राजस्थान के सलूंबर जिले के लसाड़िया क्षेत्र से एक दिल दहला देने वाली खबर सामने आ रही है. यहां एक अज्ञात और रहस्यमयी बीमारी ने मासूम बच्चों को अपना निशाना बनाना शुरू कर दिया है. सरकारी आंकड़ों के अनुसार अब तक 7 बच्चों की मौत हो चुकी है, जबकि विपक्ष इसे कहीं बड़ा आंकड़ा बता रहा है. इलाके में दहशत का माहौल है और लोग इसे 'भूतिया बीमारी' तक कहने लगे हैं.
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'15 बच्चों की हो चुकी है मौत'- टीकाराम जूली
नेता प्रतिपक्ष टीकाराम जूली ने सरकार पर संवेदनहीनता का आरोप लगाते हुए दावा किया कि अब तक कम से कम 15 बच्चों की जान जा चुकी है. उन्होंने विधानसभा में इस मुद्दे को उठाते हुए कहा कि बार-बार मांग के बावजूद अभी तक उचित जांच नहीं हुई है. जूली ने स्वास्थ्य सेवाओं की बदहाली पर भी सवाल उठाए और कहा कि लसाड़िया सीएचसी में 10 में से 8 पद खाली पड़े हैं.
क्या हैं बीमारी के लक्षण?
पीड़ित परिवारों और चश्मदीदों के अनुसार, बच्चों को अचानक जी घबराने और झटके आने की समस्या होती है. एक पीड़ित पिता ने बताया कि उनकी बेटी को रात में झटका आया, फिर सुबह उल्टी हुई और झाग निकलने लगा. इसके बाद बच्ची की आवाज बंद हो गई और कुछ ही घंटों में उसकी मौत हो गई. स्वास्थ्य विभाग अभी तक यह पता नहीं लगा पाया है कि यह वायरल है, संक्रमण है या कुछ और.
मंत्री बाबूलाल खराड़ी ने माना- 'यह सामान्य बीमारी नहीं'
जनजातीय क्षेत्रीय विकास मंत्री बाबूलाल खराड़ी ने पीड़ित परिवारों से मुलाकात की. उन्होंने स्वीकार किया कि यह कोई सामान्य बीमारी नहीं है और इसकी गंभीरता को देखते हुए हाई लेवल जांच की जरूरत है. उन्होंने बताया कि चूंकि अधिकांश मामलों में पोस्टमार्टम नहीं हुआ, इसलिए सटीक कारण का पता लगाना मुश्किल हो रहा है. हालांकि, अब एक बच्ची का विसरा जांच के लिए भेजा गया है.
स्वास्थ्य विभाग की कार्रवाई
मामला बढ़ने के बाद जयपुर से एक विशेषज्ञ मेडिकल टीम सलूंबर पहुंची है. टीम ने ग्रामीणों के साथ बैठक की है और मौसमी बीमारियों से बचाव के उपाय बताए हैं. फिलहाल स्वास्थ्य विभाग की टीमें घर-घर जाकर फॉगिंग कर रही हैं और बच्चों की स्क्रीनिंग की जा रही है. मुख्यमंत्री से विशेष सहायता दिलाने का आश्वासन भी दिया गया है.
ग्रामीणों में आक्रोश और भय
लगातार हो रही मौतों से कुंडा गांव और आसपास के इलाकों में भारी गुस्सा है. मृत बच्चों में कई चचेरे भाई-बहन भी शामिल हैं, जिससे कई परिवारों पर दुखों का पहाड़ टूट पड़ा है. ग्रामीण सवाल कर रहे हैं कि आखिर प्रशासन कब तक इस संकट को रोक पाएगा.
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