राजस्थान की राजनीति में इन दिनों बिसात बिछी हुई है और चालें ऐसी चली जा रही हैं कि कांग्रेस से लेकर बीजेपी तक के समीकरण बदलते नजर आ रहे हैं. ताज़ा रिपोर्टों के अनुसार, पूर्व मुख्यमंत्री अशोक गहलोत के गुट ने प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष गोविंद सिंह डोटासरा की घेराबंदी शुरू कर दी है. सियासी गलियारों में चर्चा है कि डोटासरा की जगह नए अध्यक्ष की तलाश तेज़ हो गई है और गहलोत के 'दूत' दिल्ली दरबार में हाजिरी लगाने लगे हैं.
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गहलोत की 'घेराबंदी' और डोटासरा का भविष्य
राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि गोविंद सिंह डोटासरा को सचिन पायलट से कभी खतरा नहीं रहा, बल्कि असली 'खतरा' अशोक गहलोत की रणनीतियों से है. गहलोत लगातार जाट नेताओं से मुलाकात कर रहे हैं, जिसे डोटासरा के विकल्प की तलाश के तौर पर देखा जा रहा है. कहा जा रहा है कि राजस्थान में अपनी खोई हुई सियासी जमीन मजबूत करने के लिए गहलोत कैंप को डोटासरा की विदाई ज़रूरी लग रही है.
सचिन पायलट का बढ़ता कद और स्टार प्रचारकों की सूची
दूसरी तरफ, सचिन पायलट का कद राष्ट्रीय स्तर पर लगातार बढ़ रहा है. तमिलनाडु और पश्चिम बंगाल के चुनावों के लिए जारी स्टार प्रचारकों की सूची में सचिन पायलट और विनोद जाखड़ को जगह मिलना इस बात का संकेत है कि आलाकमान अभी भी पायलट पर भरोसा जता रहा है. हालांकि, राजस्थान की स्थानीय राजनीति में पायलट और डोटासरा के बीच के तालमेल पर ही कांग्रेस का भविष्य निर्भर करेगा.
रविंद्र सिंह भाटी: सुरक्षा हटी तो बढ़ी सहानुभूति?
बाड़मेर की राजनीति में रविंद्र सिंह भाटी एक बड़ा फैक्टर बनकर उभरे हैं. हाल ही में जयपुर में 'पूर्ण बचाओ रैली' के दौरान हुए संघर्ष और भाटी की सुरक्षा हटाए जाने के फैसले को लेकर सवाल उठ रहे हैं. जानकारों का कहना है कि सुरक्षा हटाकर सरकार अनजाने में भाटी को जनता के बीच 'सहानुभूति' का पात्र बना रही है. भाटी की बढ़ती लोकप्रियता बीजेपी के लिए सिरदर्द साबित हो सकती है.
हनुमान बेनीवाल का आक्रामक रुख
राष्ट्रीय लोकतांत्रिक पार्टी (RLP) के हनुमान बेनीवाल भी चर्चा में हैं. यूपीए (UPA) की बैठक में पहली बार ससम्मान बुलाए जाने के बाद बेनीवाल ने लोकसभा में एनडीए (NDA) पर तीखे हमले बोले हैं. उन्होंने 'एपस्टीन फाइल' और अन्य गंभीर मुद्दों को लेकर सरकार को घेरा है. हालांकि, बेनीवाल की कांग्रेस के साथ नजदीकी खुद कांग्रेस के लिए भी चिंता का विषय है, क्योंकि दोनों का वोट बैंक लगभग एक ही है.
बीजेपी में भजनलाल बनाम वसुंधरा?
बीजेपी की बात करें तो मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा का कद लगातार बढ़ रहा है. उन्हें तमिलनाडु और बंगाल में चुनाव प्रचार की जिम्मेदारी दी गई है, जबकि वसुंधरा राजे को फिलहाल इन बड़े आयोजनों से दूर रखा गया है. मारवाड़ी समुदाय को साधने के लिए भजनलाल शर्मा वहां रोड शो और बैठकें कर रहे हैं.
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