राजस्थान की राजनीति में सुलह की तस्वीरें, जब गहलोत ने गुढ़ा को देखते ही कहा- 'ओ लाल डायरी', पायलट का फिर दिखा जलवा

धर्मेंद्र राठौड़ के पारिवारिक कार्यक्रम में अशोक गहलोत और राजेंद्र गुढ़ा की मुलाकात ने 'लाल डायरी' के विवाद को फिर हवा दे दी है. वहीं, सचिन पायलट और गोविंद सिंह डोटासरा की बढ़ती सक्रियता राजस्थान कांग्रेस में नए समीकरणों की ओर इशारा कर रही है.

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शरत कुमार

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Rajasthan News: राजस्थान की राजनीति में इन दिनों शादियों और सगाई समारोहों का सीजन केवल व्यक्तिगत आयोजन नहीं, बल्कि शक्ति प्रदर्शन और पुराने गिले-शिकवे मिटाने का जरिया बन गया है. हाल ही में धर्मेंद्र राठौड़ के बेटे की सगाई और मुकेश भाकर की शादी के दौरान जो तस्वीरें सामने आईं, उन्होंने प्रदेश के सियासी गलियारों में नई चर्चा छेड़ दी है.सबसे ज्यादा चर्चा अशोक गहलोत और राजेंद्र गुढ़ा की मुलाकात की हो रही है.

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गहलोत और गुढ़ा का आमना-सामना

धर्मेंद्र राठौड़ के बेटे की सगाई के कार्यक्रम में जब राजेंद्र गुढ़ा और पूर्व मुख्यमंत्री अशोक गहलोत का आमना-सामना हुआ, तो नजारा देखने लायक था.गुढ़ा को देखते ही गहलोत ने तंजिया लहजे में कहा- "ओ लाल डायरी!".गौरतलब है कि राजेंद्र गुढ़ा वही नेता हैं जिन्होंने विधानसभा में लाल डायरी लहराकर गहलोत सरकार के खिलाफ मोर्चा खोला था.इस मुलाकात के दौरान धर्मेंद्र राठौड़ ने बीच-बचाव करते हुए कहा कि सरकार इन्होंने ही बचाई थी और ये बड़े दिलवाले हैं.

लाल डायरी का रहस्य और सियासत

वीडियो रिपोर्ट में चर्चा की गई है कि लाल डायरी के पन्ने कितने विस्फोटक थे.इसमें कथित तौर पर ठेकों की सौदेबाजी, पैसों के लेन-देन और सचिन पायलट व अशोक गहलोत के बीच दूरियां बढ़ाने की साजिशों का जिक्र था.प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने भी चुनाव के दौरान लाल डायरी का जिक्र कर वादा किया था कि इसका सच सामने लाएंगे.हालांकि, अब यह डायरी सियासत की फाइलों में कहीं खो गई है.

सचिन पायलट का 'आजादशत्रु' अवतार

दूसरी तरफ, सचिन पायलट का जलवा इन समारोहों में बरकरार दिखा.मुकेश भाकर की शादी में उमड़ा जनसैलाब किसी राजनीतिक रैली से कम नहीं था.पायलट ने धर्मेंद्र राठौड़ और रोहित बोरा जैसे उन नेताओं के कार्यक्रमों में भी शिरकत की, जो कभी उनके धुर विरोधी माने जाते थे.राजनीति के 'आजादशत्रु' कहे जाने वाले पायलट इन मुलाकातों के जरिए कड़वाहट को मिटाने की कोशिश कर रहे हैं.

डोटासरा की बढ़ती ताकत और गहलोत का रुख

रिपोर्ट के मुताबिक, पीसीसी चीफ गोविंद सिंह डोटासरा ने प्रदेश अध्यक्ष के पद की गरिमा को मजबूत किया है.अब बड़े नेताओं को उनसे मिलने उनके आवास पर जाना पड़ रहा है.दिल्ली में डोटासरा की बढ़ती पैठ को देखते हुए अब अशोक गहलोत भी अंदरूनी लड़ाई को खत्म करने के संकेत दे रहे हैं. हालांकि, राजनीति के जानकार कहते हैं कि अशोक गहलोत के घर जाने या किसी के घर उनके जाने के पीछे हमेशा एक गहरी बिसात होती है.

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