राजस्थान में चतुर्थ श्रेणी (चपरासी) भर्ती परीक्षा को लेकर अभ्यर्थियों का गुस्सा फूट पड़ा है. जयपुर के शहीद स्मारक पर बड़ी संख्या में युवा अपनी मांगों को लेकर धरने पर बैठे हैं. अभ्यर्थियों की मुख्य मांग है कि भर्ती में 1 साल का 'वेटिंग लिस्ट' नियम लागू किया जाए ताकि पद खाली रहने पर प्रतिक्षा सूची में शामिल युवाओं को आसानी से नौकरी मिल सके.
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क्या है पूरा मामला?
राजस्थान सरकार द्वारा आयोजित करीब 54,000 पदों की इस चतुर्थ श्रेणी भर्ती में बड़ी संख्या में उच्च शिक्षित अभ्यर्थियों (MA, MBA, PhD) ने भी भाग लिया था. चयन के बाद इनमें से कई अभ्यर्थी दूसरी बेहतर नौकरियां मिलते ही चपरासी के पद छोड़ देते हैं. इससे हजारों पद खाली रह जाते हैं. प्रदर्शनकारी युवाओं का कहना है कि अगर सरकार 1 साल का वेटिंग लिस्ट नियम लागू करती है, तो करीब 20 से 25 हजार उन अभ्यर्थियों का भला हो जाएगा जो कुछ ही अंकों से फाइनल लिस्ट में पिछड़ गए हैं.
अभ्यर्थियों का दर्द और परेशानी
धरने पर बैठे युवाओं ने बताया कि वे लंबे समय से मंत्रियों और अधिकारियों के चक्कर काट रहे हैं. कई अभ्यर्थियों की उम्र सीमा (40 वर्ष) अंतिम पड़ाव पर है. यदि यह नियम लागू नहीं होता, तो वे हमेशा के लिए सरकारी नौकरी की दौड़ से बाहर हो जाएंगे. इस प्रदर्शन में दिव्यांग अभ्यर्थी भी अपनी मांगों को लेकर शामिल हैं.
प्रशासन और बोर्ड का रुख
मामले पर राजस्थान कर्मचारी चयन बोर्ड (RSMSSB) के अध्यक्ष आलोक राज ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म 'X' पर जानकारी दी कि बोर्ड ने नियम लागू करने का प्रयास किया था, लेकिन कुछ तकनीकी अड़चनों के कारण बात नहीं बन पाई. वहीं, प्रदेश सरकार के मंत्रियों का कहना है कि अभ्यर्थियों की मांग का परीक्षण कराया जा रहा है और नियमानुसार उचित कदम उठाए जाएंगे.
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