राजस्थान में अटके हुए पंचायत और स्थानीय निकाय चुनाव को लेकर प्रशासनिक गलियारों में अचानक हलचल तेज हो गई है. राजस्थान हाई कोर्ट की कड़ी फटकार के बाद राज्य निर्वाचन आयोग और सरकारी महकमे पूरी तरह एक्टिव मोड में आ गए हैं. बीते 17 जुलाई को राज्य निर्वाचन आयोग, पंचायती राज विभाग, स्वायत्त शासन विभाग (DLB) और ओबीसी आयोग के बड़े अधिकारियों के बीच मैराथन बैठकें हुईं. हाई कोर्ट के आदेश का पालन करने के लिए जहां निर्वाचन आयोग ने चुनावी खाका खींचना शुरू कर दिया है, वहीं कानूनी पेचीदगियों को सुलझाने के लिए भी मंथन जारी है.
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6 चरणों में चुनाव कराने की तैयारी, मध्य प्रदेश से मांगी EVM
प्रदेश में बड़े स्तर पर चुनाव कराना निर्वाचन आयोग के लिए एक बड़ी चुनौती है. आंकड़ों के मुताबिक, पंचायत चुनाव संपन्न कराने के लिए करीब 6 लाख कर्मचारियों की जरूरत होगी, जिसमें 3.20 लाख मतदान कर्मी और 2.80 लाख सुरक्षाकर्मी शामिल हैं. वहीं, शहरी निकाय चुनावों के लिए भी करीब 2.40 लाख कर्मचारियों की आवश्यकता पड़ेगी.
इतनी बड़ी संख्या में फोर्स और स्टाफ एक साथ तैनात करना मुमकिन नहीं है, इसलिए निर्वाचन आयोग पंचायत चुनाव को चार चरणों में और निकाय चुनाव को दो चरणों में कराने की रणनीति पर विचार कर रहा है. इसके अलावा, राज्य में वोटिंग मशीनों की कमी को दूर करने के लिए मध्य प्रदेश सरकार से अतिरिक्त ईवीएम (EVM) मांगने के लिए पत्राचार भी शुरू कर दिया गया है.
25 लाख परिवारों का सर्वे पूरा, लेकिन 'राजधरा ऐप' बना सिरदर्द
हाई कोर्ट के निर्देशानुसार, राज्य में ओबीसी (OBC) वर्ग के राजनीतिक प्रतिनिधित्व को तय करने के लिए सर्वे का काम युद्ध स्तर पर चल रहा है. अब तक लगभग 25 लाख ओबीसी परिवारों का डेटा जुटाया जा चुका है. हालांकि, ग्रामीण और दूरदराज के इलाकों में सरकारी 'राजधरा ऐप' में तकनीकी खराबी आने और सर्वर डाउन होने से काम की रफ्तार धीमी पड़ गई है, जिसने अधिकारियों की थोड़ी चिंता बढ़ी है.
आयोग और सरकार के बीच फंसा पेंच, 90 दिनों में चुनाव कराने का दावा
इस पूरे मामले में राज्य निर्वाचन आयोग और सरकार के बीच की खींचतान भी सामने आई है. राज्य निर्वाचन आयुक्त राजेश्वर सिंह ने हाई कोर्ट में आयोग का रुख साफ करते हुए कहा कि जब तक सरकार एससी, एसटी, ओबीसी और महिलाओं के लिए आरक्षण की स्थिति स्पष्ट नहीं करती, तब तक चुनाव कराना तकनीकी रूप से संभव नहीं है. सीटों की लॉटरी निकालना और यह डेटा देना पूरी तरह सरकार की जिम्मेदारी है.
आयोग इस संबंध में सरकार को अब तक 6 बार पत्र लिख चुका है, लेकिन सरकार हर बार ओबीसी डेटा तैयार न होने की बात कहती रही है. निर्वाचन आयुक्त ने कोर्ट को भरोसा दिलाया है कि जैसे ही सरकार उन्हें आरक्षण की फाइनल लिस्ट सौंपेगी, आयोग महज 2 दिनों के भीतर चुनाव की तारीखों का ऐलान कर देगा और अगले 90 दिनों में पूरी चुनावी प्रक्रिया को संपन्न करा लिया जाएगा.
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