, तो अक्टूबर के अंत या नवंबर में मतदान की प्रक्रिया शुरू हो सकती है. राजस्थान में गांव से लेकर शहर तक की स्थानीय सरकारें फिलहाल अधर में हैं और जनता को अपने प्रतिनिधियों को चुनने के लिए अभी और इंतजार करना होगा.

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