राजस्थान की राजनीति में भूचाल, साढ़ू का रिश्ता खत्म, अब आमने-सामने डोटासरा और किरोड़ी लाल मीणा, पैर छूने वाले दावे पर मचा बवाल

राजस्थान में कभी एक-दूसरे को 'साढ़ू' कहने वाले नेता गोविंद सिंह डोटासरा और किरोड़ी लाल मीणा के बीच अब सियासी दुश्मनी चरम पर है. डोटासरा के परिवार पर लगे भर्ती घोटाले के आरोपों के बाद, उन्होंने दावा किया है कि किरोड़ी लाल मीणा पूर्व सीएम अशोक गहलोत के पैरों में गिरकर अपने मुकदमे हटवाने की गुहार लगा रहे थे.

डोटासरा
डोटासरा

न्यूज तक डेस्क

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राजस्थान की राजनीति में एक समय ऐसा था जब विधानसभा के भीतर कांग्रेस प्रदेश अध्यक्ष गोविंद सिंह डोटासरा और भाजपा के दिग्गज नेता व कैबिनेट मंत्री किरोड़ी लाल मीणा एक-दूसरे को 'साढ़ू' (साढ़ू भाई) कहकर ठहाके लगाते थे. लेकिन आज वक्त का पहिया ऐसा घूमा है कि दोनों नेताओं के बीच का यह दोस्ताना रिश्ता पूरी तरह से खत्म हो चुका है और उसकी जगह खुलकर राजनीतिक दुश्मनी ने ले ली है. भर्ती घोटालों और भ्रष्टाचार के आरोपों से शुरू हुई यह जंग अब बेहद व्यक्तिगत और तीखी हो चुकी है.

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किरोड़ी लाल मीणा के आरोपों से भड़के डोटासरा

विवाद की शुरुआत तब हुई जब किरोड़ी लाल मीणा ने मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा को एक पत्र लिखा. इस पत्र में उन्होंने गोविंद सिंह डोटासरा के परिवार, आरएएस (RAS) भर्ती और ओबीसी प्रमाण पत्र से जुड़े मामलों पर गंभीर सवाल उठाते हुए निष्पक्ष जांच और एफआईआर (FIR) दर्ज करने की मांग की. किरोड़ी लाल मीणा का आरोप है कि पिछली कांग्रेस सरकार के दौरान भर्ती प्रक्रियाओं में बड़ी गड़बड़ियां हुईं, जिसके दम पर डोटासरा के परिवार के लोग प्रशासनिक पदों तक पहुंचे.

डोटासरा का पलटवार

किरोड़ी लाल मीणा के इन आरोपों पर कांग्रेस अध्यक्ष गोविंद सिंह डोटासरा ने जयपुर में एक प्रेस कॉन्फ्रेंस कर जोरदार पलटवार किया. डोटासरा ने इस राजनीतिक लड़ाई को व्यक्तिगत मोड़ देते हुए एक बड़ा दावा कर दिया, जिसने राजस्थान के सियासी गलियारों में भूचाल ला दिया है.

डोटासरा ने दावा किया कि पिछली कांग्रेस सरकार के दौरान किरोड़ी लाल मीणा अपने खिलाफ दर्ज मुकदमों को हटवाने के लिए तत्कालीन मुख्यमंत्री अशोक गहलोत के पैरों में गिरकर रोने लगे थे. डोटासरा ने कहा, "मैं सार्वजनिक रूप से कह रहा हूं, किरोड़ी जी ने मुझे बाहर बैठने को कहा था क्योंकि उन्हें सीएम से अकेले में बात करनी थी. जब अशोक गहलोत जी बाहर आए, तो उन्होंने मुझसे कहा कि इसे क्यों लाए थे? यह तो पैरों में बैठकर कह रहा था कि मेरे ऊपर से मुकदमे हटा लीजिए." डोटासरा ने आगे तंज कसते हुए कहा कि जो आदमी खुद मुकदमों से बचने के लिए पैरों में पड़ता था, वह आज हम पर उंगली उठा रहा है, उन्हें शर्म आनी चाहिए.

डोटासरा कच्चा घोड़ा नहीं है

डोटासरा यहीं नहीं रुके, उन्होंने भाजपा सरकार और किरोड़ी लाल मीणा को चुनौती देते हुए कहा, "किसी को इतना मत छेड़ो कि तुम्हारा बुढ़ापा खराब हो जाए. विधानसभा में भी मैंने कहा था कि गोविंद डोटासरा कोई कच्चा घोड़ा नहीं है जिसे तुम खा जाओगे. मैं उस खानदान और उस पार्टी से आता हूं जहां राहुल गांधी का नारा है- डरो मत." उन्होंने किरोड़ी लाल मीणा को थोड़ी भी नैतिकता होने पर सरकार से इस्तीफा देने की चुनौती दी. डोटासरा ने साफ किया कि जिन मामलों की बात की जा रही है, उनकी जांच पहले भी हो चुकी है और कोर्ट के फैसले आ चुके हैं.

झूठी कहानियां गढ़ने से पाप नहीं धुलेंगे

डोटासरा के इस बड़े और व्यक्तिगत हमले पर 'बाबा' के नाम से मशहूर किरोड़ी लाल मीणा ने भी उतनी ही आक्रामकता से पलटवार किया है. उन्होंने डोटासरा के दावों को पूरी तरह मनगढ़ंत और झूठी कहानी करार दिया. किरोड़ी लाल मीणा ने कहा कि ऐसी मनगढ़ंत कहानियां बनाने से कांग्रेस और डोटासरा के पिछले 5 साल के पाप नहीं धुलने वाले हैं. उन्होंने एक बार फिर युवाओं के भविष्य, पेपर लीक और कथित भ्रष्टाचार का मुद्दा उठाते हुए पूछा कि डोटासरा के परिवार के लोग बिना किसी गड़बड़ी के इतने बड़े प्रशासनिक पदों पर कैसे पहुंच गए?

कल तक विधानसभा में साथ हंसने वाले इन दो दिग्गज नेताओं की आपसी नफरत और तीखे बयानों ने राजस्थान की सियासत का तापमान चरम पर पहुंचा दिया है. अब देखना यह होगा कि दोनों दिग्गजों की यह सियासी जंग आगे क्या मोड़ लेती है.


 

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